बिजनेस स्टैंडर्ड - जोखिम नहीं लेना चाहते तो ये हैं निवेश विकल्प
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जोखिम नहीं लेना चाहते तो ये हैं निवेश विकल्प

बिंदिशा सारंग /  03 03, 2020

अपनी बचत को एकमुश्त निवेश कर आप नियमित ब्याज आय या परिपक्वता पर मूलधन और ब्याज पाने के लिए एफडी, बॉन्ड आदि में निवेश का विकल्प चुन सकते हैं

जब बात किसी निवेश को चुनने की हो तो इसमें जोखिम उठाने की क्षमता एक अहम मापदंड होता है। आपकी जोखिम उठाने की क्षमता से ही यह तय होगा कि आप कितनी कमाई कर सकते हैं क्योंकि इन दोनों चीजों के बीच संबंध विपरीत अनुपाती है। मुंबई के कर एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन कहते हैं, 'जो लोग जोखिम नहीं लेना चाहते, उनके लिए सावधि जमा (एफडी), कॉरपोरेट जमा, गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और बॉन्ड जैसी निश्चित आमदनी वाली योजनाएं बेहद जरूरी हैं।'

निश्चित आय प्रतिभूतियां
ये डेट योजनाएं हैं, जिनमें आपके निवेश पर निश्चित ब्याज मिलता है। इनमें वित्तीय प्रतिभूति की परिपक्वता के बाद मिलने वाली राशि के बारे में आपको पहले ही पता चल जाता है। ये वित्तीय प्रतिभूतियां बाजारों से नहीं जुड़ी होती हैं, इसलिए कम जोखिम लेने वाले निवेशक निश्चित प्रतिफल प्राप्त करने में इन्हें प्राथमिकता देते हैं। अगर आप निश्चित आमदनी वाली प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं तो इससे आपके पोर्टफोलियो में विविधता आती है और आपके निवेश में जोखिम कम हो जाता है।

बैंक सावधि जमा (एफडी)
देश में बैंक सावधि जमा लोकप्रिय निवेश विकल्प है। सावधि जमा में आपके मूलधन निवेश पर निश्चित ब्याज दर मिलती है। देश में लगभग हर वाणिज्यिक बैंक सावधि जमा योजनाएं मुहैया कराता है। आपको एकमुश्त मूलधन निवेश करना पड़ता है, जिस पर जमा अवधि के दौरान ब्याज मिलता है। निवेशक को परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद मूलधन और एकत्रित ब्याज मिल जाता है। बैंक विभिन्न परिपक्वता के सावधि जमा योजनाएं मुहैया कराते हैं। निवेशक 7 दिन से लेकर 10 साल तक की परिपक्वता अवधि वाली एफडी चुन सकते हैं। यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि अलग-अलग बैंक समान अवधि के लिए अलग-अलग ब्याज दर मुहैया कराते हैं। मुंबई के सर्टिफाइड फाइनैंशियल प्लानर नरसीन मामाजी ने कहा, 'एफडी विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए अच्छा निवेश विकल्प है क्योंकि बैंक आम तौर पर निवेशकों की इस श्रेणी को ज्यादा ब्याज मुहैया कराते हैं।' वरिष्ठ नागरिकों को आम तौर पर प्रचलित दरों से 0.50 फीसदी अधिक ब्याज दर मिलती है। एफडी के कुछ लाभ यह हैं कि वे अन्य विकल्पों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित योजनाएं हैं। इनमें मूलधन के नुकसान का मामूली जोखिम होता है और प्राप्त ब्याज के लिए ऐसा तरीका अपनाया जा सकता है, जिससे आपको अपना मासिक खर्च चलाने में मदद मिल सकती है।
बहुत से बैंक 1,000 के गुणक में आंशिक निकासी की भी मंजूरी देते हैं। शेष राशि पर ब्याज की मूल दर मिलती रहती है। बैंक परिपक्वता पर उतनी ही अवधि के लिए एफडी के स्वत: नवीनीकरण की भी सुविधा देते हैं। आप मूलधन और प्राप्त ब्याज पर 90 फीसदी तक ऋण ले सकते हैं। निवासी भारतीय और एनआरआई (प्रवासी भारतीय), एनआरई (नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल) और एनआरओ (नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी) भारत में एफडी खाते खोल सकते हैं। बैंक में आप उस स्थिति में भी एफडी खाता खोल सकते हैं, जब आपके पास उस बैंक का बचत खाता नहीं होता है। हालांकि ऐसे बैंकों में आपको केवाईसी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इन एफडी के अलावा कर बचत वाली सावधि जमाएं भी हैं, जिनमें आपको एक कैलेंडर वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक की मूलधन राशि पर कर छूट मिलती है। इन एफडी में लॉक-इन अवधि पांच साल है, जिसमें आप इस अवधि में राशि की निकासी नहीं कर सकते हैं।
मुंबई के स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार एम बर्वे ने कहा, 'यह बात ध्यान रखें कि कुछ एफडी में ब्याज प्रत्येक तिमाही या वर्ष में जुड़ता है और परिपक्वता पर मिलता है। अगर आप ऐसी एफडी चुनते हैं तो इससे आपको अपनी बचतों को बढ़ाने में मदद मिलती है। कुछ अन्य एफडी भी हैं, जिनमें ब्याज का भुगतान आपकी पसंद के मुताबिक मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर मिलता है। यह उन पेंशनभोगियों के लिए अच्छा विकल्प है, जिन्हें आमदनी के एक नियमित स्रोत की तलाश होती है।' सावधि जमाओं से प्राप्त ब्याज पर कर देना पड़ता है। आपको इस ब्याज को अपनी कुल आमदनी में जोडऩा होता है और आपकी कुल आमदनी पर लागू स्लैब की दर के हिसाब से कर देना पड़ता है। 

कॉरपोरेट सावधि जमा
अगर आप थोड़ा अधिक जोखिम ले सकते हैं तो कंपनी सावधि जमा बैंक सावधि जमाओं की तुलना में बेहतर विकल्प हैं। इनमें बैंक एफडी से थोड़ा अधिक जोखिम है क्योंकि इनमें कोई गिरवी संपत्ति नहीं होती है और इसलिए ये असुरक्षित होती हैं। दूसरी ओर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में प्रत्येक जमाकर्ता को एफडी पर पांच लाख रुपये का जमा बीमा मिलता है। बहुत से लोगों के बैंक एफडी की तुलना में कंपनी एफडी में निवेश को तरजीह देने की वजह यह है कि आम तौर पर समान अवधि की कंपनी एफडी में बैंक एफडी की तुलना में एक से तीन फीसदी अधिक ब्याज मिलता है। इसी वजह से वरिष्ठ नागरिक, गृहिणी और निवेशक जैसे निचली कर श्रेणी में आने वाले लोग और धर्मार्थ न्यास कंपनी एफडी को प्राथमिकता देते हैं। जैन कहते हैं, 'केवल ऊंचे प्रतिफल और बड़ी कंपनी होने का मतलब यह नहीं है कि यह अच्छा निवेश है। अपनी तरफ से जांच-पड़ताल करना महत्त्वपूर्ण है, जिसमें रेटिंग सबसे अहम मापदंड है। केवल उन कंपनी एफडी में निवेेश करें, जिनकी रेेटिंग एए या अधिक है।' संक्षेप में कंपनी एफडी चुनने के तीन अहम मापदंड क्रेडिट रेटिंग, ब्याज और अनिवार्य न्यूनतम या अधिकतम निवेश है। आम तौर पर ब्याज दरों का निर्धारण सावधि जमा की अवधि से तय होता है। ज्यादातर कंपनियां संचयी और गैर-संचयी ब्याज दर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक ब्याज दर मुहैया कराती हैं। कंपनी एफडी में अगर सालाना ब्याज 5,000 रुपये से अधिक है तो कर काटा जाता है।

गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर
गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) ऐसी वित्तीय योजनाएं हैं, जिनका इस्तेमाल कंपनियां लंबी अवधि के लिए पूंजी जुटाने में करती हैं। बर्वे ने कहा कि एनसीडी निश्चित अवधि वाली डेट योजनाएं हैं। इनमें निवेश करने वाले लोगों को एक निश्चित दर पर नियमित ब्याज मिलता है। उन्होंने कहा, 'एनसीडी पर प्रतिफल की दर करीब 11 से 12 फीसदी है। यह ज्यादातर निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक है।' आपको एनसीडी में निवेश से पहले कंपनी की पृष्ठभूमि और क्रेडिट रेटिंग की जांच-परख करनी चाहिए। ऊंची रेटिंग का मतलब है कि कंपनी अपना कर्ज चुकाने की स्थिति में है और यह आपके लिए अच्छी बात है। एएए रेटिंग सबसे अच्छी गुणïवत्ता को दर्शाती है। इस रेटिंग वाली कंपनी के डिफॉल्ट करने के बहुत कम आसार होते हैं। अगला स्तर एए है। इस रेटिंग वाली कंपनी में भी डिफॉल्ट की आशंका कम होती है। इसी तरह बीबीबी और उससे अधिक रेटिंग का मतलब है कि उनमें निवेश करना सही है क्योंकि तुलनात्मक रूप से डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है। इसमें प्रतिफल को कभी पैमाना नहीं बनाना चाहिए। एनसीडी में ब्याज कूपन दर और क्रेडिट रेटिंग के बीच विपरीत संबंध होता है। आपको कम रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में निवेश पर ज्यादा प्रतिफल मिलता है। दूसरा मापदंड जिस पर विचार किया जाना चाहिए, वह भुगतान का विकल्प है। एनसीडी के परिपक्व होने की एक निश्चित तारीख होती है। मूलधन के साथ ब्याज का भुगतान मासिक, तिमाही या सालाना पर किया जा सकता है, जो तय अवधि पर निर्भर करता है। कई बार आपको पूरा ब्याज मूलधन के साथ लेने का विकल्प मिलता है। इसमें आपको एनसीडी की अवधि के दौरान ब्याज का भुगतान नहीं मिलता है, लेकिन परिपक्वता पर एकमुश्त धनराशि मिलती है।
मासिक आय के लिए ब्याज एकत्रित होने वाले विकल्प को चुनें क्योंकि चक्रवृद्धि ब्याज से बेहतर प्रतिफल मिलता है। एनसीडी पर कर निवेशक की स्लैब दर के हिसाब से लगता है, इसलिए अगर निवेशक 30 फीसदी कर के सबसे ऊंचे स्लैब में आता है तो उसे मिलने वाले ब्याज पर 30 फीसदी कर चुकाना होगा। हालांकि अगर निवेशक एनसीडी को एक साल से अधिक अवधि के लिए रखता है तो इंडेक्सेशन लाभ हासिल किया जा सकता है। अगर एनसीडी को एक साल पूरा होने से पहले बेच दिया जाता है तो नियमित कर दरों पर अल्पावधि पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर चुकाना होगा। अगर आप एनसीडी एक साल बाद या उससे अधिक या परिपक्वता से पहले बेचते हैं तो इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी एलटीसीजी लागू होगा। अगर कोई व्यक्ति सबसे ऊंचे कर स्लैब में आता है तो उसका कर के बाद प्रतिफल काफी कम होगा, जिससे ये आकर्षक नहीं रह जाते हैं। हालांकि एनसीडी उन लोगों के लिए अच्छे निवेश विकल्प हैं, जो निम्न आय कर स्लैब में आते हैं।

बॉन्ड
अगर आप पूर्व निर्धारित समय अंतराल पर ब्याज आमदनी प्राप्त करना चाहते हैं तो उपर्युक्त तीन योजनाओं का विकल्प बॉन्ड है। इसमें निर्गमकर्ता, भले ही वह सरकार हो या कंपनी, निवेशक को ब्याज का भुगतान मासिक, तिमाही, छमाही, सालाना या परिपक्वता पर करने की सहमति जताती है। इस तरह के ब्याज भुगतान को कूपन कहा जाता है। निर्गमकर्ता अवधि पूरे होने पर बॉन्ड की फेस वैल्यू भी चुकाती है। जिन बॉन्डों में ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है, लेकिन डिस्काउंट पर जारी किए जाते हैं, उन्हें जीरो-कूपन बॉन्ड कहा जाता है। अन्य बॉन्डों में सरकार द्वारा जारी जी-सेक बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड, सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड और टैक्सेबल बॉन्ड आदि शामिल हैं। अगर आप सबसे ऊंचे कर वर्ग में आते हैं तो कर मुक्त बॉन्ड बेहतर हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड जोखिम नहीं लेना चाहते तो ये हैं निवेश विकल्प

 

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