बिजनेस स्टैंडर्ड - रकम जुटाने की योजना पर होगा असर
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रकम जुटाने की योजना पर होगा असर

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई March 13, 2020

भारतीय इक्विटी में हुई मौजूदा गिरावट ने रकम जुटाने की कंपनियों की योजना को प्रभावित किया है क्योंकि मूल्यांकन प्रतिकूल हो गया है और निवेशक नई कंपनी में निवेश को लेकर आशंकित हैं। स्पेशियलिटी केमिकल कंपनी रोसारी बायोटेक और रेस्तरां शृंखला बर्गर किंग का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम इस महीने में बाजार में पेश होना था, जिसे टाल दिया गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इन कंपनियों ने क्रमश: 500 करोड़ रुपये व 1,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। एंटनी वेस्ट हैंडलिंग सेल अपनी शेयर बिक्री के लिए जरूरी आवेदन पाने के लिए संघर्ष कर रही है जबकि कंपनी ने कीमत में कटौती की है और आवेदन की अंतिम तारीख में एक हफ्ते का इजाफा किया है।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार में 20 फीसदी की गिरावट ने उन कंपनियों के सामने चुनौती पैदा की है, जो अपना आईपीओ पेश करने जा रही थी क्योंकि अब मूल्यांकन की गणना दोबारा करनी होगी। इससे ज्यादा हिस्सेदारी का विनिवेश हो सकता है या फिर इश्यू का आकार छोटा करना पड़ सकता है। बाजार में हुए उतारचढ़ाव का साया भारतीय स्टेट बैंक की इकाई एसबीआई काड्र्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज की सूचीबद्धता पर भी होगा। इससे अति धनाढ्य निवेशकों के दांव पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि उन्होंंने 13-15 फीसदी पर उधार लेकर इसमें आवेदन किया था। अब उन्हें मिलने वाला फायदा पहले के अनुमान के मुताबिक शायद नहीं रहेगा। ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर की ट्रेडिंग 755 रुपये के भाव के मुकाबले 25 फीसदी छूट पर हो रहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। एक समय ग्रे मार्केट ऑपरेटर इश्यू प्राइस के मुकाबले 50 फीसदी प्रीमियम पर उसे खरीद रहे थे। एसबीआई कार्ड के आईपीओ को 26.54 गुना आवेदन मिला और एचएनआई श्रेणी में 45 गुना से ज्यादा बोली मिली। 
 
विशेषज्ञों ने कहा, 24,000 करोड़ रुपये के आईपीओ पर वैध नियामकीय मंजूरी अभी भी है और अन्य आठ कंपनियां मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन कंपनियों की समयसारणी में बदलाव हो सकता है क्योंंकि प्राथमिक बाजार अगले कुछ महीने तक सुस्त बना रह सकता है जब तक कि द्वितीयक बाजार स्थिर न हो जाए। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, कोई भी कंपनी तब तक आईपीओ के बारे में विचार नहीं करेगी जब तक कि द्वितीयक बाजार में स्थिरता न आ जाए। बाजार में 10 से 15 फीसदी का बदलाव काफी अनिश्चितता और निवेशकों के बीच डर के बारे में बताता है।
 
मूल्यांकन पर काफी चोट पड़ी है क्योंकि बाजार में काफी गिरावट आई है और सूचीबद्ध होने पर विचार कर रही कंपनियों को संभावित मूल्यांकन में भारी कटौती झेलनी होगी। एक निवेश बैंकर ने कहा, निवेशक मोटे तौर पर वैसे आईपीओ में रकम लगाते हैं, जिसमें नई बात हो, बढ़त की संभावना हो और सूचीबद्ध कंपनियों के मुकाबले मूल्यांकन बेहतर हो। जब सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर सस्ते दाम पर उपलब्ध होंगे तो कोई भी नए शेयर में क्यों निवेश करना चाहेगा। अहम कंपनियां मसलन रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस में 27 फरवरी से अब तक 9 से 20 फीसदी की गिरावट आई है। पीएल कैपिटल मार्केट्स के उपाध्यक्ष (निवेश बैंकिंग) दारा कल्याणीवाला ने कहा, बाजार से रकम जुटाने की इच्छा रखने वाली कंपनियां एसबीआई काड्र्स की सूचीबद्धता से संकेत हासिल कर सकती हैं। इसकी बेहतर सूचीबद्धता न होने से अवधारणा पर और चोट पहुंच सकती है।
 
इसके अलावा पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) पर भी असर पड़ सकता है। हल्दिया ने कहा, आर्थिक मंदी के कारण अभी काफी ज्यादा नई पूंजी नहीं जुटाई जा रही है। अगर नई पूंजी के लिए निवेशकों के बीच स्वाभाविक इच्छा हो तब भी कोई भी कंपनी कम मूल्यांकन पर रकम नहींं जुटाना चाहेगी। विशेषज्ञों ने कहा, अगर कीमतें दबाव में रहीं तो पुनर्खरीद और गैर-सूचीबद्धता की वापसी हो सकती है। सन फार्मा ने गुरुवार को कहा कि वह अगले हफ्ते कंपनी के शेयरों की पुनर्खरीद पर विचार करेगी। टाटा संस ने गुरुवार को समूह की चार कंपनियों के 531 करोड़ रुपये के शेयर एनएसई पर ब्लॉक डील के जरिए खरीदे।
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