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अतार्किक प्रतिबंध

संपादकीय /  March 05, 2020

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को निर्णय दिया कि क्रिप्टोकरेंसी कारोबारियों के खातों और उनके लेनदेन से जुड़े बैंकों और एक्सचेंज पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा लगाया गया प्रतिबंध असंवैधानिक है। अप्रैल 2018 में लगे प्रतिबंध ने भारतीय क्रिप्टोकरेंसी बाजार की कमर तोड़ दी थी। इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमए) ने इसे चुनौती दी थी और तीन सदस्यीय पीठ ने  प्रतिबंध हटा दिया। आईएएमए ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी कारोबार वैध कारोबारी गतिविधि है और यह आरबीआई के क्षेत्राधिकार से बाहर है क्योंकि इन परिसंपत्ति को मुद्रा के बजाय जिंस के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। यह निर्णय इस उद्योग के लिए राहत लेकर आया है लेकिन अभी अनिश्चितता है। कहा जा रहा है कि सरकार कानून लाकर क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन को आपराधिक बनाने जा रही है। जुलाई 2019 में एक पैनल ने इसकी अनुशंसा की थी। 

 
बहरहाल सर्वोच्च अदालत के निर्णय का कई वजह से स्वागत किया जाना चाहिए। दलील है कि क्रिप्टोकरेंसी को एक वर्ग के रूप में प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक इस विषय पर बंटे हुए हैं। जापान, कोरिया और कई अन्य देश कुछ विशिष्टï क्रिप्टोकरेंसी को वैध मानते हैं और उन्होंने इनके लेनदेन को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। उदाहरण के लिए क्रिप्टोकरेंसी से सीमापार लेनदेन आसान हो सकता है। ब्लॉकचेन तकनीक कई क्रिप्टोकरेंसी को एक साथ लाती है। वह काफी विविधतापूर्ण और नवाचारी है। ब्लॉकचेन तकनीक इलेक्ट्रॉनिक बही खाता तैयार करती है जहां हर लेनदेन रिकॉर्ड होता है और अनेक लोग गोपनीयता रखते हुए उसका प्रमाणन कर सकते हैं। यह फर्जी तथ्यों को तुरंत पकड़ लेता है और लेनदेन के दोहराव को नकार देता है। ब्लॉकचेन की अवधारणा बिटकॉइन में गोपनीय लेनदेन के प्रमाणन के लिए तैयार की गई थी। उसके बाद से इसे कई अन्य उद्देश्यों से काम में लाया जाने लगा। गोपनीय पक्षों के बीच कमजोर अनुबंध प्रवर्तन, नगर निकायों के काम के प्रमाणन और विलासितापूर्ण वस्तुओं मसलन कलाकृतियों, डिजाइनर कपड़ों और पुरानी शराब आदि के प्रमाणन में भी इसका इस्तेमाल होने लगा। 
 
कई वित्तीय सेवा प्रदाताओं और निवेश बैंकों ने भी ब्लॉकचेन को अपनाया है। वे इसका इस्तेमाल आंतरिक अंकेक्षण में करते हैं क्योंकि इससे कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी बहुत मुश्किल हो जाती है। क्रिप्टोकरेंसी बंद करने से इस क्षेत्र में नवाचार भी ठप पड़ गया। कई क्रिप्टोकरेंसी मसलन बिटकॉइन, इथीरियम और रिपल आदि वैकल्पिक निवेश के रूप में भी मूल्य रखती हैं। इन मुद्राओं ने 2012-13 में कारोबारियों को वैश्विक अस्थिरता से बचाव मुहैया कराया और बीते छह महीनों में भी ऐसा ही हुआ। सन 2017-18 के आखिर में भारतीय एक्सचेंजों पर हर महीने 3 लाख नए कारोबारी जुड़ रहे थे और भारत भर में कारोबार का आकार बढ़ रहा था। उस प्रतिबंध ने भारतीयों को इन उपायों का लाभ लेने से वंचित कर दिया और भारतीय एक्सचेंज मजबूरी में बंद हो गए। इससे रोजगार और निवेश को नुकसान पहुंचा। निश्चित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में बहुत अस्थिरता है और समझ की कमी से कारोबारियों को भारी नुकसान हो सकता है। परंतु यह बात तो अधिकांश वित्तीय परिसंपत्तियों पर लागू होती है। कारोबारियों और निवेशकों को इन जोखिमों के साथ जीना सीखना होगा। प्रतिबंध थोपने के बजाय बेहतर यह होगा कि निवेशकों को जोखिमों के प्रति जागरूक किया जाए और धोखाधड़ी और घोटालों पर नजर रखी जाए। स्थानीय क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से कहा जा सकता है कि वे शेयर बाजार की तरह केवाईसी (ग्राहक को जानें) मानकों का पालन करें। स्थानीय सर्वर पर भंडारित डेटा नियामकों के लिए भी आसानी से उपलब्ध होगा। ऐसे में कर वंचना और धनशोधन की आशंका नहीं होनी चाहिए। जीवंत क्रिप्टोकरेंसी देश के वित्तीय क्षेत्र की मददगार साबित हो सकती है। 
Keyword: cryptocurrency, RBI, court,,
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