बिजनेस स्टैंडर्ड - कोरोना के कहर से शेयरों में निवेश कम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, July 15, 2020 02:57 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

कोरोना के कहर से शेयरों में निवेश कम

जयदीप घोष और संजय कुमार /  March 08, 2020

घरेलू संस्थागत निवेशकों की तरफ से भारी बिकवाली के बावजूद फरवरी के अंतिम शुक्रवार को सेंसेक्स 1,448 अंक फिसल गया। इससे इतना तो साफ है कि आगे कुछ और समय तक शेयर बाजार में उथलपुथल जारी रह सकती है। सोमवार 2 मार्च को बाजार कुछ अंतराल के बाद खुला क्योंकि  शुक्रवार को कारोबार बंद होने से पहले निवेशकों ने आक्रामक बिकवाली की थी। निवेशकों को यह बिल्कुल मान कर नहीं चलना चाहिए कि बुरा दौर खत्म हो चुका है। निवेश सलाहकार अर्जुन केजरीवाल का कहना है कि पस्थितियां सुधरने में थोड़ा और समय लग सकता है। पिछले सप्ताह बीएसई के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 7 प्रतिशत गिरावट आई, जिससे निवेशकों को सीधे 12 लाख करोड़ रुपये की चपत लग गई। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोरोनावायरस का संक्रमण चीन तक ही सिमट कर रह जाएगा। एडलवाइस म्युचुअल फंड की मुख्य कार्याधिकारी राधिका गुप्ता ने कहा, 'कोरोनावायरस के चीन के बाद दुनिया के दूसरे देशों में फैलने से निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया है।' खबरों के अनुसार अब तक कम से कम 70 देशों में इस खतरनाकम वायरस से लोग प्रभावित हो चुके हैं। वैलिडस वेल्थ ने अपनी एक टिप्पणी में कहा कि अच्छी बात यह है कि यह महामारी नियंत्रण में लाई जा सकती है। अगर वायरस छह महीने बाद या इससे अधिक समय में नियंत्रण में आता है तो इससे विकसित बाजारों में उपभोक्ताओं एवं कंपनियों के व्यवहार में काफी बदलाव आ सकता है। ऐक्सिस म्युचुअल फंड में इक्विटी प्रमुख जिनेश गोपानी कहते हैं, 'दरअसल इस बात का डर है कि अगर संक्रमण पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो इस कैलेंडर वर्ष के पहले छह महीने में दुनिया की आर्थिक वृद्धि दर को तगड़ा झटका लग सकता है।' शनिवार को चीन का मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) फरवरी में कम होकर 35.7 रह गया, जो जनवरी में 50 रहा था। 2008 के बाद इस सूचकांक में आई यह सबसे बड़ी गिरावट रही। गैर-विनिर्माण पीएमआई भी कम होकर 29.6 प्रतिशत रह गया। 

 
कोरोनावायरस का असर
 
मौजूदा स्थिति में निवेशक सीमित मात्रा में कर सकते हैं। अगर दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली की बयार बही तो भारतीय बाजारों पर भी असर पड़ेगा। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) तेजी से उभरते बाजारों से रकम निकालकर उन्हें सुरक्षित समझे जाने वाली परिसंपत्तियों में लगा रहे हैं, इसलिए भारतीय बाजार पर भी इसका असर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। जमीनी हकीकत यह है कि कई भारतीय कंपनियां चीन से कच्चे माल एवं अद्र्ध-निर्मित वस्तुओं का चीन से आयात करती हैं। अगर इनका आयात बाधित हुआ तो इन कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। गोपानी कहते हैं,'अगर चीन में आर्थिक गतिविधियां लंबे समय तक अस्थिर रहीं तो ऐसी कंपनियों की कमाई कम हो सकती है, जो चीन से आयात पर निर्भर हैं।' चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कमाई सुधरने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।  
 
कुछ और कहें आंकड़े
 
हालांकि यह उथल-पुथल अधिक समय तक जारी नहीं रह सकती है। आंकड़े दिखाते हैं कि ऐसी मुश्किलों का भारत के शेयर बाजार पर लंबे समय तक असर नहीं पड़ा है। उदाहरण के लिए एच1एन1 का संक्रमण फैलने से पहले महीने में सेंसेक्स 13 प्रतिशत तक नीचे चला गया था, लेकिन अगले कुछ महीनों में यह दोबारा अपनी जगह लौटा आया। दूसरे मामलों में बाजार उतना ऊपर नहीं गया। केजरीवाल कहते हैं, 'बाजार में और गिरावट दिख सकती है, लेकिन ज्यादातर नकारात्मक बातों का असर हो चुका है।' यह भी सच है कि भारतीय बाजार इस समय घरेलू आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहा है। 
 
इन क्षेत्रों पर असर
 
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां एयर कंडीशनर के लिए कंप्रेशर जैसे कल-पुर्जे का चीन से आयात करती हैं। फिलहाल उनके पास पर्याप्त भंडार हैं, लेकिन अगर अगले 10-15 दिनों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक सामान, रसायन और फार्मा उद्योग भी चीन से कच्चे माल एवं कल-पुर्जों का आयात करते हैं। कोरोनावायरस पर जल्द ही नियंत्रण नहीं पाया गया तो इन सभी क्षेत्रों पर असर हो सकता है। पर्यटन उद्योग भी मौजूदा संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
 
अवसर पर भी रहें सतर्क
 
इसमें कोई शक नहीं कि निवेश के कई अवसर सामने आएंगे। हालांकि, जल्दबाजी दिखाने से बचें क्योंकि बाजार कभी भी गिरावट का शिकार हो सकता है। केजरीवाल का कहना है कि निवेशक सीमित मात्रा में अच्छे शेयरों की खरीदारी कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि हड़बड़ी में और तत्काल निर्णय लेने से बचना चाहिए। गुप्ता कहते हैं,'पिछली घटनाओं- जैसे सार्स- के प्रभाव के अध्ययन से पता चला है कि इन बातों से बाजार में तेज गिरावट आती है। हालांकि चिंताएं धीरे-धीरे दूर होने के साथ ही बाजार वापस पटरी पर आने लगता है। दीर्घ अवधि के निवेशकों को अक्सर ऐसे उतार-चढ़ावों से रूबरू होना पड़ता है। 
 
ऐसी बातें खरीदारी का अवसर भी देती हैं, जिनका लाभ समझदार निवेशक आसानी से उठा सकते हैं। इक्विरियस वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी अंकुर माहेश्वरी ने कहा,'कई निवेशकों ने पूरी तरह सोच-विचार कर उन शेयरों की फेहरिस्त तैयार की होगी, जो उन्हें आकर्षित कर रहे होंगे। अगर मौजूदा गिरावट के बीच इन शेयरों की कीमतें उनके हिसाब से फिट बैठती हैं तो उन्हें इन्हें तुरंत झटक लेना चाहिए।' विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में निवेशकों को अपनी अधिशेष रकम चरणबद्ध तरीक से निवेश करना चाहिए। एक ही बार में सारी रकम निवेश करने से बचें क्योंकि अचानक आई गिरावट में यह दांव महंगा साबित हो सकता है। हालांकि बाजार की चाल मापने में मूकदर्शक बन कर भी न रह जाएं। अगर बाजार अचानक वापसी करता है तो आप खरीदारी के अच्छे अवसरों से हाथ धो बैठेंगे। इसके साथ ही तुरंत मुनाफा अर्जित करने की भी उम्मीद नहीं पालें। गोपानी कहते हैं,'अगर चरणबद्ध तरीके से तीन से पांच वर्षों का लक्ष्य लेकर निवेश किया जाए तो मुनाफे की उम्मीद बढ़ जाती है।'
 
म्युचुअल फंड निवेशकों को दीर्घ अवधि के अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) जारी रखना चाहिए। इसी तरह, अगर उनके पास अतिरिक्त रकम है तो उन्हें अपना मौजूद परिसंपत्ति आवंटन टटोलना चाहिए, क्योंकि बाजार में भूचाल से उनके निवेश का ताना-बना बिगड़ गया होगा। मिड- एवं स्मॉल-कैप फंड में हाल में आई तेजी मौजूदा गिरावट के कारण समाप्त हो गई होगी। कोरोनावायरस जैसे संक्रमण विविधता भरे पोर्टफोलियो का महत्त्व कम कर देते हैं। मौजूदा उथल-पुथल से सोना में लोगों ने जमकर निवेश किया है। अगर आपके पोर्टफोलियो में अब तक सोने में 10-15 प्रतिशत निवेश नहीं किया गया है तो सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों में निवेश कर सकते हैं। सोने में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहेगा। 
Keyword: Corona virus, china, india, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूरसंचार क्षेत्र में फिर छिड़ेगी शुल्क दरों को लेकर जंग?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.