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किस्त पर भुगतान से कंपनियों को होगी बचत

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली March 18, 2020

भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को एजीआर बकाए के तहत सालाना करीब 8,223 करोड़ रुपये (वोडाफोन को 5,577 करोड़ रुपये) चुकाने होंगे, जो विश्लेषकों के मुताबिक दूरसंचार विभाग की तरफ से 8 फीसदी ब्याज के साथ 20 साल तक चुकाने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर आधारित है। 

कुल एजीआर बकाए की गणना दूरसंचार विभाग की मांग पर आधारित है, जो हालांकि दूरसंचार कंपनियों के आकलन से काफी ज्यादा है। यह एजीआर बकाए की शेष राशि पर आधारित है, जिसे दूरसंचार कंपनियोंं को चुकाना है और यह सरकार को चुकाई गई रकम को समायोजित करने के बाद का आंकड़ा है। उदाहरण के लिए भारती एयरटेल पहले ही एजीआर बकाए के तहत 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है।

8 फीसदी ब्याज दर औसत ब्याज दर से काफी कम है, जो लाइसेंस की शर्तों में लिखी गई है और यह करीब 13.0 फीसदी है। कंपनियोंं पर बकाया अप्रैल 2003 से अप्रैल 2019 के लिए है। इसका अनुमान भारतीय स्टेट बैंक के पीएलआर और एमसीएलआर दरों पर लगाया गया है और यह 16.75 फीसदी के उच्चस्तर से लेकर 11.80 फीसदी के निचले स्तर तक है। किस्त पर कम ब्याज दर के परिणामस्वरूप दोनों कंपनियों को सालाना करीब 3,900 करोड़ रुपये की बचत होगी। पूरे 20 साल में ब्याज के तौर पर कुल बचत 78,000 करोड़ रुपये अनुमानित है। हालांकि यह आकलन औसत ब्याज दर 13.9 फीसदी पर आधारित है और अगर इसकी तुलना अप्रैल 2019 की 12.20 फीसदी की दर से की जाए तो यह निश्चित तौर पर और नीचे आएगा।

वास्तविकता यह है कि एजीआर बकाए के तौर पर दोनों कंपनियों की तरफ से चुकाई जाने वाली रकम इनकी तरफ से स्पेक्ट्रम के टाले गए भुगतान में दी जाने वाली रकम (18,024 करोड़ रुपये) के आधे से भी कम है। सरकार की तरफ से दो साल की छूट दी गई है और यह एक साल में 23,918 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जो उनकी तरफ से एजीआर बकाए के तौर पर चुकाई जाने वाली सालाना रकम के तीन गुने से भी ज्यादा है।

हालांकि अन्य नजरिये से देखें तो बोझ अभी भी काफी ज्यादा है। उदाहरण के लिए वोडाफोन आइडिया के मामले को देखें तो उद्योग के आंकड़ों के आधार पर वह लाइसेंस शुल्क व एसयूसी के लिए सालाना करीब 4,440 करोड़ रुपये चुकाती है। एजीआर बकाए के 5,500 करोड़ रुपये के साथ उसे कुल मिलाकर सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। साथ ही राजस्व बढऩे के साथ लाइसेंस शुल्क और एसयूसी में भी बढ़ोतरी होगी।

उद्योग के स्तर पर अगर सभी दूरसंचार कंपनियां (अपना कामकाज समेट चुकी कंपनियों या एनसीएलटी वाली कंपनियों समेत) एजीआर बकाया चुकाती है तो सरकार को 20 साल तक सालाना 14,593 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह 21,500 करोड़ रुपये से काफी कम है, जो उसे 13.9 फीसदी की ब्याज दर पर किस्तों में मिलेंगे।

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