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कोरोनावायरस का प्रभाव

संपादकीय /  March 12, 2020

सरकार ने कोरोनावायरस के प्रसार को लेकर सहज और समझदारी भरी प्रतिक्रिया दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित कर दिया है। ऐसे में लग रहा है कि भारत इस बीमारी के अत्यधिक हानिकारक प्रभाव से बच जाएगा। सरकार ने दुनिया भर के देशों के पर्यटक वीजा पर रोक लगा दी है और प्रवासी भारतीयों के वीजा मुक्त प्रवेश पर भी 15 अप्रैल तक रोक लगा दी है। उसने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे एपिडेमिक डिजीज ऐक्ट के प्रावधान लागू करें। सन 1897 में बना यह कानून राज्यों को बीमारी का प्रसार रोकने के लिए मौजूदा कानून निलंबित करने और अस्थायी उपाय अपनाने की अनुमति देता है। अधिनियम केंद्र को यह इजाजत भी देता है कि वह बंदरगाह पर किसी पोत की जांच कर सके। चूंकि यह कानून 122 वर्ष पुराना हो चुका है ऐसे में बेहतर होगा कि इसमें शीघ्र संशोधन कर ये जांच अधिकार विमानों पर भी लागू किए जाएं। हवाई अड्डों पर हो रही स्वास्थ्य जांच और टेलीविजन और मोबाइल के माध्यम से जनहित में नियमित संदेश प्रसारण भी यह दिखाते हैं कि सरकार इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए अति सक्रिय है। इंडियन प्रीमियर लीग को लेकर जारी अनिश्चितता भी शीघ्र समाप्त होनी चाहिए। विकल्प एकदम स्पष्ट हैं या तो इसे बंद और सुरक्षित स्थान पर अंजाम दिया जाए या फिर रद्द किया जाए। 

 
बहरहाल बड़ी चुनौती जानी अनजानी बातों में छिपी हुई है। इनमें प्रमुख है इस बीमारी का दायरा और इसके बारे में जानकारी। डेढ़ महीने पहले तीन जाहिर मामलों के बाद तीन दिन पहले यह आंकड़ा 68 और गुरुवार को 73 तक पहुंच गया। यह तादाद बढ़ाने में इटली के पर्यटकों की अहम भूमिका रही। परंतु सूचना का प्रसारण अस्पष्ट बना हुआ है। लेह में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद यह पुष्टि होनी बाकी है कि उसकी मौत कोरोनावायरस से हुई या किसी अन्य बीमारी से। इसके अलावा देश की मौजूदा स्थिति की बात करें तो सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है और शहरी बस्तियों और झुग्गियों आदि में इसे लेकर जागरूकता का सख्त अभाव है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं कि बीमारी को किस हद तक थामा जा सकता है। बचाव के दो प्रमुख उपाय यानी नियमित अंतराल पर हाथ धोना और सामाजिक रूप से दूरी बनाकर रहना भी अस्पष्ट हैं और इनका प्रवर्तन करना कठिन है। खासकर कम शिक्षित और गरीब तबकों में। 
 
उदाहरण के लिए हवाई यात्राओं में कमी आ सकती है और प्रभावशाली शहरी भारतीय घर से काम कर सकते हैं लेकिन लाखों दैनिक श्रमिकों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक यातायात से गुजरकर ही इस आर्थिक मंदी के बीच अपनी आजीविका जुटानी है। चूंकि कोरोनावायरस के लक्षण फ्लू जैसे हैं इसलिए यह निश्चित नहीं कि इसके पीडि़तों में कितने लोग वास्तव में पहचाने जाएंगे। एक सवाल यह भी है कि क्या देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली इस चुनौती के लिए तैयार है। गौरतलब है कि देश में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। देश भर में बने 52 परीक्षण केंद्र भी अपर्याप्त नजर आते हैं। पर्यटकों की भारी आवक वाले उत्तर प्रदेश में केवल तीन परीक्षण केंद्र बने हैं।
 
इसकी आर्थिक कीमत भी चुकानी होगी। वैश्विक व्यापार में मंदी और रोजगार की मांग वाले क्षेत्रों में मांग घटने से देश की पहले से कमजोर वृद्घि और कमजोर होगी। तेल कीमतों में गिरावट से कुछ राहत अवश्य मिल सकती है। कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भरता भी गतिरोध उत्पन्न करेगी। शेयर बाजार में मची भगदड़ इसकी बानगी है। ऐसे में सरकार के पास अवसर है कि वह कड़े आर्थिक सुधार अपनाकर देश को वृद्घि पथ पर वापस लाए। 
Keyword: Corona virus, china, india, WHO, visa,,
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