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घर बैठे डॉक्टरों से परामर्श की बढ़ी मांग

सोहिनी दास /  March 19, 2020

कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर दूरी बनाने के बढ़ते चलन से अस्पताल तथा क्लीनिक प्रभावित होने लगे हैं। इस महामारी से बचने के लिए अधिकांश लोग अस्पताल जाने से बच रहे हैं और वर्चुअल सलाह को वरीयता दे रहे हैं। साथ ही, वीजा प्रतिबंधों के चलते चिकित्सा पर्यटन भी प्रभावित हो रहा है। ऑनलाइन सलाह के बढ़ते चलन के बीच डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म प्रैक्टो ने फिजिशियन से सलाह लेने के मामलों में 3-4 गुना तेजी दर्ज की है।

प्रैक्टो के प्रवक्ता ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर एक सामान्य चिकित्सक आमतौर पर रोजाना 24-30 मरीजों को देखता था जबकि अब यह संख्या 3-4 गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा, 'चिकित्सकों को सुबह 2-3 बजे, रात्रि 10-11 बजे चिकित्सकीय सलाह के लिए आवेदन आ रहे हैं। क्भारतीय काफी चिंतित हैं और मामूली लक्षण होने पर भी चिकित्सकीय परामर्श ले रहे हैं। साथ ही, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हालिया जोखिम के चलते अस्पताल नहीं जाना चाहते और इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।'

प्रैक्टो पर पिछले सप्ताह आने वाले सभी आवेदनों में से 53 प्रतिशत कोरोनावायरस से संबंधित थीं। प्रवक्ता ने बताया, 'हमने पिछले चार सप्ताह में अपने चिकित्सकों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ा दी है जिससे ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। हम मरीजों को दूरस्थ सलाह देने के उद्देश्य से अस्पतालों तथा चिकित्सकों तक पहुंच बना रहे हैं। इससे लोगों को एक जगह पर इकट्ठा नहीं होना पड़ता और मेडिकल स्चाफ को भी संभावित मरीज से दूर रखता है।'

प्रैक्टो ने उपयोगकर्ताओं से रिपोर्ट, तस्वीरें तथा वीडियो कॉल का उपयोग करने के लिए कहा है। ये सेवाएं सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे उपलब्ध हैं। कंपनी के मुख्य स्वास्थ्य रणनीति अधिकारी एलेक्जेंडर कुरुविला बताते हैं, 'रोजाना नवए मामले सामने आने से कोरोनावायरस ने घबराहट पैदा कर दी है। सामान्य सर्दी-जुकाम के लक्षणों से मेल खाते कोरोनावायरस के लक्षण से दोनों में अंतर करना मुश्किल हो गया है। लोग भीड़भाड़ वाले अस्पतालों में जाने के बजाय ऑनलाइन सलाह लेना मुनासिब समझ रहे हैं।'

ई-फार्मेसी तथा हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म 1एमजी पर सर्दी-जुकाम के लक्षणों के साथ सलाह लेने वाले लोगों की संख्या में मार्च के बाद से 300 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता के चलते देशभर से परामर्श संबंधी कॉल आ रही हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र के एक अन्य प्लेटफॉर्म डॉकऑनलाइन के अनुसार भी देश के टेलीमेडिसिन क्षेत्र में तेजी दर्ज की गई है। कंपनी के संस्थापक तथा बोर्ड सदस्य मारकस मोदिंग ने कहा, 'डॉकऑनलाइन पर फरवरी के मुकाबले मार्च में संख्या दोगुनी हो गई।'

एक तरफ वर्चुअल तथा टेलीफोनिक सलाह लेने की संख्या में तेजी आ रही है वहीं अस्पतालों में आने वाले लोगों की संख्या घट रही है, विशेषकर विदेशी मरीजों की। वीजा प्रतिबंधों के चलते कम विदेशी मरीज भारत आ रहे हैं। उद्योग का कहना है कि भारत की यात्रा करने वाले मरीजों में सर्जरी तथा कंसल्टेशन लेने वालों की संख्या अधिक हैं लेकिन उन्होंने अब अपनी यात्राएं स्थगित कर दी हैं।

मणिपाल हॉस्पिटल्स के मुख्य कार्याधिकारी दिलीप जोस बताते हैं कि अभी भारत में रह रहे मरीज ही अस्पताल में आ रहे हैं। अस्पताल के 6-7 फीसदी मरीज विदेश़ी नागरिक होते हैं। उन्होंने कहा, 'अप्रैल में मरीजों की संख्या में वास्तविक गिरावट देखने को मिलेगी, जब कोई बी अस्पतान नहीं जाना चाहेगा और स्थिति बेहतर होने का इंतजार करेगा।'

जोस ने आगे कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रोगी के लिए प्रति व्यक्ति औसत राजस्व में लगभग 7-8 प्रतिशत का अंतर है। हालांकि अस्पताल मार्च तिमाही के आंकड़े साझा नहीं कर रहे हैं लेकिन उन्होंने स्वीकार किया है कि विदेशी नागरिकों की कमी से काफी नुकसान होगा।

कोलकाता स्थित मेडिका ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन आलोक रॉय ने बिजऩेस स्टैंडर्ड को बताया, 'प्रत्येक महीने हमारे पास करीब 1000 नए रोगी (मेडिकल टूरिस्ट पर) आते थे जिसमें रिव्यू तथा स्वास्थ्य जांच के लिए आने वाले मरीज भी शामिल हैं। फिलहाल हम एक महीने में करीब 4,000 देख रहे हैं।' ये मरीज मुख्यत: बांग्लादेश, भूटान और दूसरे देशों से आते हैं। मेडिका अस्पतालों की कुल कमाई में मेडिकल टूरिज्म का हिस्सा करीब 8 प्रतिशत है।

हालांकि मेडिका की कमाई में भी तेज गिरावट आई है। रॉय का कहना है कि रोजाना 100 मरीजों से संख्या घटकर करीब 6 मरीज पर आ गई है। उन्हें महसूस होता है कि आने वाले दिनों में यह संख्या भी लगभग खत्म हो जाएगी।

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