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एयर इंडिया में एनआरआई खरीद सकेंगे 100 फीसदी हिस्सेदारी

अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली March 04, 2020

सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण में रुचि को बढ़ाने के लिए सरकार ने भारत की नागरिकता रखने वाले अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को विमानन कंपनी में 100 फीसदी की हिस्सेदारी सौंपने की अनुमति दे दी है।    एक छोटे से बदलाव से एयर इंडिया में विदेशी निवेश के नियमों को अन्य निजी विमानन कंपनियों के बराबर कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे विमानन कंपनी में निवेश आकर्षित करने के मौके में इजाफा होगा।
 
जावड़ेकर ने कहा, 'भारतीय नागरिकता वाले अनिवासी भारतीयों को एयर इंडिया में निवेश करने की अनुमति होगी। इससे नए निवेशों को आकर्षित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। यात्रियों को अधिक से अधिक बेहतर सेवाएं मिलना जारी रहेगा और इससे कारोबारी परिदृश्य में भी सुधार आएगा।' सरकार ने जनवरी में एयर इंडिया सहित उसकी सहायक कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस में अपनी समूची हिस्सेदारी बेचने के लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए थे। इसमें एयर इंडिया और सिंगापुर एयरपोर्ट टर्मिनल सर्विसेज की संयुक्त उद्यम एयर इंडिया सैट्ïस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए भी अभिरुचि पत्र मंगाने का फैसला शामिल था।    
 
हालांकि, विमानन कंपनी में एनआरआई को 100 फीसदी निवेश करने की अनुमति का फैसला बहुलांश हिस्सेदारी रखने और पूर्ण निर्णय लेने की शक्ति का उल्लंघन भी नहीं होगा। एनआरआई निवेशों को घरेलू निवेशों के तौर पर देखा जाएगा।  बहुलांश हिस्सेदारी और पूर्ण निर्णय स्वामित्व (एसओईसी) ढांचे के तहत नियम है कि किसी खास देश से विदेशों के लिए उड़ान भरने वाले विमानन कंपनियों की बहुलांश हिस्सेदारी उस देश की सरकार या उसके नागरिकों के पास होनी चाहिए। विमानन उद्योग में इस नियम को पूरी दुनिया में अपनाया जाता है।   
 
फिलहाल, एनआरआई एयर इंडिया में केवल 49 फीसदी हिस्सेदारी ही रख सकते हैं। सरकार के स्वीकृत माध्यम से विमानन कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए सीमा भी 49 फीसदी ही है। मौजूदा नियमों के मुताबिक अधिसूचित घरेलू विमानन कंपनियों में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है जो कुछ निश्चित शर्तों के अधीन है जिसमें यह भी शामिल है कि यह नियम विदेशी विमानन कंपनियों के लिए प्रभावी नहीं होगा। अधिसूचित विमानन कंपनियों के मामले में 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति स्वत: मंजूरी मार्ग से है और उससे ऊपर के निवेश के मामले में सरकार की मंजूरी लेने की जरूरत है। विमानन कंपनी को बेचने के अपने प्रयास के हिस्से के तौर पर सरकार ने पेशकश को आकर्षक बनाने के लिए बहुत सारे शर्तों को बदल दिया है। इसमें पिछली बार की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की जगह 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला भी शामिल है। शर्तों में किए गए अन्य बदलावों में कर्ज में कमी का फैसला भी है जिसके तहत सफल बोलीदाता के ऊपर केवल 23,286.5 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी होगी जबकि देयताओं का निर्धारण लेनदेन पूरा होने के समय पर मौजूदा परिसंपत्तियों के आधार पर होगा।  
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