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बाजार नियामक सेबी से संपर्क करेंगे म्युचुअल फंड

जश कृपलानी / मुंबई March 15, 2020

येस बैंक के शेयरधारकों का 75 फीसदी निवेश तीन साल तक फंसे रहने के मामले ने म्युचुअल फंडों को परेशानी में डाल दिया है और एक्सचेंजों के साथ म्युचुअल फंड बाजार नियामक सेबी संपर्क करेगा कि सरकार की अधिसूचना के असर को इंडेक्स फंडों और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों पर कम किया जा सकता है। क्योंकि इन फंडों को येस बैंक से निकलना होगा जब उसे 27 मार्च को इन सूचकांकों से बाहर निकाल दिया जाएगा।

रूपीवेस्ट के आंकड़ों के मुताबिक, येस बैंक में म्युचुअल फंडों की इक्विटी योजनाओं का निवेश 29 फरवरी तक 492 करोड़ रुपये था और इस निवेश का 62 फीसदी विभिन्न इंडेक्स व ईटीएफ में है। 29 फरवरी को 50 इंडेक्स और ईटीएफ का येस बैंक में निवेश था। एक फंड हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, येस बैंक में जिन योजनाओं के जरिए निवेश किया गया है उनमें से कुछ का आकार बड़ा है और उनकी परिसंपत्तियां 40,000 से 60,000 करोड़ रुपये के बीच है। उनके लिए यह मसला काफी बड़ा हो सकता है। हम इस मामले को सेबी के सामने उठाएंगे।

उद्योग के एक अधिकारी (जो ईटीएफ व इंडेक्स फंड पर उद्योग निकाय की समिति का हिस्सा हैं) ने कहा, हम एक्सचेंजों और उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया से बातचीत कर रहे हैं। इस मसले पर दोनों सेबी से स्पष्टीकरण मांगेंगे। 

27 मार्च से येस बैंक को निफ्टी और बैंक निफ्टी सूचकांकों से बाहर कर दिया जाएगा। शुक्रवार को सरकार ने येस बैंक की योजना को अधिसूचित कर दिया। इस अधिसूचना की धारा 8 में कहा गया है कि योजना के लागू होने से तीन साल की अवधि तक 75 फीसदी निवेश लॉक रहेगा। उद्योग के प्रतिभागी चिंतित हैं क्योंकि इसका मतलब यह हुआ कि मौजूदा व नए निवेशक कम से कम तीन साल तक 25 फीसदी से ज्यादा नहीं बेच पाएंगे।

निवेश के लॉक इन से निवेशकों के भरोसे पर भी चोट पहुंच सकती है, जिन्होंने गुरुवार या शुक्रवार को बैंक के शेयर खरीदे। स्टॉक लेंडिंग ऐंड बॉरोइंग के तहत शेयर उधार देने वाले संस्थागत निवेशकों को भी शायद सारे शेयर वापस नहीं मिल पाएंगे। किसी इंडेक्स या ईटीएफ की 95 फीसदी परिसंपत्तियां अंतर्निहित इंडेक्स के मुताबिक होनी जरूरी है। एक फंड मैनेजर ने कहा, हालांकि मोटे तौर पर इंडेक्स व ईटीएफ बाकी 5 फीसदी हिस्सा नकदी रखती हैं ताकि रीडम्पशन के दबाव से निपटा जा सके। साथ ही तीन साल तक येस बैंक के शेयरों में निवेशित रहने से भी काफी मुश्किल होगी।

येस बैंक को निफ्टी व बैंक निफ्टी से हटाया जाएगा और इन सूचकांकों में नए शेयर जोड़े जाएंगे। फंड मैनेजर ने कहा, बैंक निफ्टी से जुड़े फंडों को बंधन बैंक को शामिल करने में काफी मुश्किल हो सकती है, जो येस बैंक की जगह लेगा और इसके साथ उसे येस बैंक के शेयरों में भी आंशिक निवेश बनाए रखना होगा। इसी तरह श्री सीमेंट अब निफ्टी में येस बैंक की जगह लेगा। उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, म्युचुअल फंड व एक्सचेंज सेबी के सामने प्रस्ताव रख सकते हैं कि इंडेक्स को पुनर्संतुलित करने की तारीख 27 मार्च से आगे बढ़ा दी जाए ताकि सरकार इस मसले पर स्पष्टीकरण दे सके।

उद्योग केप्रतिभागियों ने कहा, येस बैंक के शेयरों को अलग पोर्टफोलियो में बनाए रखना और योजनाओं के यूनिटधारकों को अलग यूनिट का आवंटन इसका समाधान हो सकता है। एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, हालांकि सेबी ऐसी कवायद पर छूट देनी होगी क्योंकि मौजूदा नियामकीय ढांचे के तहत साइड पॉकेट का सृजन डेट योजना में हो सकता है जब रेटिंग घटाकर निवेश श्रेणी से नीचे किया गया हो। 

2,100 करोड़ रुपये से ज्यादा खुदरा रकम फंसेगी 

एमएफ के अलावा अन्य मौजूदा शेयरधारकों की अच्छी खासी हिस्सेदारी येस बैंक में फंसने के आसार हैं, अगर मौजूदा सरकारी अधिसूचना में संशोधन नहीं किया जाता या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया जाता। खुदरा निवेशकों के पास येस बैंक के 2,839 करोड़ रुपये के शेयर हैं, जिसकी गणना मौजूदा शेयर कीमत और 31 दिसंबर 2019 की शेयरधारिता के आधार पर की गई है।

खुदरा निवेशक पर इसके असर का आकलन करना हालांकि मुस्किल है क्योंंकि प्रावधान सिर्फ उन्हीं निवेशकों पर लागू होगा जिनके पास 100 से ज्यादा शेयर हैं। 75 फीसदी खुदरा निवेश के फंस जाने का मतलब 2,129 करोड़ रुपये के शेयर लॉक हो जोंगे। 31 दिसंबर 2019 को 16 लाख से ज्यादा आम शेयरधारकों का बैंक में निवेश था। उधर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का इस बैंक में 986 करोड़ रुपये निवेशित है। एचएनआई के पास येस बैंक के 280 करोड़ रुपये के शेयर हैं। इस निवेश का 75 फीसदी लॉक होने का मतलब यह है कि एचएनआई के 209 करोड़ रुपये फंस जाएंगे। इसी तरह एफपीआई के 739 करोड़ रुपये लॉक हो जाएंगे। 

300 करोड़ रुपये निवेश करेगा फेडरल बैंक

केरल का फेडरल बैंक लिमिटेड आरबीआई की पुनर्गठन योजना के तहत येस बैंक ेमं 300 करोड़ रुपये निवेश करेगा। बैंक ने येस बैंक का इक्विटी शेयर लेने के लिए प्रतिबद्धता पत्र जारी किया है। फेडरल बैंक ने कहा कि 10 रुपये प्रति शेयर पर येस बैंक के 30 करोड़ शेयर खरीदने के लिए उसने प्रतिबद्धता पत्र जारी किया है।
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