बिजनेस स्टैंडर्ड - आय टूटने से कर्जदार फर्मों को मुश्किल
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आय टूटने से कर्जदार फर्मों को मुश्किल

कृष्ण कांत / मुंबई March 15, 2020

अगले कुछ महीने भारतीय उद्योग जगत के लिए वित्तीय लचीलापन का परीक्षा साबित हो सकता है। जिंस एवं ऊर्जा कीमतों में आई हालिया गिरावट और कोरोनावायरस के फैलने से आर्थिक उथल-पुथल के कारण वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग में नरमी के मद्देनजर भारतीय उद्योग जगत अपने राजस्व और आय अनुमानों में भारी कटौती कर रहा है। विश्लेषकों को धातु एवं खनन क्षेत्र और तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियों के लिए तात्कालिक प्रभाव दिख रहा है लेकिन वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से भी गैर-बैंकिंग फाइनैंस, बुनियादी ढांचा आदि क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'धातु एवं ऊर्जा कीमतों में आई हालिया गिरावट के कारण अगली कुछ तिमाहियों के दौरान इन क्षेत्रों की अधिकतर कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे को झटका लगेगा। कई कंपनियां घाटा भी दर्ज कर सकती हैं।'

लाभप्रदता में कोई भी भारी गिरावट अधिक ऋण बोझ तले दबी और कम ब्याज कवरेज अनुपात (आईसीआर) वाली कंपनियों के लिए वित्तीय तौर पर कष्टïदायक हो सकती है। आईसीआर किसी कंपनी की ऋण पुनर्भुगतान क्षमता का आकलन करने का पैमाना है। इसका आकलन किसी खास अवधि के दौरान कंपनी के परिचालन लाभ को उसकी ब्याज देनदारी से भाग देकर किया जाता है। अधिक अनुपात को बेहतर माना जाता है जबकि 1.5 से कम अनुपात का मतलब साफ है कि कंपनी मार्जिन पर है और मार्जिन अथवा मुनाफे में मामूली गिरावट से भी वह ब्याज भुगतान में चूक कर सकती है।

हालांकि अन्य विश्लेषकों का कहना है कि उन कंपनियों को सबसे अधिक झटका लगेगा जहां प्रवर्तकों की अधिक हिस्सेदारी गिरवी रखी हुई है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'सबसे अधिक परेशानी उन कंपनियों को होगी जो अधिक ऋण बोझ तले दबी हुई है और उसके प्रवर्तकों की अधिकांश हिस्सेदारी गिरवी है।'

इसे ध्यान में रखते हुए हमने सबसे अधिक ऋण बोझ तले दबी उन दस कंपनियों की सूची तैयार की है जिनका आईसीआर वित्त वर्ष 2020 के पहले नौ महीनों की अवधि में 3 गुना से कम रहा है। इस लिहाज से देश की अधिकतर धातु उत्पादक कंपनियों को आगामी तिमाहियों में वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

उदाहरण के लिए, टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2020 के पहले नौ महीनों के दौरान 2.2 गुना ब्याज कवरेज अनुपात दर्ज किया जो एक साल पहले 4 गुना था। इस दौरान कंपनी के परिचालन मुनाफे में 46 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि उसकी ब्याज देनदारी में सालाना आधार पर करीब 2 फीसदी की कमी आई। वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में समेकित आधार पर इस इस्पात कंपनी का कुल ऋण बोझ करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये था। जबकि उसका बाजार पूंजीकरण घटकर करीब 32,300 करोड़ रुपये रहा गया। ऐसे में कंपनी के लिए ताजा रकम जुटाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया।

इसी प्रकार, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) का ब्याज कवरेज अनुपात वित्त वर्ष 2020 के पहले नौ महीनों के दौरान घटकर 1.7 गुना रह गया जो एक साल पहले की समान अवधि में 3.2 गुना रहा था। इस दौरान कंपनी के परिचालन लाभ में 41.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि उसकी ब्याज देनदारी 9.6 फीसदी बढ़ गई। इस क्षेत्र में कम ब्याज कवरेज अनुपात वाली अन्य कंपनियों में जिंदल स्टील ऐंड पावर और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल हैं।
Keyword: SAIL, JSW Steel, Jindal Steel and Power, ICR, Debt, Jeans,
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