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कोरोनावायरस का असर बासमती चावल निर्यात पर

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ March 03, 2020

कई स्थानों पर खरीद सुचारु रूप से नहीं होने की शिकायत के अलावा रिकॉर्ड घरेलू फसल के साथ-साथ निर्यात में गिरावट आ रही है। दूसरी तरफ भारत से किया जाने वाला चावल निर्यात पहले ही अमेरिका-ईरान के बीच गतिरोध की आंच झेल रहा है। इसके अलावा ईरान की ओर से कोरोनावायरस के प्रकोप से कई मौतों की खबर आने के बाद निर्यात को और ज्यादा नुकसान पहुंचा है। पश्चिम एशिया का यह देश भारतीय बासमती के शीर्ष अंतरराष्टï्रीय गंतव्यों में से एक है। वर्ष 2019-20 के दौरान 11.7 करोड़ टन से अधिक के जोरदार धान उत्पादन के साथ ही निर्यात के इस निराशाजनक परिदृश्य के कारण भारतीय निर्यातकों को अब बड़े नुकसान की आशंका नजर आ रही है। पांच साल के औसत उत्पादन 10.78 करोड़ की तुलना में वर्ष 2019-20 के दौरान उत्पादन 96.7 लाख टन अधिक रहा है। वर्ष 2010 और 2019 के बीच लगभग 14 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज करने वाले चावल उत्पादन को नकारात्मक भू-राजनीति, सरकार द्वारा अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कड़े व्यापारिक मानदंडों के कारण नुकसान पहुंचा है। बाजार के नकारात्मक परिदृश्य के परिणामस्वरूप एक्सचेंजों पर बासमती के दामों में गिरावट का रुख रहा है।
 
कोरोनावायरस फैलने से जिंस एक्सचेंज आईसीईएक्स पर सबसे ज्यादा बिक्री वाली बासमती किस्म (पीबी1121) का भाव फिसलकर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच चुका है। हालांकि धान के हाजिर बाजार में लगातार गिरावट देखी गई है। वायरस प्रकोप के बाद ईरान ने भारतीय बासमती की खेप रोक दी हैं। इस वजह से इस वित्त वर्ष में निर्यात में 18 से 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने कहा कि भारत के बासमती निर्यात में ईरान और पश्चिम एशिया के बाकी देशों का योगदान सबसे अधिक रहता है। देश के निर्यात में इनकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक रहती है।
 
कोहिनूर फूड्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने कहा कि निर्यातकों के लिए कोरोनावायरस चिंता का सबसे बड़ा विषय है तथा अब ईरान में ऐसे मामलों की खबर आने से स्थिति और ज्यादा खराब हुई है। इस प्रकोप का प्रभाव पहले ही अंतरराष्टï्रीय व्यापार और यात्राओं पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह में हालात में क्या बदलाव आता है, इस संबंध में चावल निर्यातकों ने 'इंतजार करो और देखो' का दृष्टिïकोण अपनाया हुआ है। कोहिनूर फूड्स चावल के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। इस बीच मुंबई के चावल व्यापारी देवेंद्र वोरा निकट अवधि में उद्योग की संभावनाओं को लेकर निराश हैं। उनका कहना है कि बचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
 
वोरा ने कहा कि विभिन्न बाहरी और आंतरिक कारकों की वजह से बाजार में गिरावट जारी है और हम इस बात की केवल आशा ही कर सकते हैं कि अगले एक या दो महीने में स्थिति में सुधार होगा। इससे पहले उन्होंने सुझाव दिया था कि भारतीय निर्यातकों को नुकसान से कुछ हद तक बचाने के लिए केंद्र को ब्राजील के लिए कृषि निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए जो चावल और गेहूं का बड़ा उपभोक्ता देश है। खास तौर पर ईरान को किया जाने वाला बासमती निर्यातवर्ष 2018-2019 में 1.5 अरब डॉलर का रहा। भारतीय चावल निर्यात में ईरान का योगदान 25 प्रतिशत रहता है। अमेरिका स्थित व्यापारिक वित्तीय कंपनी ड्रिप कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर चावल निर्यात में गिरावट देखी गई है। भू-राजनीतिक तनाव की वजह से पश्चिम एशिया की तरफ से बड़ी गिरावट सामने आई है। ड्रिप कैपिटल के सह-संस्थापक और सह-मुख्य कार्याधिकारी पुष्कर मुकेवर ने कहा कि खेपों में 22 प्रतिशत की गिरावट को देखते हुए सालाना आधार पर सबसे बड़े निर्यात बाजार ईरान के साथ निर्यात अब तक निराशाजनक दिख रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है जिसकी वैश्विक हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। हालांकि देश की निर्यात बास्केट में चावल का योगदन केवल दो प्रतिशत ही रहता है। 
Keyword: agri, farmer, crop, rice, export, basmati,,
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