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मध्य प्रदेश: गहराता सियासी संकट

संदीप कुमार /  March 11, 2020

मध्य प्रदेश में राजनीतिक संकट लगातार गहरा होता जा रहा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) में शामिल हो गए। उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही देर बाद भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्य सभा का उम्मीदवार बना दिया। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव 26 मार्च को होने हैं जबकि प्रदेश विधानसभा का सत्र 16 मार्च को बुलाया गया है। 

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कमी फिर उजागर

भाजपा में शामिल होने के बाद अपने पहले संबोधन में सिंधिया ने प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा का धन्यवाद करते हुए कहा कि जनता की सेवा नहीं कर पाने के कारण वह कांग्रेस में आहत थे।सिंधिया ने कहा, 'जब मध्य प्रदेश में सरकार बनी तब हमने एक सपना देखा था। लेकिन 18 महीने में वो सारे सपने बिखर गए। चाहे वो किसानों के ऋण माफ करने की बात हो, पिछले फसल का बोनस न मिलना हो। ओलावृष्टि से नष्ट फसल आदि का भी मुआवजा अब तक नहीं मिल पाया है।'

सिंधिया की दोनों बुआओं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे ने उनके इस निर्णय का स्वागत किया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सिंधिया को कद्दावर नेता बनाते हुए उनका स्वागत किया। 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंधिया को मिलने का समय नहीं देने संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सिंधिया इकलौते शख्स हैं जो उनके घर कभी भी आ सकते थे। राहुल ने बुधवार को ट्विटर पर अपना एक पुराना ट्वीट फिर से साझा किया जो उन्होंने दिसंबर 2018 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ के चयन के समय किया था।राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी राज्य की निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने में व्यस्त हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने विधानसभा में कमलनाथ सरकार के बहुमत साबित करने का विश्वास जताते हुए दावा किया कि 22 बागी विधायकों में 13 ने कांग्रेस नहीं छोडऩे का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, 'यह गलती हमसे हुई कि हम यह नहीं समझ पाए कि वह कांग्रेस छोड़ देंगे। कांग्रेस ने उन्हें क्या नहीं दिया। चार बार सांसद बनाया, दो बार केंद्रीय मंत्री बनाया और कार्यसमिति का सदस्य बनाया।' कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए जयपुर स्थानांतरित कर दिया है। उधर बेंगलुरू गए 22 बागी विधायकों में से 17 ने वीडियो संदेश जारी करके सिंधिया में अपनी आस्था दोहराई है। पूर्व मंत्री इमरती देवी ने तो यह तक कहा कि वह सिंधिया के लिए कुंए में भी कूद जाएंगी। 

सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद ट्विटर पर अपना इस्तीफा पोस्ट किया था। उनके साथ ही 22 कांग्रेस विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया था। इससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है। सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते सिंधिया को निष्कासित किया गया है। पार्टी छोडऩे की वजहों का जिक्र करते हुए सिंधिया ने कहा, 'अभी जो कांग्रेस पार्टी है, वह पहले जैसी पार्टी नहीं। कांग्रेस पार्टी में वास्तविकता से इनकार करने के साथ-साथ नई सोच, विचारधारा एवं नए नेतृत्व को मान्यता नहीं दी जाती है। वहां (कांग्रेस) राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर अलग-अलग विडंबना है। ऐसे में मैंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।'

उधर सिंधिया को शामिल किए जाने से मप्र भाजपा में भी सर फुटव्वल हो सकती है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक सिंधिया को पार्टी में शामिल करने से प्रभात झा काफी नाराज हैं। पार्टी ने इस बार राज्य सभा से भी उन्हें टिकट नहीं दिया। उनका राज्य सभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। पार्टी में नरोत्तम मिश्रा और शिवराज सिंह चौहान के समर्थकों ने भी एक दूसरे खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

साल 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्रा के साथ विवाद होने पर सिंधिया की दादी राजमाता विजया राजे सिंधिया ने भी 36 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी थी जिसके चलते मध्य प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी जो 20 महीने चली।
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