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येस बैंक: सेवानिवृत्त लोगों की बचत खतरे में

जश कृपलानी / मुंबई March 19, 2020

येस बैंक के अतिरिक्त टियर-1 (एटी-1) बॉन्ड में सीधे तौर पर निवेश करने वाले सेवानिवृत्त लोगों की जीवन भर की बचत खतरे में पड़ गई है क्योंकि इस बैंक की पुनर्गठन योजना के तहत एटी-1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने का निर्णय लिया गया है।

66 वर्षीय सेवानिवृत्त विंग कमांडर देव ने कहा, 'एटी-1 बॉन्ड को पूरी तरह बट्टे खाते में डालना हमें जीवन भर के लिए दंडित करने जैसा है क्योंकि हमने सभी करों का भुगतान करने के बाद इस रकम को अपने बुढ़ापे के लिए रखा था। येस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर (आरएम) को अपना लक्ष्य पूरा करना था और इसलिए उन्होंने मेरे जैसे बचत खाताधारकों को भी आक्रामक तरीके से इस बॉन्ड की बिक्री की जबकि मैंने स्पष्ट तौर पर बताया था कि बैंक में सावधि जमा जैसी सुरक्षित योजनाएं मेरी प्राथमिकता हैं। उन्होंने सुरक्षा के लिए आश्वस्त किया था कि यह बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित है।'

एक आकलन के अनुसार, इन बॉन्डों में व्यक्तिगत निवेशकों का निवेश 1,000 करोड़ रुपये है। येस बैंक के एटी-1 बॉन्ड के निवेशकों में अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं। इसमें पूर्व सैनिकों और सरकारी कर्मचारियों से लेकर आईटी क्षेत्र के लोग भी शामिल हैं। 

अधिकांश संस्थागत बॉन्डधारकों के बदले ऐक्सिस ट्रस्टी द्वारा बंबई उच्च न्यायालय का रुख किए जाने के बाद व्यक्तिगत बॉन्डधारक भी उच्च न्यायालय में शिकायत करने की योजना बना रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी। ऐक्सिस ट्रस्टी बॉन्डधारकों को अपनी दलील पूरी करना अभी बाकी है। साथ ही येस बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय को भी अपना पक्ष रखना बाकी है।

व्यक्तिगत बॉन्डधारकों ने आरोप लगाया है कि बैंक के रिलेशंस मैनेजर ने उन्हें गुमराह करते हुए इस बॉन्ड की बिक्री की थी। येस बैंक के एटी-1 बॉन्ड को बट्टेखाते में डाले जाने के कारण अब वे एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां उनकी जीवन भर की बचत खतरे में है।

येस बैंक ने खबर लिखे जाने तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की क्योंकि यह मामला फिलहाल अदालत में है। येस बैंक के एटी-1 बॉन्डधारकों में से कई इस बैंक के जमाकर्ता भी हैं। उन्होंने दावा किया है कि बैंक के रिलेशंस मैनेजर ने आक्रामक तरीके से इस बॉन्ड की बिक्री की थी। 

मेडल पाने वाले एक पूर्व सैनिक की बेटी रेणुका शर्मा (बदला हुआ नाम) ने कहा कि येस बैंक के रिलेशंस मैनेजर और उनके सहकर्मियों ने उन्हें यह बॉन्ड थोपते हुए इसे सावधि जमा (एफडी) से भी सुरक्षित करार दिया था। उन्होंने कहा, 'उन्होंने हमें यह भी कहा था कि वे इन बॉन्डों की पेशकश करते हुए मुझे विशेष तरजीह दे रहे हैं क्योंकि इन बॉन्डों में केवल बड़ी-बड़ी कंपनियों का ही निवेश है।'
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