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गिरावट के बीच नकदी रखने पर रहेगा जोर

हंसिनी कार्तिक / मुंबई March 12, 2020

बाजार में भीषण गिरावट के बाद एक बात साफ  हो गई है कि भारतीय शेयर बाजार मंदडिय़ों की गिरफ्त में आ गया है। गुरुवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई और यह जनवरी के 42,273 अंक के स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। गिरावट की मार इतनी जबरदस्त रही कि सेंसेक्स ने पिछले दो वर्षों के दौरान अर्जित बढ़त भी गंवा दी।  बाजार में मचे घमासान पर ऐक्सिस म्युचुअल फंड में इक्विटी प्रमुख जिग्नेश गोपानी ने कहा, 'मौजूदा हालात को देखते हुए निवेशक अपने पास अधिक मात्रा में नकदी रखना चाहेंगे, जिससे निकट अवधि में बाजार में अनिश्चितता बरकरार रहेगी।' वैसे घरेलू फंड प्रबंधक आने वाले दिनों में नकदी आवंटन औसतन 5 से 6 प्रतिशत बढ़ाने पर निर्णय ले सकते हैं, लेकिन वे निकट अवधि में यह स्तर 8 से 10 प्रतिशत पहुंचने से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। गोपानी का मानना है कि अगर शेयरों में गिरावट नहीं थमी तो आने वाले महीनों में निवेश भुनाने की प्रक्रिया भी जोर पकड़ सकती है।
 
फिलहाल कुछ कहना है मुश्किल
 
मांग-आपूर्ति संतुलन बिगडऩे और वैश्विक फंड प्रबंधकों द्वारा बड़े पैमाने पर लिवाली करने से भारतीय शेयरों से अकेले मार्च में ही 24,000 करोड़ रुपये निवेश की निकासी हो चुकी है। कोरोनावायरस का संक्रमण लगभग पूरी दुनिया में फैलने से वैश्विक व्यापार थम सा गया है। इस वजह से दुनिया के बाजारों में निराशा का भाव छा गया है जिसके बाद वैश्विक फंड प्रबंधक तेजी से उभरते बाजारों सहित जोखिम वाली परिसंपत्तियों से निवेश निकाल रहे हैं। गोपानी का कहना है कि फिलहाल तो विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा,'भारतीय बाजारों में विदेश से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) के जरिये रकम आ रही थी। इन निवेशकों को जब निवेश निकालना होता है तो वे तकनीकी बुनियाद नहीं देखते हैं। तब उनका ध्यान केवल बिकवाली पर होता है।'
 
वैश्विक स्तर पर व्यापार सहित अन्य मोर्चों पर हालात इतने खराब हैं कि इन निवेशकों को निवेश बनाए रखने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा है। एक दूसरे फंड प्रबंधक ने कहा,'अमेरिका और ब्रिटेन में भी कोरोनावायरस पहुंच चुका है, इसलिए व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होंगी।' इससे भारतीय कंपनियों की आय पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि आय के आंकड़ों को किस हद तक झटका लगेगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।  स्विटरलैंड की यूबीएस ने हाल में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी की थी। मौजूदा हालात पर यूबीएस में अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा,'हमें लगता है कि दिसंबर 2019 की सालाना 4.7 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले भारत का समायोजित जीडीपी सालाना आधार पर कम होकर मार्च एवं जून 2020 तिमाही में 4.0-4.5 प्रतिशत पर आ सकता है।'
 
विदेशी निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली और वृद्धि दर में कमी के अनुमानों का असर यह होगा कि भारतीय निवेशक निवेश करने के बजाय नकदी के साथ निष्क्रिय रह सकते हैं। गोपानी ने कहा,'हम निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने बचने की सलाह दे रहे हैं। अगर उन्हें लगता है कि बाजार में शेयर काफी सस्ते हो गए हैं तो भी उन्हें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए।'
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