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म्युचुअल फंड हो सटीक तो कमाई भी होगी ठीक

संजय कुमार सिंह /  03 03, 2020

वर्ष 2019 में लार्ज-कैप फंडों ने मिड और स्मॉल-कैप फंडों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। इस समय म्युचुअल फंडों में प्रवेश कर रहे निवेशकों को बीते वर्षों का प्रतिफल देखकर निवेश करने की आम गलती से बचना चाहिए। लार्ज-कैप शेयर महंगे हो चुके हैं, जबकि मिड और स्मॉल-कैप शेयरों का मूल्यांकन सही है। इसलिए ज्यादातर विशेषज्ञों को 2020 में मिड और स्मॉल-कैप फंडों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
सलाहकारों की मदद के बगैर फंड चुनने वाले पिछले प्रतिफल को ही अच्छे फंड का संकेत मानते हैं और पिछले वर्ष अच्छा प्रदर्शन करने वाले लार्ज-कैप फंड की श्रेणी से कोई फंड चुन लेते हैं। गलत फंड चुनने से निवेशकों को नुकसान हो सकता है, जिससे उन्हें लग सकता है कि म्युचुअल फंड उनके लिए सही नहीं हैं। गलत फंड चुनने पर खुदरा निवेशकों को बड़ी चपत लग सकती है। तो बेहतर प्रतिफल के लिए कौन सा म्युचुअल फंड चुनें।
फंड का स्टाइल बॉक्स देखें
स्टाइल बॉक्स में 3 गुना 3 बॉक्स होते हैं, जिसमें कुल नौ बॉक्स होते हैं। इस पर नजर डालते ही फंड प्रबंधक की निवेश शैली पता चल जाती है। किसी इक्विटी फंड के स्टाइल बॉक्स में दो अहम मापदंड होते हैं- बाजार पूंजीकरण और वृद्धि दर। बाजार पूंजीकरण आपको बताता है कि फंड मुख्य रूप से निवेश लार्ज कैप, मिड-कैप या स्मॉल-कैप में करता है। लार्ज-कैप शेयरों में सबसे कम जोखिम है और स्मॉल-कैप शेयरों में सबसे अधिक जोखिम।
वृद्धि दर के आधार पर आपको वृद्धि शेयरों, मूल्य शेयरों में निवेश करने वाले या मिश्रित रणनीति वाले फंड मिलते हैं। वृद्धि शेयर का राजस्व और आमदनी तेजी से बढ़ती है। निवेशक ऐसे शेयरों के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार होते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि ये कंपनियां अपनी आमदनी तेजी से बढ़ाएंगी और उनके लिए चुकाई गई ऊंची कीमत सही साबित होगी। मूल्य शेयर उलटे हैं। निवेशक मानते हैं कि बाजार का उनकी संभावनाओं को लेकर ज्यादा निराशाजनक रुख है और वे मूल्यांकन से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। मिश्रित फंड दोनों शेयरों को खरीदते हैं। कोई फंड वृद्धि, मूल्य या मिश्रित श्रेणी से संबंधित है, उसका वर्गीकरण करने के लिए पी/ई अनुपात, आमदनी वृद्धि दर, लाभांश प्रतिफल आदि मानकों का इस्तेमाल किया जाता है। सभी फंड स्टाइल बॉक्स में रखने पर आप जान जाते हैं कि आपका पोर्टफोलियो विविधता भरा है या नहीं। 

विभिन्न क्षेत्रों में आवंटन जांचें 
देखिए कि आपका पैसा विभिन्न क्षेत्रों में लगा हुआ है या नहीं। अगर कोई फंड किसी क्षेत्र में अत्यधिक निवेश करता है तो उसमें अत्यधिक उतार-चढ़ाव का जोखिम होता है। तकनीकी क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में तेजी के दौर में फंड प्रबंधकों ने दोनों क्षेत्रों में अधिक पैसा लगाया। लेकिन तेजी खत्म होने पर इन शेयरों में आई गिरावट का खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। उठापटक से बचना है तो उन फंडों से दूर रहें, जो किसी खास क्षेत्र में अधिक निवेश करते हैं।

शेयरों की संख्या देखें
फंड में शेयरों की संख्या 15-20 से 60 तक  हो सकती है। शेयरों की संख्या का भी उतार-चढ़ाव पर असर पड़ता है। फंड में कम शेयर हों तो इसका दायरा सीमित होगा। ज्यादा शेयर वाले फंड का पोर्टफोलियो विविधता भरा होने के आसार हैं।
फंड में कुछेक शेयर होने से उसका प्रतिफल बढऩे के आसार होते हैं, मगर उसमें उठापटक भी ज्यादा देखने को मिल सकती है। फंड बहुत से शेयरों में पैसा लगाता है तो किसी एक शेयर के कमजोर प्रदर्शन से फंड पर अधिक असर नहीं पड़ेगा। किसी फंड के पोर्टफोलियो में शामिल शीर्ष तीन या पांच शेयरों में निवेश की उसी श्रेणी के अन्य फंडों से तुलना करने से पता चलता है कि उस फंड ने चुनिंदा शेयरों में भारी निवेश किया है या नहीं। अगर 70 से अधिक शेयरों वाले फं ड के पोर्टफोलियो में शीर्ष पांच शेयरों का हिस्सा 50 फीसदी है तो इसका मतलब है कि फंड विविधता भरा नहीं है।

पोर्टफोलियो में बदलाव
फंड के फेरबदल अनुपात से पता चलता है कि उसके प्रबंधक ने कितनी खरीदारी और बिकवाली की है। फंड का फेरबदल अनुपात 100 फीसदी होने का अर्थ है कि वह एक शेयर को औसतन एक साल के लिए रखता है। 50 फीसदी है तो पोर्टफोलियो में शेयर औसतन दो साल के लिए रखा जाता है।
खरीदना और बनाए रखना सबसे कम जोखिम वाली रणनीति होती है। पोर्टफोलियो में बहुत अधिक फेरबदल करने से लागत भी बढ़ती है। फं ड की प्रबंधनाधीन संपत्तियां अधिक होने पर ज्यादा फेरबदल की रणनीति नुकसानदेह साबित होती है।

कैसे समझें फंड का प्रदर्शन
निवेशक ध्यान रखें कि बीते वर्षों का प्रतिफल भविष्य के प्रदर्शन की कोई गारंटी या संकेतक नहीं है। फंड के प्रतिफल की उसके बेंचमार्क और श्रेणी औसत से तुलना करनी चाहिए। किसी फंड की उसके जैसे अन्य फंडों से तुलना करना विशेष उपयोगी है क्योंकि इससे फंड की तुलना उसी क्षेत्र के शेयरों में निवेश करने वाले अन्य फंडों से करने में मदद मिलती है।
फंड का प्रदर्शन आंकते समय आपको पांच या 10 साल के प्रदर्शन को ज्यादा अहमियत देनी चाहिए। फंड के प्रतिफल की उसके बेंचमार्क या उसकी श्रेणी के औसत से तुलना करनी चाहिए। अगर पिछले सात वर्षों में से पांच में आपके फंड ने बेंचमार्क से बेहतर प्रर्दशन किया है तो वह टिकाऊ प्रतिफल देने वाला फंड है। ऐसे फंड को उन फंडों पर तरजीह दी जानी चाहिए, जिनका प्रतिफल असमान है यानी जो एक साल अच्छा प्रदर्शन करते हैं और अगले दो वर्षों में उनका प्रदर्शन कमजोर रहता है।
बीते समय के प्रतिफल के पीछे भागने से बचें। किसी साल लार्ज-कैप फंडों का प्रदर्शन बहुत उम्दा और मिड तथा स्मॉल-कैप फंडों का प्रदर्शन औसत रह सकता है, लेकिन यह देखकर मिड और स्मॉल-कैप फंडों से रकम निकालकर लार्ज-कैप में न लगा दें। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव समझाते हैं, 'अलग-अलग श्रेणियां अलग-अलग वर्षों में अच्छा प्रदर्शन करती हैं। समझदारी ऐसा विविधता भरा पोर्टफोलियो बनाने में है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के फंड शामिल हों। इससे आपको अच्छा प्रतिफल मिलेगा, भले ही किसी वर्ष में कोई भी श्रेणी अच्छा प्रदर्शन करे।' पिछले साल के सबसे अच्छे फंड के पीछे भागेंगे तो उस श्रेणी से बाहर निकल सकते हैं, जिसके अच्छे प्रदर्शन का दौर शुरू होने जा रहा है। शानदार प्रतिफल दिलाने वाला फंड प्रबंधक कंपनी छोड़ दे तो पिछले प्रदर्शन का ज्यादा मतलब नहीं रह जाता है। किसी फंड को तभी अच्छा कहा जा सकता है जब फंड प्रबंधक ने गिरावट के जोखिम पर अंकुश लगाने में महारत दिखाई हो। 

जोखिम की न करें अनदेखी
इस पर भी ध्यान दें कि फंड में कितना जोखिम है। किसी फंड की उसके जैसे फंडों से तुलना करने पर पता चलता है कि उसमें ज्यादा या कम जोखिम है। फंड के बीते वर्षों के उतार-चढ़ाव से पता चल जाता है कि भविष्य में फंड में कितनी उठापटक रहेगी।
 आपका फंड लार्ज-कैप-मूल्य श्रेणी से संबंधित है तो इसमें स्मॉल-कैप, वृद्धि फंड की तुलना में कम उतार-चढ़ाव के आसार हैं। किसी एक क्षेत्र में अधिक निवेश से फंड जोखिम भरा हो जाता है। यही वजह है कि खुदरा निवेशकों को सेक्टर फंड में मामूली निवेश की सलाह दी जाती है। फंड के शीर्ष तीन या पांच क्षेत्रों में निवेश की उसके समान अन्य फंडों से तुलना पर आपको पता चलता है कि उसका किसी क्षेत्र में जरूरत से अधिक निवेश है। 

अधिक खर्च वाले फंडों से बचें
आखिर में लागत पर काफी ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी फंड का खर्च का अनुपात आपको बताता है कि यह महंगा है या सस्ता। जब बाजार अच्छा प्रदर्शन  करने लगते हैं तो फंड प्रबंधकों के लिए अपने बेंचमार्कों से बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे माहौल में कम लागत के फंड उन फंडों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे, जिनका लागत अनुपात अधिक है। खुदरा निवेशकों को लागत बचाने के लिए डायरेक्ट फंड चुनना चाहिए।
बिजनेस स्टैंडर्ड म्युचुअल फंड हो सटीक तो कमाई भी होगी ठीक

 

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