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लक्ष्य का 80 फीसदी होगा पूरा

दिलीप कुमार झा / मुंबई March 03, 2020

आपूर्ति में गिरावट के पूर्वानुमान के कारण पिछले कुछ सप्ताह से वैश्विक स्तर पर चीनी के दामों में हुए तेज इजाफे की वजह से भारत चीनी सत्र अक्टूबर 2018 से सितंबर 2020 के लिए आवंटित निर्यात कोटे का 80 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य हासिल कर सकता है। सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में फैली 530 मिलों को 60 लाख टन चीनी निर्यात का कोटा आवंटित किया हुआ है। यह इन मिलों की पेराई क्षमता और अधिकतम स्वीकार्य निर्यात कोटे (एमएईक्यू) के तहत चालू सीजन के इनके पिछले रिकॉर्ड पर निर्भर करता है। इस कोटे में से चीनी मिलें पहले ही संयुक्त रूप से लगभग 35 लाख टन का अनुबंध कर चुकी हैं और निर्यात के लिए अपने कारखानों से तकरीबन 23 लाख टन की ढुलाई कर चुकी हैं।
 
देश से निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ चीनी की घरेलू अधिकता में कमी लाने के लिए सरकार ने निर्यात करने वाली मिलों को 6,00,000 टन कोटे का फिर से आवंटन किया था। यह कोटा उन मिलों से वापस लिया गया था जिन्हें कोटे की मात्रा आवंटित तो की गई थी लेकिन वे इसका निर्यात नहीं कर पाई थीं। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा, 'हम इस साल 50 लाख टन से अधिक चीनी निर्यात कर लेंगे जो बहुत अच्छा प्रदर्शन है। यह देखते हुए कि सरकार काफी सक्रिय है, निर्यात के लिहाज से इस साल चीनी मिलों का प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में बेहतर रहेगा।'
 
पिछले साल आवंटित इस 50 लाख एमएईक्यू में से चीनी मिलें 38 लाख टन निर्यात कर पाई थीं। वर्मा ने कहा, 'इस साल अधिक मात्रा में चीनी निर्यात कर पाने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, निर्यात की मात्रा का अवंटन प्राप्त करने वाली इन 530 मिलों में से बहुत-सी मिलों को नकदी प्रवाह, कच्ची चीनी की उपलब्धता और पिछले साल के लिए सरकार की ओर से जारी सब्सिडी अटकने की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके परिणामस्वरूप आवंटित कोटे में कमी आई है। दूसरा, सरकार ने गैर-निर्यातित मात्रा का तीन हिस्सों में फिर से आवंटन करने का फैसला किया है यानी जनवरी, मार्च और जून की अवधि में। तीसरे, प्रति वर्ष 5,00,000 से 8,00,000 टन के बीच निर्यात करने वाली काकीनाडा की एक बड़ी रिफाइनरी को इस साल तकनीकी कारणों से निर्यात के लिए लाइसेंस नहीं मिला है। इन सब बातों को देखते हुए हम इस साल 50,00,000 लाख टन से ज्यादा चीनी निर्यात का अनुमान लगा रहे हैं।'
 
इस बीच कोरोनोवायरस के डर से काम बंदी के बीच मांग में कमी की वजह से पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के दामों में नरमी आई है। सत्र के शीर्ष स्तर पर जाने के बाद बेंचमार्क इंटर कॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर मई में डिलिवरी वाली चीनी का वायदा भाव पिछले दो हफ्तों में घटकर फिलहाल प्रति पौंड 13.83 सेंट के स्तर पर चल रहा है, जबकि पहले इस सत्र में इसका भाव प्रति पौंड 15.12 सेंट के शीर्ष स्तर पर था। कोरोनावायरस के फैलने से सभी जिंसों में आई गिरावट के कारण ऐसा हुआ है। हालांकि भारत में पिछले साल के बचे तकरीबन एक करोड़ टन के स्टॉक के साथ-साथ अधिक उत्पादन से चीनी के दामों पर दबाव रहा है जो हाजिर बाजार में 31 से 32 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में सीमित रहे हैं। इस बीच इस्मा ने आज एक बयान में कहा कि देश में सक्रिय 453 मिलों ने अक्टूबर 2019 और फरवरी 2020 के बीच की अवधि में संयुक्त रूप से 1.948 करोड़ टन चीनी उत्पादन किया है। पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज 2.493 करोड़ उत्पादन की तुलना में इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
Keyword: sugar, farmer, mills, export,,
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