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रुपया बचाने पर रहेगा भारतीय रिजर्व बैंक का जोर

अनूप रॉय / मुंबई March 13, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को स्थानीय मुद्रा बाजार में बड़ा हस्तक्षेप किया और ऑफशोर बाजार में भी इसी तरह के प्रयास किए जाने की संभावना है। ऑफशोर बाजार में कुछ ही मिनटों में एक महीने का फॉर्वर्ड पॉइंट 50 पैसे से गिरकर 32 पैसे पर आ गया। ऑफशोर फॉर्वर्ड पॉइंट में गिरावट को ऑनशोर बाजारों में रुपये में आई तेजी से मदद मिली। रुपया प्रति डॉलर के मुकाबले 74.50 के स्तर से 73.76 पर पहुंचने में सफल रहा।  आरबीआई के एक अधिकारी ने हालांकि इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उन्होंने मुद्रा डीलर इसे लेकर आश्वस्त हैं कि भारतीय केंद्रीय बैंक रुपये को बचाने के लिए अपने सहज स्तर को पार कर वैश्विक परिचालन के लिए सभी सीमाओं को दूर किया है। यदि ऑफशोर के संदर्भ में हस्तक्षेप की कोशिश होती है तो यह संभवत: पहली बार होगा। 
 
एक वरिष्ठï मुद्रा डीलर ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, 'केंद्रीय बैंक अतीत में भी छोटे छोटे उपायों के तौर पर बाजार में हस्तक्षेप करता रहा है, लेकिन शुक्रवार का कदम काफी बड़ा था।' मुद्रा डीलर ने कहा, 'ऐसा लगता है कि वैश्विक रूप से समन्वित कदम उठाया गया है। सब कुछ पर एक साथ सकारात्मक असर दिखा। शेयर बढ़े, कच्चा तेल और धातुओं में तेजी आई, मुद्राओं में मजबूती आई, रुपये ने वास्तव में अच्छी वापसी की और ऑफशोर फॉर्वर्ड पॉइंट में कमी आई। यह संकेत दिख रहा है कि आरबीआई ऑफशोर बाजारों में हस्तक्षेप कर सकता है।' आईएफए ग्लोबल में प्रबंध निदेशक अभिषेक गोयनका ने कहा कि आरबीआई ने उस समय में भी भारी मात्रा में डॉलर बेचे जब भारी जोखिम मौजूद था। इसलिए जैसे ही धारणा पर जोखिम फिर से दिखा, रुपये को लाभ मिला।
 
गोयनका के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये को सुरक्षित बनाने में सफल रही है, अन्यथा यह मुद्रा कम से कम 77 पर पहुंच सकती था। आरबीआई ने अपने घरेलू हस्तक्षेप के बारे में प्रत्यक्ष रूप से कोई आंकड़ा पेश नहीं किया है, लेकिन डॉलर खरीद और बिक्री पर आंकड़ा दो महीने के अंतराल के बाद आया है। हालांकि मुद्रा डीलरों को यह संकेत मिल गया कि केंद्रीय बैंक के किसी हस्तक्षेप से राष्टï्रीयकृत बैंकों द्वारा डॉलर की लगातार खरीदारी या बिकवाली के जरिये विनिमय दर में किस तरह से बदलाव आएगा। इन बैंकों ने आरबीआई और बाजारों के बीच मध्यस्थ के तौर पर काम किया है। 
 
हालांकि यदि आरबीआई ऑफशोर बाजारों (दुबई, सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग और न्यूयार्क में स्थित) में हस्तक्षेप करता है तो उसे यह कार्य वहां स्थानीय बैंकों के जरिये करना होगा। या फिर, वह उन अन्य केंद्रीय बैंकों की मदद ले सकता है जो प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, मलेशियाई केंद्रीय बैंक और दक्षिण कोरियाई केंद्रीय बैंक को इन बाजारों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करने की क्षमताओं के लिए जाना जाता है।  यह वाकई केंद्रीय बैंकों द्वारा वैश्विक तौर पर समन्वित प्रयासों का दिन था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के एक अनुसार एशियाई केंद्रीय बैंकों ने वित्तीय व्यवस्था में पूंजी लगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े खतरे से मुकाबले के लिए आपात कदमों पर चर्चा की।
Keyword: Corona virus, china, india, RBI, money,,
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