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कोरोनावायरस का साया पोल्ट्री उद्योग पर

दिलीप कुमार झा / मुंबई March 04, 2020

कोरोनावायरस के प्रसार के भय से पोल्ट्री उत्पादों की उपभोक्ता मांग में भारी कमी आई है जिससे पिछले एक महीने के दौरान इनके दाम एक-तिहाई तक कम हो चुके हैं। बेंगलूरु के बेंचमार्क थोक बाजार में ब्रॉयलर चिकन के औसत दाम फरवरी में 61.76 रुपये प्रति किलोग्राम बोले गए हैं, जबकि जनवरी में दाम 91.58 रुपये प्रति किलोग्राम थे। हैदराबाद और बिहार के मुजफ्फरपुर के थोक बाजारों में फरवरी के दौरान मुर्गे की बिक्री क्रमश: 61.28 रुपये प्रति किलोग्राम और 78.66 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से हुई, जबकि जनवरी में दाम क्रमश: 86.28 रुपये प्रति किलोग्राम और 90.13 रुपये प्रति किलोग्राम थे। इस दौरान अंडे के भाव में भी कमी आई है। एक ओर जहां कोरोनावायरस के भय को पोल्ट्री उत्पादों के दामों में इस भारी गिरावट की वजह बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और किसानों ने जोर देकर कहा है कि चिकन तथा अंडे के उपभोग का इस वायरस के प्रसार से दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है।     
 
वेंकीज ब्रांड के तहत पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री करने वाली कंपनी वेंकटश्वर हैचरीज के महाप्रबंधक केजी आनंद ने कहा, 'जब से कोरोनावायरस के प्रसार की खबरें आई हैं, तब से पोल्ट्री की खपत में तेज गिरावट देखी जा रही है। कोरोनावायरस का मुख्य स्रोत स्तनधारी जीव हैं, न कि पक्षी। लेकिन उपभोक्ताओं ने संभवत: एहतियाती तौर पर चिकन और अंडे की खरीदारी से दूरी बना ली, लिहाजा इनके दाम तेजी से लुढ़क गए।' आनंद के मुताबिक फिलहाल फार्म पर ब्रॉयलर चिकन का भाव 40 रुपये प्रति किलोग्राम बोला जा रहा है, जबकि इसकी उत्पादन लागत 80 से 85 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है। इसके परिणामस्वरूप मुर्गीपालकों को इस कारोबार में 50 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ रहा है और इस क्षेत्र की बहुत-सी कंपनियां अपना कारोबार समेट चुकी हैं। 
 
पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश चंद्र खत्री ने कहा, 'चूंकि पोल्ट्री उद्योग में ज्यादातर छोटे और असंगठित खिलाड़ी हैं इसलिए वे इतना बड़ा नुकसान नहीं झेल सकते। लिहाजा वे अपनी उत्पादन क्षमता में कटौती कर रहे हैं। स्थिति यह है कि बहुत-से छोटे मुर्गीपालक अपना धंधा बंद करके आजीविका के दूसरे साधनों का रुख कर चुके हैं।' चारे की कीमतों में तेज उछाल के कारण मुर्गीपालक पिछले दो वर्ष से परेशान थे। अब चारे की कीमत में मामूली कमी आई, तो कोरोनावायरस के डर से खपत में आई कमी ने मुर्गीपालकों को करारा झटका दिया है।       
 
इस बीच पिछले एक महीने में चारे का औसत भाव छह से 15 फीसदी तक कम हुआ है। फरवरी में सोयाबीन की औसत कीमत छह फीसदी घटकर 4,067 रुपये प्रति क्विंटल रह गई जो जनवरी में 4,329 रुपये प्रति क्विंटल थी। इसी तरह से मक्के और बाजरे की कीमतें भी फरवरी में क्रमश: 15 और आठ फीसदी घटकर 1,994 रुपये प्रति क्विंटल और 1,806 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं जो जनवरी में क्रमश: 2,347 रुपये और 1,965 रुपये प्रति क्विंटल थीं। आनंद ने कहा, 'हमें दो महीने में मांग सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक गर्मी आ चुकी होगी जिसमें वैसे ही पोल्ट्री उत्पादों की मांग कमजोर बनी रहती है। लेकिन मुर्गे की कम उपलब्धता के कारण दामों पर कुछ सकारात्मक असर पड़ सकता है।' पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक एक लाख करोड़ रुपये के पोल्ट्री उत्पाद क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर दो करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है।
Keyword: Corona virus, china, india, poultry farm,,
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