बिजनेस स्टैंडर्ड - 'प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, April 03, 2020 05:35 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

'प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं'

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली March 06, 2020

कांग्रेस ने शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ उनके उस बयान पर तीखा हमला बोला जिसमें उन्होंने कहा था कि येस बैंक में समस्याओं की शुरुआत संप्रग के शासनकाल के दौरान हुई थी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार के उस आंकड़े पर सवाल उठाया है जिसमें कहा गया कि येस बैंक की ऋण बुक 2014-15 के 55,633 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20  में 241,499 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। उन्होंने पूछा कि जब पिछले पांच साल के दौरान बैंक का कुल ऋण सिर्फ लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा, तो उसकी ऋण बुक में 35 प्रतिशत तक की वृद्घि कैसे संभव हो सकती है। 
 
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि नरेंद्र मोदी के शासनकाल के दौरान बैंक धोखाधडिय़ां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि बैंक धोखाधडिय़ां वर्ष 2015-16 में 18,699 करोड़ रुपये की, 2016-17 में 23,933 करोड़ रुपये, 2017-18 में 41,167 करोड़ रुपये, 2018-19 में 71,500 करोड़ रुपये और 2019 से मार्च 2020 में 143,068 करोड़ रुपये की थीं। खेड़ा ने कहा कि देश में आर्थिक गड़बड़झाले के बारे में वित्त मंत्री से सवाल पूछना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री बल्कि पूरा मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री आर्थिक मुद्दों पर 'बेखबर' रहे हैं। खेड़ा ने कहा, 'हमें यह पता है कि प्रधानमंत्री अपने इर्द-गिर्द कुशल लोगों को देखना बर्दाश्त नहीं करते। वह प्रतिभा से असुरक्षा महसूस करते हैं।' खेड़ा ने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को न सिर्फ 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के झटकों से बचाए रखा बल्कि अर्थव्यवस्था ने अच्छा प्रदर्शन भी किया, जबकि मोदी सरकार ने नोटबंदी समेत अपने निर्णयों से अर्थव्यवस्था में गड़बड़ी पैदा की है।  खेड़ा ने कहा, 'एक डॉक्टर और झोलाछाप के बीच अंतर 10 वर्षों (मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के 6 साल शासन के बीच) का है।' उन्होंने कहा कि क्रेडिट सुइस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी सरकार ने पिछले 6 वर्षों में 7.77 लाख करोड़ रुपये के कॉरपोरेट ऋणों को माफ किया है। 
 
कांग्रेस का कहना है कि येस बैंक के साथ पैदा हुई समस्या पिछले 6 वर्षों के दौरान वित्तीय संस्थानों की विफलता (पीएमसी बैंक शामिल) का अन्य उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईएलऐंडएफएस को बचाने के लिए एलआईसी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को इसमें निवेश के लिए बाध्य किया। खेड़ा ने सवाल करते हुए कहा, 'एनपीए के गलत विवरण के बाद येस बैंक के बोर्ड में मई 2019 में आरबीआई नोमिनी नियुक्त किया गया था। तब से यह नोमिनी क्या कर रहा था? नोमिनी को इस संकट की भनक क्यों नहीं लगी?'
Keyword: yes bank, RBI, NPA, nirmala sitaraman, cash, ATM, cap, narendra modi,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार की पहल से दाल मिलों की घटेगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.