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शेयर बाजार: फिलीपींस में बंद, भारत में भी होगा?

समी मोडक /  March 17, 2020

दुनिया भर में कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने से करोड़ों डॉलर का नुकसान हो चुका है और अब निवेशक इसे लेकर विचार कर रहे हैं कि क्या पूंजी में और ज्यादा नुकसान से बचने के लिए शेयर बाजारों को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया जाना चाहिए। 

सोमवार को, फिलीपींस वित्तीय बाजारों में कारोबार अनिश्चितकाल के लिए बंद करने वाला पहला देश बन गया। फिलीपींस ने कोरोनावायरस की महामारी की वजह से पैदा हुए मंदी के हालात से बचने के लिए बाजारों में कारोबार बंद करने का कदम उठाया है। 

यह पहली बार नहीं है जब कारोबार को बंद किया गया है। 2001 में आतंकवादी हमलों (9/11)  के बाद अमेरिकी बाजारों को एक सप्ताह तक बंद रखा गया था। इसी तरह, यूनान ने भी 2015 के यूरोपीय ऋण संकट के दौरान एक महीने से ज्यादा समय तक अपने बाजार को बंद रखा था। इसलिए अब यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या कारोबार बंद करना नियामकीय अधिकारियों के लिए एकमात्र विकल्प रह गया है?

फिलीपींस के शेयर बाजार में इस साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है, जो एशिया में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर बाजारों में से एक है। बाजार बंद रखने की फिलीपींस की राह में श्रीलंका भी शामिल हो गया है। विश्लेषकों की राय अलग अलग है। बाजार बंद रखने के खिलाफ नजरिया रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इससे निवेशकों के लिए बाहर निकलने का अवसर समाप्त हो गया है, जबकि इसका समर्थन करने वालों का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी शांत होने तक बाजारों को ब्रेक मिल सकता है। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजर के मुख्य कार्याधिकारी जी चोकालिंगम का कहना है कि भारत जैसा बड़ा बाजार ऐसा कभी नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा, 'इससे साख समाप्त हो जाएगी और विदेशी निवेशक धारणा प्रभावित होगी।' एनवाईएसई की अध्यक्ष स्टेसी कनिंघम ने इस कदम का विरोध करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है। उन्होंने कहा, 'बाजारों को खुला रखना और उनमें सही ढंग से कामकाज बनाए रखना जरूरी है। बाजार मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय के दौरान हर किसी के द्वारा महसूस की जा रही बड़ी अनिश्चितताओं का प्रतिबिंब है। बाजारों को बंद रखने से बाजार में गिरावट की मौजूदा प्रवृत्ति में बदलाव नहीं आएगा, और साथ ही इससे निवेशक धारणा में पारदर्शिता कमजोर होगी तथा अपनी पूंजी तक निवेशकों की पहुंच घटेगी। इससे मौजूदा बाजार की चिंता में सिर्फ इजाफा ही होगा।'

हाल के सप्ताहों में, कई वैश्विक बाजारों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और इससे निवेशकों को 15 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। बाजार जानकारों का कहना है कि कोरोनावायरस की वजह से पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को शेयरों की कीमतों को लेकर सही आकलन करना मुश्किल हो रहा है।

हालांकि कई विश्लेषक फिलीपींस द्वारा उठाए गए कदम के पक्ष में दिख रहे हैं। 

आईजी एशिया में बाजार रणनीतिकार जिंज्ञी पान ने ब्लूमबर्ग को बताया, 'यदि हालात में सुधार आता है तो यह बंदी बाजार के लिए सकारात्मक काम करेगी और अल्पावधि में अस्थिरता घटेगी, जैसा कि चीन ने किया, भले ही बाजार में शुरू में कुछ हद तक समायोजन की स्थिति देखने को मिली। कोरोनावायरस के प्रसार को लेकर यदि स्थिति लगातार खराब होती गई तो इससे बाजार के पुन: खुलने पर भी बिकवाली देखी जा सकेगी।'

बीडीओ यूनिबैंक में रणनीतिकार जोनाथ रैवेलस ने ब्लूमबर्ग को बताया, 'मेरा मानना है कि यह एक अच्छा कदम है क्योंकि बाजार पहले से ही दबाव में है। कुछ समय का विराम मिलने पर निवेशकों को अपने पोजीशन पर पुनर्विचार करने में मदद मिलेगी। यह एक स्वास्थ्य समस्या है और लगता है कि बाजार की प्रतिक्रिया भी ज्यादा दिखी है।'

यूनाइटेड फस्र्ट पार्टनर्स में एशियाई शोध प्रमुख जस्टिन तांग ने ब्लूमबर्ग को बताया, 'भारी उतार-चढ़ाव की वजह से मौजूदा समय में बाजार में भय बना हुआ है। बाजार बंद रखे जाने से वे लोग प्रभावित होंगे जो आय के लिए ट्रेडिंग पर निर्भर रहते हैं, लेकिन इससे कारोबारियों को हालात का सही तरीके से आकलन करने के लिए समय मिलेगा। इस तरह के आकलन के लिए सिर्फ सप्ताहांत पर्याप्त नहीं है।'

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में गिरावट बाजारों में बंदी, यात्रा पर प्रतिबंध और अन्य पाबंदियों के प्रभाव को दर्शा रही है। चोकालिंगम का कहना है, 'बाजार में कोरोनावायरस के प्रसार का संभावित अपस्फीति प्रभाव दिख रहा है। आपूर्ति और मांग, दोनों पर प्रभाव पड़ा है। लीमन संकट के दौरान, यात्रा पर प्रतिबंध नहीं था, सिर्फ वित्तीय व्यवस्था में भरोसा डगमगाया था। कोरोनावायरस ने अर्थव्यवस्था के कई सेगमेंट्स को प्रभावित किया है।' 

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