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प्रताडऩा का लाइसेंस!

संपादकीय /  March 03, 2020

केंद्र सरकार बजट में घोषित 'विवाद से विश्वास' योजना के माध्यम से राजस्व में अच्छी खासी बढ़ोतरी करने का प्रयास कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह योजना लोगों का वह समय और पैसा बचाने में मदद करेगी जो ऐसे मामलों में जाया होता है। दरअसल करीब 9.3 लाख करोड़ रुपये के 4 लाख से अधिक प्रत्यक्ष कर संबंधी मामले विभिन्न स्तरों पर अपील में लंबित हैं। योजना के अनुसार यदि कोई करदाता चालू वित्त वर्ष के अंत तक कर चुकाने को तैयार हो जाता है तो उसे ब्याज, जुर्माने और अभियोग से बचाव मिलेगा। करदाताओं के पास यह विकल्प होगा कि वे 31 मार्च के बाद और 30 जून के पहले विवाद निपटा सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ऐसे वक्त पर विवादों को कम करने और संसाधन बढ़ाने का प्रयास कर रही है जब लग रहा है कि वह राजस्व लक्ष्य से काफी पीछे रह सकती है।

 
परंतु योजना को लागू करने का तरीका चिंता की वजह बन सकता है। इस समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों के मुताबिक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने अधिकारियों की सालाना वेतन वृद्घि को योजना के तहत किए जाने वाले संग्रह से जोडऩे का निर्णय लिया है। सीबीडीटी कार्यालय के एक ज्ञापन के मुताबिक संग्रह के नतीजे भविष्य में इन अधिकारियों की तैनाती में भी अहम भूमिका निभाएंगे। यह विवाद निस्तारण योजना घोषित होने के तत्काल बाद विभाग ने अधिकारियों से कहा कि वे शनिवार को और छुट्टी के दिन भी काम करें ताकि जब योजना की आधिकारिक शुरुआत की जाए तो वे तत्काल संग्रह शुरू कर सकें। यह करदाताओं के शोषण का हथियार है। ऐसे में सरकार की इस मुद्दे से निपटने की शुरुआत ही गलत है। यह समझना आवश्यक है कि इतने ज्यादा कर विवाद क्यों हैं? पहले तो सरकार राजस्व संग्रह के अतिमहत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय करती है और कर विभाग पर यह दबाव बनाती है कि वे ऐसी कर मांग करें जिसका करदाता प्रतिरोध करते हैं। इससे विवाद उत्पन्न होते हैं। अब प्रदर्शन के आकलन का नया लक्ष्य कर अधिकारियों को मजबूर करेगा कि वे करदाताओं से विवादित राशि वसूल करने का हरसंभव प्रयास करें। यह स्वाभाविक रूप से शोषण की ओर ले जाएगा। ऐसी खबरें आ रही हैं कि करदाता लोगों को बार-बार फोन कर रहे हैं। इससे भी बुरी बात यह कि योजना की मामूली सफलता भी सरकार को ऐसी मांग करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे विवाद बढ़ेंगे और फिर निस्तारण की पेशकश की जाएगी। इससे लागत बढ़ेगी और कारोबारी सुगमता प्रभावित होगी। यह सरकार के कर आतंक खत्म करने के घोषित लक्ष्य के खिलाफ जाएगा। 
 
निश्चित तौर पर विवाद की समस्या को जड़ के जरिये ही हल किया जा सकता है। सरकार को जिम्मेदार ढंग से बजट तैयार करना होगा। वह अपने ताजा राजस्व स्तर के साथ लगातार मौजूदा ढंग से व्यय नहीं कर सकती। अति आशावादी राजस्व अनुमान न केवल करदाताओं की प्रताडऩा की वजह बनते हैं बल्कि सरकार के व्यय में भी अनिश्चितता आती है। सरकारी विभाग भी सुनिश्चित नहीं हैं कि उन्हें वित्त वर्ष के आरंभ में आवंटित राशि व्यय करने के लिए मिलेगी या नहीं। सरकार को कर विवादों के तेज निस्तारण की दिशा में काम करना होगा। संभव है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था में जहां कर कानून जटिल हैं, वहां विवाद भी होंगे। ऐसे में ऐसी व्यवस्था लागू करनी होगी ताकि इन विवादों को समय पर निपटाया जा सके। भारत को निजी निवेश के लिए इसलिए भी कठिन माना जाता है क्योंकि कर विभाग और करदाताओं के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ताजा कदम से समस्या बढ़ेगी। 
Keyword: vivad se viswash, income tax, revenue, budget,,
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