बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल फिसला पर बड़ी राहत की उम्मीद नहीं
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तेल फिसला पर बड़ी राहत की उम्मीद नहीं

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली March 09, 2020

रूस और अन्य तेल उत्पादक देशों के खिलाफ 'तेल युद्ध' शुरू करने की सऊदी अरब की घोषणा के बाद कच्चा तेल कमजोर हुआ है। वर्ष 1991 में हुए खाड़ी युद्ध के बाद सोमवार को पहली बार कच्चे तेल में सबसे बड़ी गिरावट (फीसदी में) दर्ज की गई और यह 31 फीसदी फिसलकर 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। यह गिरावट भारत के संदर्भ में सकारात्मक मानी जा रहा है। 

मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल में भारी गिरावट अच्छा संकेत नहीं है। बकौल विश्लेषक देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और कोरोनावायरस के बाद बने हालात के मद्देनजर कच्चे तेल में गिरावट से मिलने वाला लाभ सीमित हो सकता है। इसके विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतें कम होने से तेल उत्पादक क्षेत्रों एवं इसके उत्पादक देशों के पूंजीगत व्यय पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा अमेरिका और तेजी से उभरते तेल उत्पादक बाजारों के ऋण बाजार पर भी असर होगा। इससे वित्तीय स्थिति और बदतर हो सकती है।  कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बाद वाहन ईंधन के खुदरा दाम में गिरावट आती है और सरकार इसका लाभ उपभोक्ताओं को देती है। हालांकि मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि इस बार उतना फायदा मिलता नहीं दिख रहा है।

इस ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा,'कच्चा तेल सस्ता होने से खुदरा कीमतें जरूर कम होंगी, लेकिन इसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा। सुस्त अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के मद्देनजर तेल कीमतों का भार कम होने के बावजूद उपभोक्ता निकट भविष्य में खर्च करने से परहेज करेंगे।' तेल की धार ऐसे समय में नरम पड़ी है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कोरोनावायरस के कारण पस्त हो गई है। इस खतरनाक वायरस की वजह से सभी प्रमुख देशों एवं अर्थव्यवस्थाओं में मांग कमजोर हुई है। 

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने मौजूदा संकट के मद्देनजर वैश्विक वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है, हालांकि उन्होंने 2020 की दूसरी तिमाही से हालात स्थिर होने की उम्मीद भी जताई है। मिसाल के तौर पर मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों को 2020 की पहली छमाही में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर कम होकर 2.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। दूसरी छमाही में कोरोनावायरस का खतरा कम होने से हालात सुधर सकते हैं। उन्होंने हाल में प्रकाशित एक टिप्पणी में कहा है, 'कोरोनावायरस का संक्रमण तेजी से फैलने के बाद विभिन्न देशों की सरकारों ने इससे निपटने की पहल की है। आने वाले समय में कुछ और उपाय देखने को मिल सकते हैं।
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