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तेल के घटे दाम तो बाजार हुआ हलाकान

सुंदर सेतुरामन / मुंबई March 09, 2020

तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट की वजह से पहले से ही कोरोनावायरस की मार झेल रहे वैश्विक शेयर बाजारों को जोरदार झटका लगा है। भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन पांच साल में सबसे खराब रहा और बेंचमार्क सूचकांकों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया भी 74 के पार पहुंच गया। विदेशी निवेशकों ने करीब 1 अरब डॉलर की बिकवाली की। एक महीने में विदेशी निवेशकों ने करीब 4 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं।

एक समय सेंसेक्स 2,467 अंक तक लुढ़क गया था। लेकिन कारोबार की समाप्ति पर 1,942 अंक नीचे 35,635 पर बंद हुआ, जो फरवरी 2019 के बाद का निचला स्तर है। निफ्टी भी 541 अंक लुढ़क कर 10,451 पर बंद हुआ। सऊदी अरब द्वारा तेल की कीमतों को लेकर एक तरह से युद्घ छेडऩे के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 30 फीसदी की तेज गिरावट रही, जिसका बाजार पर व्यापक असर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया और निवेशकों को वैश्विक मंदी की आशंका भी सता रही है।

तेल कीमतों में गिरावट से निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से अपना निवेश निकाल कर सोना और बॉन्ड में पैसा लगा रहे हैं। 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति का प्रतिफल 12 आधार अंक घटकर 6.06 फीसदी रहा। 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफ ल 0.5 फीसदी नीचे बंद हुआ। अमेरिकी बाजार भी तेज गिरावट देखी गई जिसके बाद कुछ देर के लिए कारोबार रोक दिया गया। 

बाजार के भागीदारों का कहना है कि वित्तीय बाजार का प्रदर्शन 2008 की वैश्विक मंदी की तरह दिखा। आमतौर पर तेल और बॉन्ड कीमतों में गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है। हालांकि बाजार के भागीदारों का कहना है यह गिरावट मंदी की आशंका से आई है और इससे संपत्तियों की कीमतों पर असर पड़ेगा।फस्र्ट ग्लोबल के संस्थापक शंकर शर्मा ने कहा, 'सामान्य स्थिति में तेल की कीमतों में गिरावट भारत के अच्छा होता है। लेकिन आज की गिरावट 2008 की तरह थी, जबकि 2008 में भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा समय से कहीं मजबूत स्थिति में थी।' 

मार्सेलस इन्स्टमेंट्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने कहा, 'पिछले 20 साल में तेल की कीमतों और भारतीय बाजार के बीच सकारात्मक संबंध दिखा है। तेल के दाम घटने से वैश्विक बाजारों में गिरावट आती है।'घरेलू बाजार दो महीने पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर था लेकिन अब मंदडि़ए की गिरफ्त में जाता दिख रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स मध्य जनवरी के अपने उच्च स्तर से करीब 15 फीसदी नीचे आ चुका है।बाजार के भागीदारों का कहना है कि तेल कीमतों को लेकर जंग के साथ कोरोनावायरस और घरेलू वित्तीय क्षेत्र के संकट से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। हालांकि येस बैंक के शेयर में अच्छी तेजी देखी गई।

बीएसई के सभी क्षेत्रों के सूचकांकों और सेंसेक्स की सभी कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज में एक दशक में सबसे ज्यादा 12.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से रिलायंस इंडस्ट्रीज में गिरावट आई है। सेंसेक्स में 1,942 अंकों की गिरावट में अकेले रिलायंस का योगदान 472 अंक का रहा। ओएनजी का शेयर 16.3 फीसदी और इंडसइंड बैंक में 11 फीसदी की गिरावट आई। निवेशकों को करीब 6.84 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी, वहीं रिलायंस का बाजार पूंजीकरण में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।बीएसई के 2,232 शेयर गिरावट पर और 327 बढ़त पर बंद हुए। हाल के समय में बाजार में आई यह चौतरफा बड़ी गिरावट है। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,974 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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