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बाजार में रक्षात्मक रणनीति अपनाने की जरूरत

बीएस बातचीत
पुनीत वाधवा /  March 15, 2020

सेंट्रम ब्रोकिंग में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ऐंड एडवायजरी के मुख्य कार्याधिकारी निश्चल माहेश्वरी ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि कोरोनावायरस की महामारी ने अप्रत्याशित जोखिम को बढ़ावा दिया है। उन्होंने बताया कि अल्पावधि से मध्यावधि में, रक्षात्मक पोर्टफोलियो की रणनीति अपनाने की सलाह दी  जा रही है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: 

अगले तीन से छह महीनों के दौरान बाजार की स्थिति कैसी रह सकती है?

कोरोनावायरस ऐसे समय में फैला है जब वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। चीन के कुछ प्रांतों में औद्योगिक मंदी की वजह से आपूर्ति शृंखला पर दबाव की आशंका से वैश्विक मजबूती के शुरुआती संकेत कमजोर पड़े हैं। हाल में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक टकराव कम हुआ था और भारत में कुछ सकारात्मक बदलाव दिखे थे। किसी मजबूत घरेलू कारकों के अभाव में, बाजार पर दुनियाभर में कोरोनावायरस से संबंधित घटनाक्रम का प्रभाव बने रहने की आशंका है। इस पृष्ठïभूमि में बाजार अल्पावधि में सीमित दायरे में बने रहने का अनुमान है। आरबीआई अप्रैल की समीक्षा में लगभग 25 आधार अंक की दर कटौती कर सकता है। इसके अलावा हालात में सुधार लाने के प्रयास में लॉन्ग-टर्म रीपो ऑपरेशंस (एलटीआरओ) के अन्य राउंड की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। 

क्या विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में ज्यादा पैसा लगाएंगे?

मौजूदा वैश्विक जोखिम रुझान को देखते हुए निवेशक सुरक्षित समझे जाने वाले परिसंपत्ति वर्गों पर ध्यान दे रहे हैं और जोखिम वाले उभरते बाजारों (ईएम) से परहेज कर रहे हैं। हालांकि यदि आप उभरते बाजारों में से चयन करना चाहते हैं तो भारत आकर्षक निवेश स्थान बना हुआ है। पसंदीदा नीतिगत पहलों के साथ साथ सरकार के विकास लक्ष्यों को देखते हुए ज्यादा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के निरंतर प्रयासों से भी भारतीय पूंजी बाजारों को बड़ी मदद मिली है। भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे शेयरों से कम प्रभावित होने की स्थिति में बनी रह सकती है, क्योंकि वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत का एकीकरण अन्य एशियाई प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी कम है। 

ताजा घटनाक्रम को देखते हुए बैंकिंग सेक्टर पर आपका क्या नजरिया है?

पिछले 12-18 महीनों में कॉरपोरेट और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के समक्ष पैदा हुईं चुनौतियों को देखते हुए, अधिक कॉरपोरेट जोखिम वाले बैंकों से परहेज किया जाना चाहिए। निवेशकों को रिटेल-केंद्रित बैंकों पर ध्यान देना चाहिए। व्यक्तिगत आयकर कटौती की ताजा घोषणाओं के साथ साथ अगली कुछ तिमाहियों में घरेलू मांग में सुधार आने का अनुमान है। इससे रिटेल-केंद्रित बैंकों में ऋण वृद्घि को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त वर्ष 2021 में कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए आपका क्या अनुमान है?

सरकार और आरबीआई द्वारा अपनाए गए उपायों से वृद्घि में आ रही तेजी को देखते हुए हमें वित्त वर्ष 2021 में निफ्टी की आय में 22-23 प्रतिशत की वृद्घि का अनुमान था। लेकिन चीन में कोरोनावायरस की महामारी से वैश्विक औद्योगिक उत्पादन और व्यापार चैनलों में समस्याओं की वजह से घबराहट बढ़ी है। इससे वैश्विक वृद्घि पर जोखिम पैदा हुआ है। यदि यह महामारी अल्पावधि में नियंत्रित नहीं हुई तो आशंका है कि वृद्घि की रफ्तार और नीचे आ सकती है। निवेशकों द्वारा आईटी और एफएमसीजी जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों को ज्यादा पसंद किए जाने की संभावना है। 

क्या बाजार में अगले साल बड़ा सुधार आएगा?

मौजूदा समय में बाजार में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, और बैंकिंग के अच्छे प्रतिफल के साथ धु्रवीकरण की स्थिति बनी हुई है। चूंकि वित्त वर्ष 2021 में हमें बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है, क्योंकि ढांचागत समस्याओं से वृद्घि को पटरी पर लाने की राह प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर आय में सीमित बदलाव दिखने का अनुमान है।

कमजोर आर्थिक वृद्घि की पृष्ठïभूमि में खपत-केंद्रित थीम का योगदान कैसा रहेगा?

एफएमसीजी क्षेत्र में तेजी दिखनी चाहिए। वाहन शेयरों में बड़ी गिरावट आई है और हमें बसंत ऋतु के बाद कोरोनावायरस के प्रसार में वृद्घि नहीं होने का अनुमान जता रहे हैं। उम्मीद है कि गर्मी के मौसम में हालात सामान्य होंगे। निवेशक वाहन क्षेत्र - यात्री वाहनों और दोपहिया- पर विचार कर सकते हैं, लेकिन उन्हें वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में निवेश से परहेज करना चाहिए।

इन सभी घटनाक्रम के बीच आपकी निवेश रणनीति क्या है?

लगता है कि भले ही बुरा समय बीत चुका है, लेकिन हालात सामान्य होने की दिशा में हम धीमी गति से बढ़ रहे हैं। मौजूदा सरकार ने मंदी को स्वीकारा है और वह अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने के लिए लगातार कोशिश करेगी। इस पृष्ठïभूमि में, निवेशकों को नकदी घटानी चाहिए और अच्छे निवेश पर नजर रखनी चाहिए। हालांकि कोरोनावायरस के प्रसार से अप्रत्याशित जोखिम पैदा हुआ है। अल्पावधि से मध्यावधि में, कोरोनावायरस से दुनियाभर में वृद्घि प्रभावित होगी, इसलिए रक्षात्मक पोर्टफोलियो की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।  
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