बिजनेस स्टैंडर्ड - पेट्रोलियम उत्पादों पर नहीं बढ़ेगा शुल्क
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पेट्रोलियम उत्पादों पर नहीं बढ़ेगा शुल्क

अरूप रॉयचौधरी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली March 09, 2020

केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में वृद्घि की संभावना से इनकार किया है। सरकार का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मुद्रास्फीति बढ़ेगी जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को नीतिगत दर में कटौती करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम उत्पाद शुल्क वृद्घि के पक्ष में नहीं है क्योंकि इससे उपयोगकर्ताओं पर मुद्रास्फीति दबाव बढ़ेगा। तेल कीमतों की वजह से मुद्रास्फीति में नरमी से उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी।'

अधिकारी ने कहा, 'कच्चे तेल की कीमतों से बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट को बढ़ावा मिलेगा। इसका मुद्रास्फीति पर भी प्रभाव पड़ेगा और ऐसे हालात को बढ़ावा मिल सकता है जो दर कटौती के लिहाज से अनुकूल हो।' सोमवार को, भारतीय सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल 2009 के बाद से पहली बार 6 प्रतिशत से नीचे आ गया। यह 12 आधार अंक की गिरावट के साथ 6.07 प्रतिशत पर बंद हुआ।

केंद्र ने 2019-20 के लिए कच्चे तेल की 55 डॉलर प्रति बैरल की औसत कीमत अनुमानित की है और 2020-21 के लिए यह अनुमान 50 डॉलर प्रति बैरल पर है। अधिकारी ने स्वीकार किया कि कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से वित्तीय मोर्चे पर उन्हें लाभ होगा, लेकिन इस बारे में उन्होंने स्पष्टï ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। 

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी गिरावट से सरकार को चालू खाता घाटा (सीएडी) में कमी के तौर पर लाभ मिलेगा। जहां तक केंद्र के राजकोषीय घाटे का सवाल है, अर्थशास्त्री यह नहीं मान रहे हैं कि तेल कीमतों में गिरावट का इस पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। मौजूदा समय में, सरकार के लिए सब्सिडी का बोझ सिर्फ एलपीजी और केरोसिन के लिए रह गया है। एक साल पहले 25,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2021 में 41,000 करोड़ रुपये की तुलना में ये सब्सिडी 2019-20 के लिए लगभग 38,000 करोड़ रुपये पर अनुमानित थीं। 

एसबीआई समूह में मुख्य पॉलिसी सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा की गई गणना के अनुसार, जहां तक सीएडी का सवाल है, तेल कीमतों में प्रत्येक 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट से सीएडी 27 आधार अंक तक सुधर सकता है। सीएडी देश को प्राप्त होने वाले आयात और वस्तु एवं सेवाओं के निर्यात के लिए उसके द्वारा किए जाने वाले भुगतान के बीच अंतर है, लेकिन इसमें शेयर बाजारों में आने वाला और निकलने वाला पैसा शामिल नहीं है।

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने मौजूदा तेल कीमतों के परिदृश्य को देखते हुए सीएडी वित्त वर्ष 2020 के लिए देश की जीडीपी के 0.9 प्रतिशत पर अनुमानित किया है, जो उनके द्वारा पहले जताए गए 1 प्रतिशत के अनुमान से कम है। उन्होंने यह घाटा 2019-20 की चौथी तिमाही में घटकर जीडीपी के महज 0.2 प्रतिशत रह जाने का अनुमान जताया है, जो तीसरी तिमाही के 0.9 प्रतिशत और एक साल पहले के 0.7 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। 

यह ध्यान देने की बात है कि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही और 2018-19 की पहली तीन तिमाहियों में सीएडी 2 प्रतिशत से ऊपर बना रहा। नायर ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी सीएडी 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि इसके लिए उनका पिछला अनुमान एक प्रतिशत था। कम सीएडी का मतलब है कि देश को इसके वित्त पोषण के लिए बहुत ज्यादा पूंजी प्रवाह की जरूरत नहीं होगी।
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