बिजनेस स्टैंडर्ड - यूरोपीय मंदी से वाहन क्षेत्र होगा प्रभावित
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 28, 2020 11:06 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

यूरोपीय मंदी से वाहन क्षेत्र होगा प्रभावित

राम प्रसाद साहू /  March 15, 2020

घरेलू स्तर पर आर्थिक मंदी से प्रभावित हुए वाहन क्षेत्र को अब यूरोप जैसे प्रमुख भूभागों में मांग से संबंधित चिंताओं को देखते हुए दोहरी अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। यूरोपीय बाजार में गहरी पहुंच वाली कंपनियों ने अपने उन प्रतिस्पर्धियों (खासकर घरेलू बाजार तक केंद्रित) की तुलना में अपने शेयर कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की है। 

जहां निफ्टी ऑटो इंडेक्स पिछले तीन सप्ताहों के दौरान 20 प्रतिशत तक गिरा है, वहीं मदरसन सूमी, टाटा मोटर्स, वेरॉक इंजीनियरिंग, और अपोलो टायर्स में इस अवधि के दौरान 34 प्रतिशत और 48 प्रतिशत के बीच गिरावट आई है। इन कंपनियों में तेज गिरावट काफी हद तक कोरोनावायरस के प्रसार के बाद मांग से जुड़ी चिंताओं की वजह से आई है। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा कि इस महामारी की वजह से पैदा हुए डर से मांग पर दबाव पड़ेगा जिससे बिक्री और संयंत्रों के इस्तेमाल में कमी को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यूरोप में सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल स्पेन, इटली, हंगरी और फ्रांस द्वारा उठाए जा रहे आपात उपायों की वजह से आपूर्ति शृंखला और बिक्री पर दबाव पड़ रहा है जिससे निवेशकों के लिए धारणा नकारात्मक हो गई है। 

कुछ यूरोपीय वाहन निर्माताओं के लिए भी अल्पावधि परिदृश्य कमजोर पड़ा है। उदाहरण के लिए डेमलर पर आपूर्ति शृंखला और मांग संबंधित दबाव पड़ सकता है। कंपनी का मानना है कि 2020 में मर्सिडीज बेंज कारों के लिए बिक्री 2019 के स्तर से नीचे रह सकती है। रेनो को आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने की आशंका है क्योंकि उसके ज्यादातर कलपुर्जे चीन के हुबेई प्रांत से आते हैं। निसान मोटर अपनी रिकवरी योजना में लागत कटौती पर जोर दे रही है। कंपनी के दूसरे सबसे बड़े बाजार चीन में वाहन बिक्री फरवरी में 80 प्रतिशत घटी है, क्योंकि यात्रा पर प्रतिबंध और कुछ मार्गों को बंद किया गया है।

ये कंपनियां भारतीय वाहन निर्माताओं के लिए सबसे बड़े ग्राहकों में शुमार हैं और यूरोप एक प्रमुख बाजार है। मदरसन सूमी का लगभग 37 प्रतिशत राजस्व यूरोप (स्पेन और जर्मनी) से आता है और रेनो निसान, ऑडी, फोक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू और डेमलर जैसी यूरोपीय वाहन निर्माताओं के वैश्विक परिचालन का इसमें लगभग 50 प्रतिशत योगदान है। वैरॉक इंजीनियरिंग का लगभग 46 प्रतिशत राजस्व यूरोपीय बाजार से आता है और फिएट क्राइसलर, प्यूजो, जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) और फॉक्सवेगन उसके प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं।

अपोलो टायर्स के लिए कमजोर धारणा खासकर हंगरी के प्रधानमंत्री द्वारा कोरोनावायरस की महामारी से अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की चेतावनी दिए जाने के बाद देखी गई है। हंगरी में अपोलो का नया संयंत्र मजबूती से परिचालन कर रहा था और विश्लेषकों को कंपनी के यरोपीय परिचालन के लिए भविष्य में एक अंक की वृद्घि का योगदान होने का अनुमान था। लेकिन कंपनी के लिए हालात में सुधार के बजाय वृद्घि की रफ्तार नीचे आ सकती है। अन्य टायर निर्माता बालकृष्ण टायर्स भी प्रभावित होगी, क्योंकि उसका लगभग 50 प्रतिशत टायर निर्यात यूरोपीय बाजार से जुड़ा हुआ है। महिंद्रा सीआईई (जिसमें स्पेन की सीआईई ऑटोमोटिव की 56 प्रतिशत हिस्सेदारी है) अपना आधे से ज्यादा  राजस्व यूरोपीय बाजार से हासिल करती है और अब इस पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि उत्पादन में कमी आई है।

टाटा मोटर्स के लिए, यह प्रभाव कई गुना होगा, क्योंकि जेएलआर के राजस्व में यूरोप का लगभग 40 प्रतिशत योगदान है। चीन में फरवरी में कार की खुदरा बिक्री 85 प्रतिशत घटने, आपूर्ति शृंखला पर दबाव, और अन्य बाजारों में मांग में कमी को देखते हुए कंपनी ने अपने वित्त वर्ष 2020 के एबिटा में एक प्रतिशत तक की कमी की है। अपनी बैलेंस शीट पर कर्ज और जेएलआर में निवेश को देखते हुए मांग पर दबाव की स्थिति में नकदी प्रवाह बनाए रखना मुश्किल होगा। टाटा मोटर्स के अलावा, यूरोप में संयंत्र चलाने वाली कई वाहन कलपुर्जा निर्माता कंपनियां कर्ज से जुड़ी हुई हैं। एक विश्लेषक का कहना है कि ये संयंत्र नियोजित पूंजी पर एक अंक का प्रतिफल कमाते हैं। नए अनुबंधों के बगैर और मौजूदा ऑर्डरों का दायरा बढ़ाए बिना ऊंची लागत से नए संयंत्र गैर-उपयोगी साबित हो सकते हैं।

उनका कहना है कि परिचालन से जुड़ी चिंताओं के अलावा, इन कंपनियों के लिए मूल्यांकन दीर्घावधि औसत की तुलना में ज्यादा रहा है। यह बाजार के कम्फर्ट जोन से ऊपर था और इस वजह से रेटिंग में गिरावट की आशंका बनी हुई थी। मांग पर दबाव को देखते हुए ब्रोकरों का मानना है कि खासकर बड़े वैश्विक जोखिम वाली कंपनियों के लिए निवेशक ग्रामीण बिक्री में तेजी, लाभांश और मजबूत पूंजी आवंटन को देखते हुए हीरो मोटोकॉर्प जैसी भारत-केंद्रित कंपनियों पर ध्यान दे सकते हैं। 
Keyword: BSE, Bombay Stock Exchange Ltd., NSE, National Stock Exchange of India Ltd., Share Market, Sensex, Closing Values, Opening, Automobile, apollo tyres, European Market, Auto Index, मदरसन सूमी, टाटा मोटर्स, वेरॉ,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वैश्विक सूचकांक में भारांश बढऩे से देश में आएगा निवेश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.