बिजनेस स्टैंडर्ड - एनसीएलटी की बढ़ेगी क्षमता
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एनसीएलटी की बढ़ेगी क्षमता

रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली March 17, 2020

सरकार राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) के पीठों की क्षमता बढ़ाने जा रही है। सरकार धनशोधन अक्षमता और दिवालिया मामलों के लिए समर्पित पीठें बनाकर निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने और देरी को घटाना चाहती है। एनसीएलटी के लिए 40 नए पद भी जोड़े जाएंगे। 

वाणिज्य मामलों के मंत्रालय के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने वित्त संबंधी संसदीय समित को इस आशय की जानकारी दी है। श्रीनिवास ने कहा 'जब एनसीएलटी का गठन किया गया था तब आईबीसी की कोई चर्चा नहीं थी। इसे केवल कंपनी कानून न्यायालय के तौर पर गठित किया गया था। अब इसमें आईबीसी के मामलों का दबदबा है।'  

आईबीसी के मामलों में उछाल आने और ये मामले एनसीएलटी की प्राथमिकता में होने के कारण कंपनी संबंधी मामलों में निर्णय होने में काफी देर हो रही है।  

 

सरकार प्रतिस्पर्धा कानून के लिए विशिष्टï पीठें बनाने की योजना बना रही है ताकि अपीली अधिकरण पर दबाव को घटाया जा सके जिसके पास कंपनी कानून और आईबीसी से लेकर प्रतिस्पर्धा कानून और राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण तक के मामले भेजे जाते हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने एनसीएलटी पीठों के लिए भर्ती नियम तय कर दिए हैं। एनसीएलटी में कुल स्वीकृत नियमित कर्मचारियों की संख्या 320 है। एनसीएलटी में करीब 725 लोग आउटसोर्स के जरिये भर्ती किए जाते हैं। प्रत्येक पीठ के लिए अलग से तीन से चार कानून क्लर्क काम पर रखे गए हैं।      

मंत्रालय के सचिव ने कहा, 'एनसीएलटी में 63 में से 48 पद भरे हैं। अब भर्ती नियम तैयार हैं जिसके बाद हम उम्मीद करते हैं कि छह महीनों या कुछ समय में सभी नियमित कर्मचारियों के पद भर दिए जाएंगे।'

आरंभ होने के बाद से करीब 62,000 मामले एनसीएलटी में आए हैं जिनमें औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड और उच्च न्यायालयों की ओर से भेजे गए मामले शामिल हैं। इनमें से 40,000 से अधिक मामलों को निपटाया जा चुका है और 21,500 मामले लंबित हैं। सरकार का अनुमान है कि एनसीएलटी में भेजे जाने वाले मामलों की संख्या करीब 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। और अधिक संख्या में दबावग्रस्त कंपनियां अधिकरण के दरवाजा खटखटा सकती हैं जिससे मामलों का दबाव और बढऩे की उम्मीद है। कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय आईबीसी के माध्यम से अधिकरण के पास भेजे जाने वाले मामलों की शुरुआती सीमा को मौजूदा 1 लाख रुपये से अधिक करने पर भी विचार कर रहा है। श्रीनिवास ने कहा, 'कानून हमें 1 करोड़ रुपये तक की शुरुआती सीमा निर्धारित करने की छूट देता है लेकिन निस्संदेह यह कम होने से व्यवहार पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि उन्हें आईबीसी प्रक्रिया में घसीटे जाने का भय होता है। लेकिन निस्संदेह इस पर पुनर्विचार किया जा रहा है।'

मामलों के तीव्र निपटान के लिए सरकार ने 15 मार्च को चेन्नई में एनसीएलएटी की एक और शाखा बनाई थी जहां एनसीएलटी के पीठों के आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई होती है। इसके अधिकार क्षेत्र में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, लक्षद्वीप और पुदुच्चेरी है।

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