बिजनेस स्टैंडर्ड - हवाईअड्डा: भरपाई की मांग
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हवाईअड्डा: भरपाई की मांग

अरिंदम मजूमदार /  March 13, 2020

देश में हवाईअड्डे से जुड़े निजी परिचालकों ने विमानन कंपनियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के लिए सरकार से इजाजत मांगते हुए कहा है कि यात्रियों और विमाननों की आवाजाही में कमी से घाटा हो रहा है। नागरिक विमानन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला से निजी परिचालकों के एक संगठन ने कहा, 'विमानों और यात्रियों की कमी की वजह से हवाईअड्डे की कमाई पर काफी असर पड़ा है। इस गंभीर समस्या और हवाईअड्डा परिचालकों पर बन रहे दबाव की स्थिति को देखते हुए मामूली सुविधा शुल्क लगाने की मांग की जा रही है जो विमान किराये का ही हिस्सा होगा ताकि बढ़े हुए परिचालन लागत को कवर किया जा सके।' निजी हवाईअड्डा परिचालक आमतौर पर विमानन कंपनियों पर उपयोगकर्ता विकास फीस, यात्री सेवा फीस और विकास फीस के नाम पर शुल्क वसूलते हैं। 

 
बुधवार को सरकार ने घोषणा की थी कि 15 अप्रैल तक के लिए सभी मौजूदा वीजा को रद्द किया जा रहा है ताकि कोरोनावायरस पर नियंत्रण किया जा सके जो तेजी से दुनिया भर में फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे एक वैश्विक महामारी के तौर पर वर्गीकृत किया है। इस कदम की वजह से बड़ी तादाद में लोगों को पर्यटन की योजना रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि विमानन कंपनियों ने भी विमान सेवाओं में कटौती कर दी। फरवरी से ही भारत में संचालन करने वाली विदेशी विमान कंपनियों ने मार्च के अंत तक करीब 492 उड़ानों को रद्द कर दिया। भारतीय विमानन कंपनियों ने 96 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कैंसिल कर दी। बुधवार के आदेश के बाद इसमें बढ़ोतरी के पूरे आसार हैं। 
 
एक हवाईअड्डे के प्रवक्ता ने कहा, 'फरवरी में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी सामान्य स्तर के मुकाबले 20 फीसदी की कमी जबकि मार्च में लगभग 50 फीसदी की कमी देखी जा रही है। सामान्यतौर पर हवाईअड्डे पर रोजाना 14,000 से 15,000 तक अंतरराष्ट्रीय यात्री आते हैं लेकिन अब इनकी तादाद घटकर रोजाना 6,000 से 7,000 हो गई है।' निजी हवाईअड्डे के अधिकारियों का कहना है कि सरकार के साथ राजस्व साझेदारी व्यवस्था की वजह से उन पर काफी दबाव की स्थिति है। निजीकरण के दौरान सरकार के साथ हुए समझौते के मुताबिक देश के दो बड़े हवाईअड्डे जीएमआर समूह का दिल्ली हवाईअड्डा और जीवीके समूह का मुंबई हवाईअड्डा अपनी सालाना कमाई के 46 और 38.7 फीसदी हिस्से का भुगतान सरकार के स्वामित्व वाले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को करता है। निजी हवाईअड्डा परिचालकों के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार के पास जमा की गई लक्षित कारोबारी योजना के हिसाब से एक तिमाही का अग्रिम भुगतान करना होता है। उनका कहना है, 'हमने लक्षित योजना के हिसाब से वित्त वर्ष 2021 के लिए हमने सरकार को साल की शुरुआत में ही भुगतान कर दिया है। लेकिन अचानक हालात में बदलाव दिखने लगा।'
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