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येस बैंक के निवेशकों के लिए नई मुश्किल

हंसिनी कार्तिक / मुंबई March 15, 2020

यह सप्ताहांत अप्रत्याशित रहा, जिसमें येस बैंक के निवेशकों के लिए कई निराशाजनक बातें हुईं। बैंक की पुनर्गठन योजना में खुदरा व संस्थागत शेयरधारकों के लिए 75 फीसदी निवेश पर तीन साल की पाबंदी लगाई गई। इसमें सभी मौजूदा शेयरधारक शामिल हैं, जिनके पास बैंक के 100 से ज्यादा शेयर हैं। 

दूसरी मुश्किल ने अतिरिक्त टियर-1 बॉन्डधारकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिनका येस बैंक में 8,415 करोड़ रुपये निवेश है क्योंकि बैंक के प्रशासक ने संकेत दिया है कि इन प्रतिभूतियों को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाला जाएगा। यह भले ही पुनर्गठन योजना के मसौदे का हिस्सा रहा हो, लेकिन एटी-1 बॉन्डधारकों को भरोसा था कि उनके बॉन्ड को शेयर में परिवर्तित किया जाएगा, चाहे उन्हें 80 फीसदी कटौती क्यों न झेलनी पड़े। इस मामले को कानूनी चुनौती दी गई है, लेकिन अभी येस बैंक के एटी-1 बॉन्ड की कोई वैल्यू नहीं रह गई है। लेकिन सबसे बड़ा झटका दिसंबर तिमाही के नतीजे के तौर पर आया। 24,765 करोड़ रुपये के प्रावधान की पृष्ठभूमि में बैंक का शुद्ध नुकसान 18,564 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इसने निवेशकों को चौंकाया। दूसरी तिमाही से जमाएं 21 फीसदी सिकुड़कर 1,65,755 करोड़ रुपये रह गई है, साथ ही लोनबुक क्रमिक आधार पर 17 फीसदी घटकर 1,86,099 करोड़ रुपये रही, जो उम्मीद के मुताबिक थी।

तीसरी तिमाही में सीईटी-1 घटकर 0.6 फीसदी रह गई, जो वैधानिक स्तर 7.375 फीसदी से काफी कम है, वहीं तीसरी तिमाही में बैंक पर 86 करोड़ रुपये का जुर्माना न्यूनतम सांविधिक तरलता अनुपात व तरलता कवरेज अनुपात को तोडऩे पर लगाया गया। बैंक के अंकेक्षकों ने तीसरी तिमाही की रिपोर्ट में कहा है, ये चीजें बताती है कि अनिश्चितता बनी हुई है, जो बैंक के चालू बने रहने पर संदेह जताता है। ये आंकड़े हालांकि अन्य छोटे बैंक लक्ष्मी विलास बैंक से भी खराब हैं। भारतीय स्टेट बैंक और अन्य निजी बैंकों ने इस बैंक में 10,000 करोड़ रुपये लगाने पर सहमति जताई है, पर सीईटी-1 और नकद आरक्षी अनुपात क्रमश: 7.6 फीसदी और 13.6 फीसदी पर लाना असंभव जैसा होगा। 

हालांकि 29,594 करोड़ रुपये का प्रावधान यानी 40,709 करोड़ रुपये का एनपीए कोई छोटा आंकड़ा नहीं है, जिसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि यह बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता की पूरी स्थिति नहीं बताती। यूबीएस, जेपी मॉर्गन और मैक्वेरी जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने 60,000 करोड़ रुपये का दबाव वाला कर्ज माना है, वहीं येस बैंक ने विगत में खुद 30,000 करोड़ रुपये के कर्ज को दबाव वाले कर्ज के तौर पर वर्गीकृत कर चुका है।

उस लिहाज से तीसरी तिमाही में 40,709 करोड़ रुपये का एनपीए छोटा आंकड़ा नजर आ रहा है। एक विदेशी ब्रोकरेज के विश्लेषक ने कहा, शायद पूंजी के अवरोध से पूरी परेशानी की पहचान नहीं हो पाई। प्रावधान कवरेज अनुपात दूसरी तिमाही के 43.1 फीसदी से सुधरकर तीसरी तिमाही में 72.7 फीसदी पर पहुंच गया, लेकिन विस्लेषकों को और बेहतर आंकड़े की उम्मीद थी। उन्होंने कहा, इस लिहाज से निवेशकों को पूंजी निवेश, एनपीए में बढ़ोतरी और संभावित नुकसान के एक और दौर से लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने कहा, बैंक को आगे बढऩे के लिए और पूंजी की दरकार होगी।

अंकेक्षकों ने यह भी कहा है कि बैंक के चालू हालत में बने रहने की संभावना अंतिम पुनर्गठन योजना की सफलता, बैंक में लगाई जाने वाली पूंजी और आरबीआई की तरफ से रोक हटाए जाने के बाद अपने जमाओं के संतुलन को स्थिर रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा। नई पूंजी का निवेश निवेशकों के लिए हालांकि अभी सकारात्मक है, लेकिन येस बैंक की तीसरी तिमाही के नतीजे ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

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