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निर्यात संवर्धन योजनाओं में विस्तार चाहते हैं निर्यातक

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली March 18, 2020

वैश्विक अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस ने बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिसे देखते हुए भारत के निर्यातकों ने सभी निर्यात संवर्धन योजनाओं को तत्काल विस्तार दिए जाने, गैर निष्पादित संपत्ति के मानकों में राहत और बैंकों द्वारा आसान व तेजी से कर्ज दिए जाने की मांग की है। वित्त एवं वाणिज्य मंत्रालयों को भेजे गए पत्र में फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने कहा है कि तमाम विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पृथक्करण और बंदी चल रही है, जिसकी वजह से भारत के सामानों की मांग ठप पड़ गई है। 

फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने कहा कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के कारण सुस्त पड़े कारोबार के बाद इस संकट के कारण निर्यातकों को डर है कि खरीदार बड़े ऑर्डर रद्द कर सकते हैं और आगे की सूचना तक आपूर्ति रोकने को कह सकते हैं। उन्होंने कहा, 'भारतीय निर्यातक जिन मामलों में कांट्रैक्ट की शर्तों का पालन कर रहे हैं, खरीदार निर्यातकों के दावों और देनदारियों से इनकार कर सकते हैं।' 

फियो ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह सुनिश्चित करे कि बैंक कंपनी के खातों को एनपीए घोषित करने को कम से कम एक साल के लिए टाल दें क्योंकि कारोबार न होने और कारोबारी खर्च बरकरार रनहे की वजह से तमाम खाते एनपीए हो सकते हैं। संगठन की यह भी मांग है कि मौजूदा कार्यशील पूंजी की सीमा स्वत: 25 प्रतिशत बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज को जमानत मुक्त किए जाने की मांग की गई है। 

फियो ने बुधवार को कहा, 'ग्राहकों की सुस्त मांग और नकदी की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक रेमिटेंड अवधि 9 महीने से बढ़ाकर 15 महीने कर सकता है। रिजर्व बैंक कॉशन लिस्टिंग से छूट भी 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 कर सकता है।' उद्योग के मुताबिक रोजगार केंद्रित उद्योगों जैसे कालीन, हस्तशिल्प, परिधान, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद एवं खराब होने वाले पदार्थों का कारोबार कोरोना प्रभावित देशों अमेरिका और यूरोप बड़े बाजारों से होता है, जो वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। 

चाहते हैं संवर्धन योजनाएं

फियो ने मौजूदा निर्यात संवर्धन योजनाओं की तिथि 31 मार्च 2021 तक बढ़ाए जाने की मांग की है। संगठन यह भी चाहता है कि सरकार निर्यात के सभी लाभों को निर्यातकों को जारी कर नकदी की स्थिति दुरुस्त करे, जिनमें जोखिम वाले निर्यातक शामिल हैं और जोखिम वाले निर्यातकों से बॉन्ड लिए जा सकते हैं। 

अधिकारियों ने संकेत दिया कि मौजूदा योजनाओं को आसानी से विस्तार दिया जा सकता है। सरकार ने एमईआईएस को बंद करने का फैसला किया है, जो सबसे बड़ी निर्यात संवर्धन योजना है। विश्व व्यापार संगठन द्वारा इसे कारोबार बिगाडऩे वाली योजना करार देने के बाद सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया था, जिसमें सीधे सब्सिडी दी जाती है। अमेरिका के साथ विवाद की सुनवाई के बाद संगठन ने नवंबर 2019 में भारत के खिलाफ फैसला किया था और कहा था कि भारत तत्काल सभी निर्यात संवर्धन योजनाएं 4 महीने के भीतर बंद करे। बाद में भारत ने विवाद समाधान पैनल के नियम के खिलाफ अपील की थी। 

लेकिन बुधवार को पीयूष गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ का अपीली निकाय, जो विवादों का समाधान करता है, इस समय काम नहीं कर रहा है। ऐसे में अपील लंबित रखी गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने बुधवार को लोकसभा में कहा था, 'जब तक अपील का निपटारा नहीं हो जाता है, भारत पैनल की सिफारिशों को लागू करने को बाध्य नहीं है।' 

फियो ने अब यह भी मांग की है कि आगामी विदेश व्यापार नीति में पूंजीगत वस्तुओं के एडवांस अथरॉइजेशन और निर्यात संर्वधन की निर्यात बाध्यता अवधि का एक साल तक के लिए विस्तार किया जाए। यह नीति अप्रैल में आने की संभावना है। 

एक विवादास्पद कदम के रूप में निर्यातक यह भी चाहते हैं कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम को उचित पूंजी मुहैया कराई जाए, जिसमें वे सभी कर्मचारी शामिल किए जाएं जिन्हें कम कारोबार के कारण छुट्टी दे दी गई है, जिससे उद्योग पर मजदूरी का अतिरिक्त बोझ न पड़े। 

फियो ने कहा है कि अगर स्थिति में तेजी से सुधार होता है तो अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कुछ उत्पादों के मामले में फायदा हो सकता है। बहरहाल इस समय तमाम एमएसएमई का बने रहना मुश्किल है, जो निर्यात से जुड़ी हैं।

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