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डायरेक्ट प्लान के निवेशकों को मिल सकता है ज्यादा लाभ

बिंदिशा सारंग /  March 15, 2020

म्युचुअल फंडों में डायरेक्ट प्लान निवेशकों के लिए खुशी का मौका है। दरअसल बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों को सीधे स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्मों से म्युचुअल फंडों की यूनिट खरीदने और बेचने की मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि जो अति धनाढ्य व्यक्ति (एचएनआई) और अन्य लोग अपने स्तर पर जांच-पड़ताल कर चुके हैं वे सीधे एक्सचेंज प्लेटफॉर्म से अलग-अलग फंडों की कितनी भी योजनाएं खरीद सकते हैं। उन्हें अलग-अलग म्युचुअल फंडों की वेबसाइटों पर नहीं जाना होगा। 

म्युचुअल फंड यूनिट खरीदने और बेचने के लिए स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म- बीएसई स्टार म्युचुअल फंड और एनएसई एनएमएफ 2 बहुत लोकप्रिय हैं। बीएसई स्टार म्युचुअल फंड ने फरवरी में महज एक दिन में 1,075 करोड़ रुपये के 10 लाख से अधिक के लेनदेनों को निपटाया है। इस कदम से उन्हें और प्रोत्साहन मिलने के आसार है। 

कुवेरा डॉट इन के संस्थापक और सीईओ गौरव रस्तोगी ने कहा, 'ताजा पहल निवेशकों को म्युचुअल फंड हाउस के डायरेक्ट प्लान खरीदने के लिए प्रोत्साहित करेगी। हम पहले ही अपने लेनदेनों को निपटाने के लिए बीएसई स्टार म्युचुअल फंड का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए एक्सचेंज का बुनियादी ढांचा बेहतर होना पूरे उद्योग के लिए बेहतर होगा।' 

कई विकल्प 

इस समय आप म्युचुअल फंड खरीदने के लिए नियमित या प्रत्यक्ष तरीका अपनाते हैं। नियमित तरीका थोड़ा महंगा है क्योंकि म्युचुअल फंड वितरक योजना चुनने और आपको लेनदेन में मदद करने के लिए कमीशन वसूलते हैं। वहीं प्रत्यक्ष तरीके में आप कुवेरा डॉट इन, पेटीएम मनी, ग्रो जैसे ऑनलाइन पोर्टल के जरिये खरीदारी करते हैं। इसके अलावा सीएएमएस और कार्वी, म्युचुअल फंड यूटीलिटीज जैसे रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट हैं। ये एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन पर बहुत सी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का स्वामित्व है। 

इन्हें एसोसिएएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एम्फी) ने शुरू किया है। फीस आधारित आरआईए स्वप्निल केंधे ने कहा, 'अब निवेशक बिना किसी बिचौलिये की मदद के पूरा निवेश को एक जगह रख सकता है।' अब तक केंधे सीएएमएस ऐप को तरजीह देते हैं, जो बिना किसी बिचौलिये के डायरेक्ट प्लान को मंजूरी देता है। उनका मानना है कि स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म भी अच्छा विकल्प होंगे। सीएएमएस आपको ऐसी सेवा मुहैया कराती है, जिसमें आप सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और एकमुश्त राशि का निवेश कर सकते हैं। 

जहां तक म्युचुअल फंड यूटीलिटीज का सवाल है, यह आपको भारत में 44 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) में से 38 फंड हाउसों में निवेश की मंजूूरी देता है। यह एल्गोरिद्म और तकनीक की मदद से एक कस्टमाइज्ड पोर्टफोलियो के जरिये राबो-एडवाइजरी मुहैया कराता है। हालांकि वे बहुत से राबो-सलाहकारों और मुफ्त लेनदेन प्लेटफॉर्मों के लिए थोड़ा कट-ऑफ समय कम रखते हैं ताकि वे उसी दिन की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) प्राप्त करने की पात्रता हासिल कर सकें। इसकी वजह यह है कि वे एक्सचेंजों के साथ लेनदेन करते हैं। ये एक्सचेंज इन ऑर्डरों को प्राप्त करते है और उन्हें रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंटों के पास भेज देते हैं। 

दूसरे शब्दो में उनका एक अतिरिक्त चरण है। जब आपको सेवानिवृत्ति जैसे वित्तीय लक्ष्यों के लिए निवेश में सलाह की जरूरत है लेकिन पूरे जीवन की वित्तीय योजना की जरूरत नहीं है तो राबो-सलाह एक अच्छा विकल्प है। आपकी सलाह की जरूरतें समय के साथ बदलती हैं और ये प्लेटफॉर्म इन्हें संभालते हैं और सही समय पर सही दिशानिर्देश मुहैया कराते हैं। जहां तक नए स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्मों का सवाल है, वे आपको आधिकारिक समयसीमा तक म्युचुअल फंडों में निवेश करने देते हैं और इसलिए उसी दिन का एनएवी प्राप्त होता है। लेकिन आपको आपकी जरूरत के मुताबिक तैयार पोर्टफोलियो सुझाव नहीं मिलता है। 

इस समय बहुत से पंजीकृत निवेश सलाहकार पहले ही स्टॉक एक्सचेंजों का इस्तेमाल म्युचुअल फंडों की खरीद-बिक्री, एसआईपी, सिस्टेमैटिक निकासी योजना, सिस्टेमैटिक हस्तांतरण योजना आदि में कर रहे हैं। अब ये सभी सुविधाएं डायरेक्ट निवेशकों के लिए भी उपलब्ध होंगी। बीएसई स्टार म्युचुअल फंड के प्रमुख गणेश राम ने कहा, 'इससे एक्सचेंज म्युचुअल फंड वितरण प्लेटफॉर्मों को म्युचुअल फंड यूटिलिटीज के समान मौके मिलेंगे।' यह बात ध्यान में रखें कि डायरेक्ट म्युचुअल फंड निवेश पहली बार निवेश करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि बाजार का उतार-चढ़ाव ऐसे निवेशकों को अपने निवेश में फेरबदल या निकासी करने को बाध्य कर सकता है। इसके नतीजतन उनके अपने निवेश की लंबी अवधि की चक्रवृद्धि संभावनाओं को गंवाने का जोखिम होता है।
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