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तैयारी का वक्त

संपादकीय /  March 16, 2020

दुनिया भर के देशों में नोवल कोरोनावायरस की महामारी का विकास कमोबेश एक ही ढर्रे पर हुआ है। इसकी वृद्घि एकदम स्पष्ट रही है और गंभीर बीमारों की तादाद कभी न कभी इतनी ज्यादा हो गई कि स्वास्थ्य क्षेत्र का सामान्य बुनियादी ढांचा इसके कारण चरमराने लगा। अलग-अलग देशों में इसका रुझान भिन्न-भिन्न कारकों से अलग रहा है: सामाजिक स्तर पर लोगों का दूरी बरतना, पीडि़तों को अलग-थलग करना, ये प्रतिबंध बीमारी के किस चरण में लगाए गए, कितने परीक्षण किए गए और इस बीमारी के किस चरण में किए गए, उन संभावित पीडि़तों की पहचान कितने सटीक तरीके से की गई जिनमें अब तक बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं और आखिर में यह कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली इसका प्रबंधन करने में किस हद तक सक्षम है।

सरकार ने अब तक कोरोनावायरस पर नियंत्रण करने को लेकर समझदारी भरे कदम उठाए हैं लेकिन आने वाले सप्ताह में इसकी तीव्रता बढ़ सकती है और तब कहीं अधिक व्यापक प्रतिक्रिया की आवश्यकता होगी। देश में ज्यादातर जगह कोरोनावायरस का प्रसार प्रारंभिक स्तर पर है। कुछ जगहों पर स्कूल बंद कर दिए गए हैं लेकिन अयोध्या में रामनवमी के त्योहार जैसे भारी भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम अभी भी होने निर्धारित हैं। सरकार को जल्द से जल्द यह तय करना चाहिए कि इसे लेकर हमारी राष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या होगी? भारत को कोरोनावायरस संबंधी जांच को व्यापक स्वरूप देना चाहिए। हॉन्गकॉन्ग, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे जिन देशों ने भी अपनी आबादी में इस वायरस का प्रसार धीमा करने में सफलता हासिल की है, उन सभी ने इसकी गहन जांच की व्यवस्था की। ऐसा करने से उनको लोगों को लक्षित करने में आसानी हुई जो बड़ी आबादी में वायरस फैला सकते थे। गत सप्ताह के अंत तक भारत में करीब 6,000 लोगों की जांच की जा चुकी थी। मौजूदा प्रोटोकॉल के मुताबिक जांच केवल तभी की जा रही है जब उन लोगों में बीमारी के लक्षण नजर आएं जो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों या बहुत जोखिम वाले इलाके में रहते हों। यह मानक कुछ ज्यादा ही सख्त है। खासकर तब जबकि टेस्ट किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और सरकार के मुताबिक उनका उत्पादन कम कर दिया गया है।

इसके अलावा अगले कुछ सप्ताह में नहीं तो बाद के दिनों में (यदि पैटर्न सन 1918-19 के नोवल इन्फ्लूएंजा जैसा हुआ) देश की आबादी के बड़े हिस्से में नोवल कोरोनावायरस फैल सकता है। भविष्य में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो उससे निपटने की क्या तैयारी है? अन्य देशों का अनुभव हमारे लिए दिशानिर्देश का काम कर सकता है: लोगों को अलग-थलग करना, विस्तारित और विशिष्टï गहन चिकित्सा इकाई स्थापित करना आदि। वेंटिलेटर और मास्क की आवश्यकता होगी। साथ ही ऐसे स्वास्थ्य सुविधा प्रदाताओं की आवश्यकता होगी जो श्वसन प्रणाली में नलिका लगाने में दक्ष हों। देश में इस महामारी का देर से विस्तार हमें तैयारी का अवसर देता है। यह आश्वस्त होने का अवसर नहीं है। 

हालांकि यह मुख्य तौर पर जन स्वास्थ्य की समस्या है और इससे वैसे ही निपटा जाना चाहिए लेकिन इससे निपटने की तैयारी में अर्थव्यवस्था को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अधिकारियों को इस अवधि में उत्पादन में गिरावट को लेकर तैयारी रखनी होगी। इस दौरान समुचित और लक्षित कदम उठाने होंगे। समग्र प्रोत्साहन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह नकारात्मक भी साबित हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा और रुपये की मात्रा बढ़ाकर अपनी तरफ से सही कदम उठाया है।

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