बिजनेस स्टैंडर्ड - सोना बढ़े, चांदी ठहरे तो क्या होगा?
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सोना बढ़े, चांदी ठहरे तो क्या होगा?

राजेश भयानी / मुंबई March 08, 2020

सोने-चांदी के बीच तुलनात्मक रूप से मजबूती का संकेत देने वाला इन दोनों धातुओं का अनुपात तीन दशक के शीर्ष स्तर 100 पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है। यह वह स्तर है जो फरवरी 1991 में नजर आया था। फिलहाल यह अनुपात 96.5 है। जब चांदी सोने से पिछडऩे लगती है, तो यह अनुपात बढ़ जाता है। पहले जब कभी इस अनुपात में काफी अधिक इजाफा हुआ, तो यह कभी भी कायम नहीं रह पाया और इसमें गिरावट आ गई। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोने से कितने औंस चांदी खरीदी जा सकती है। वैश्विक कारोबारियों की तरह भारत में भी कारोबारी इस अनुपात के आधार पर कारोबार करते हैं। अगर उन्हें यह अनुपात बढऩे की उम्मीद होती है, तो वे सोना खरीदते और चांदी बेचते हैं।
 
केडिया कमोडिटीज के निदेशक अजय केडिया ने कहा, 'फिलहाल सोने-चांदी का अनुपात 96.5 के स्तर पर है। पिछले छह महीने में इसमें करीब 19 प्रतिशत की उछाल नजर आई है। इस अवधि के दौरान सोने के दाम भी उछलकर 44,960 रुपये (प्रति 10 ग्राम) हो चुके हैं और इसके बाद इनमें नरमी आई है। यह सोने के प्रति साफ तौर पर बाजार की पसंद को बताता है।' केडिया ने कहा, 'पिछले छह महीने में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग अधिक रही है क्योंकि केंद्रीय बैंक सोने की खरीद करते रहे हैं। अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, अमेरिका-पश्चिमी एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और कोरोनावायरस के तेज फैलाव से भी सोने के दामों को समर्थन मिला है। बाजार की इन अनिश्चितताओं में सुरक्षित निवेश के रूप में कारोबारी अब भी सोने की खरीद कर रहे हैं। सोने के मुकाबले चांदी स्थिर रही है क्योंकि औद्योगिक मांग कमजोर है। सोने-चांदी का यह अनुपात वर्ष 1991 के 100 के स्तर पर पहुंच सकता है।'
 
अब तक कारोबारी यही कहते रहे हैं कि यह अनुपात अधिक स्तर पर बरकरार नहीं रहेगा और चांदी सोने से आगे निकलना शुरू कर देगी। अगर सोने में चांदी के मुकाबले ज्यादा तेजी से गिरावट आती है या चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी आती है तो ऐसा संभव है। हालांकि अब वे ऐसी बात कहने से कतरा रहे हैं क्याोंकि मूल धातुओं में कमजोरी के बाद चांदी अब भी मजबूत नहीं दिख रही है। यह बात इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि चांदी की 55 प्रतिशत से अधिक मांग उद्योग की ओर से होती है।
 
सोने में आगे और इजाफे या चांदी से बेहतर रहने के कई कारण हैं। लंदन स्थित सलाहकार मेटल फोकस ने सोने से संबंधित अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि नए क्षेत्रों में वायरस के प्रसार से नुकसान और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तीव्र कटौती के अलावा राजनीतिक कोलाहल और भू-राजनीतिक तनाव का असर भी इस धातु के लिए सकारात्मक साबित हुआ है। अन्य दिक्कतों के बीच जो कुछ और दिक्कतें दिखती हैं, उनमें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले अनिश्चितताओं के साथ-साथ ब्रेक्जिट की बातचीत और पश्चिम एशिया में जारी तनाव शामिल हैं।
 
सोने में और इजाफे का अनुमान लगाते हुए सहालकार कंपनी ने कहा कि हमें यह भी संदेह है कि नीति निर्माताओं द्वारा किए गए राजकोषीय/ मौद्रिक प्रोत्साहन वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए काफी रहेंगे। वायरस के प्रकोप से पहले सभी प्रमुख आरक्षित मुद्राओं की ब्याज दरें ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर नाम मात्र की दर पर रखी गई थीं। केंद्रीय बैंकों की बैलेंस शीट में भी वर्ष 2008 के बाद से इजाफा हुआ है। इसके परिणामस्वरूप निकट अवधि की कुछ बाजार राहत के बावजूद बुनियादी अर्थव्यवस्था के संबंध में ब्याज दरों में अतिरिक्त कटौती और/अथवा मौद्रिक नीति में ढील सीमित की जानी चाहिए। दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में किसी भी खास सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं जो यह बताता है कि निकट अवधि में सोने-चांदी का अनुपात और बढ़ेगा तथा चांदी सोने की तुलना में नरम रहेगी। जनवरी और फरवरी 2020 के दौरान चांदी के 'ईगल' (सिक्के) की संयुक्त बिक्री कुल मिलाकर 45 लाख औंस रही है, जबकि वर्ष 2019 में इसी अवधि के दौरान यह बिक्री 61.8 लाख औंस थी। यह बताता है कि चांदी के सिक्कों की बिक्री कमजोर है।
 
चिंता की प्रमुख बात चांदी के दामों का रूख है जो इस कैलेंडर वर्ष के पहले पांच से छह सप्ताह में काफी हद तक सीमित थे। किसी निवेशक के दृष्टिकोण से चांदी के दामों का यह प्रदर्शन काफी फीका रहा है, खास तौर पर सोने के दामों में उछाल को देखते हुए।
 
रत्नाभूषण निर्यात को 5 प्रतिशत झटका
 
इस बात की आशंका पहले से जताई जा रही थी कि कोरोनावायरस देश के रत्नाभूषण निर्यात को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाएगा। अब यह आशंका स्पष्ट हो रही है क्योंकि वायरस से प्रभावित ज्यादातर देश वे हैं जिन्हें भारत रत्नाभूषण का ज्यादा निर्यात करता है। उद्योग का अनुमान है कि सामान्य आर्थिक मंदी की वजह से मांग में नरमी के अलावा निर्यात ऑर्डर में पांच प्रतिशत का अतिरिक्त नुकसान हुआ है। अचानक फैली इस महामारी से ऑर्डरों पर असर पड़ा है। हाल ही में वायरस के डर से हॉन्गकॉन्ग में एक प्रमुख प्रोत्साहन कार्यक्रम को भी मई तक टाल दिया गया था। क्रिसमस की मांग के बाद ऐसे बड़े कार्यक्रमों से भारतीय रत्नाभूषण निर्यात के ऑर्डर का बड़ा भाग हथियाने में मदद मिलती है।
 
उद्योग के एक दिग्गज ने कहा कि जिन अधिकांश देशों में हम निर्यात करते हैं, वहां वायरस के मामले दर्ज किए गए हैं। इससे तत्काल रूप से निर्यात में पांच प्रतिशत की गिरावट आएगी। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जनवरी के बीच पहले 10 महीनों में रत्नाभूषण का सकल निर्यात जनवरी 2020 के दौरान 9.17 प्रतिशत घटकर 296.642 करोड़ डॉलर रह गया है, जबकि जनवरी 2019 में यह 326.588 करोड़ डॉलर था। परिषद के वाइस चेयनमैन कोलिन शाह ने कहा कि परिषद सरकार और बैंकरों के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि हमारे निर्यातकों की प्राप्ति के ऐवज में क्रेडिट पर असर न पड़े। हमें नए बाजार विकसित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करने होंगे ।
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