बिजनेस स्टैंडर्ड - कसौटी पर खरे उतरे सोना-चांदी
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कसौटी पर खरे उतरे सोना-चांदी

सुशील मिश्र /  03 03, 2020


वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक मंदी की चिंता के बीच निवेशक कम जोखिम वाले विकल्प सोने-चांदी पर खूब दांव लगा रहे हैं जिससे इनकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और आगे भी इनमें तेजी का रुख बना रह सकता है

देश और दुनिया में आर्थिक मंदी छाई हुई है, जिसका असर हर कारोबार पर दिख रहा है। मंदी की मार सोने-चांदी की मांग पर भी पड़ी है, हालांकि इन पर दांव लगाने वाले निवेशकों को निराश नहीं होना पड़ा। वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक मंदी से भरे दौर ने सोने की चमक में लगातार निखार लाने का काम किया। मंदी की चिंता के बीच निवेशकों ने सबसे कम जोखिम वाले विकल्प सोने-चांदी पर भरोसा किया, जिससे सोने की कीमतों ने
महंगाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। सोने के प्रति निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी की वजह से एक साल के अंदर इस कीमती धातु के भाव में करीब 24 फीसदी और पिछले छह महीने में 20 फीसदी का इजाफा हुआ।
इसी तरह का रुख चांदी में भी देखने को मिला। हालांकि इन दोनों कीमती धातुओं के लिए अगले छह महीने का समय अनिश्चितता वाला साबित हो सकता है, इसलिए सतर्कता के साथ निवेश करना ही समझदारी है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक टकराव, ब्रेक्जिट को लेकर चिंता, अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में गिरावट और वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीतियों में लचीलेपन व खरीदारी के कारण सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की खरीदारी हुई। इस वजह से घरेलू बाजार में सोने का भाव 40 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गया। अंतरराष्टï्रीय बाजार में सोना 1,575 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि मई 2019 तक यह 1,200 डॉलर प्रति औंस से नीचे कारोबार रहा था और घरेलू बाजार में इसकी कीमत 31 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थी। इस बीच सोने के साथ डॉलर इंडेक्स भी मजबूत हुआ, यानी रुपया और कमजोर हुआ जिसके कारण घरेलू बाजार में सोना महंगा होता चला गया, जबकि आमतौर पर डॉलर मजबूत होता है तो सोना सस्ता होता है। वर्तमान अर्थव्यवस्था को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होगा, जिसका प्रभाव सोने की कीमतों पर पड़ेगा।
सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से घरेलू मांग में थोड़ी गिरावट आई। देश में सोने की शुद्ध मांग 598 टन से गिरकर वर्ष 2019 में 545 टन रह गई। देश में सोने की कुल खपत 853.1 टन से फिसलकर 777.4 टन रह गई, जो 2020 में 700 से 750 टन रह जाने का अनुमान है। सोने की मांग में गिरावट सिर्फ  भारत में नहीं बल्कि दुनिया भर में आई है। इसकी प्रमुख वजह कीमतों में भारी बढ़ोतरी को माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 2020 में दोबारा आसान मौद्रिक नीति पर रोक लग सकती है। सोने की कीमतें ऊंची ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होती हैं क्योंकि ऊंची ब्याज दरों से डॉलर मजबूत होता है, जिससे अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना अधिक मंहगा हो जाता है। घरेलू स्तर पर सोने की कीमतें 45,000 से 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने
का अनुमान लगाया जा रहा है। मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन कहते हैं कि वैश्विक हालात को देखकर लग रहा है कि अगले छह महीने में सोना 1,900 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है और घरेलू बाजार में इस साल दीवाली पर सोना 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।  घरेलू बाजार में ज्वैलर्स एक तरफ तो कारोबार फीका होने की बात कह रहे हैं तो दूसरी तरफ कीमतें बढऩे का अंदेशा जता रहे हैं। दरअसल, इस समय लोग हल्के वजन वाले आभूषण पर जोर दे रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि जो लोग सोने में निवेश करना चाह रहे हैं, उनके लिए क्या यह सही समय है? इस पर बुलियन कारोबारी रमन सोलंकी कहते हैं कि सोने का इतिहास उठाकर देख लें, सोने ने अपने निवेशकों को कभी निराश नहीं किया है। सच तो यह है कि सोने से बेहतर प्रतिफल किसी ने नहीं दिया है। मौजूदा समय में सोना बहुत मंहगा है, इसलिए छोटे निवेशकों को कम समय के लिए निवेश करना चाहिए और जोखिम मोल न लेते हुए फायदा लेकर हट जाना चाहिए। सोलंकी के मुताबिक मौजूदा माहौल ऐसा है कि वैश्विक गतिविधियां कीमतों को किसी भी तरफ मोड़ सकती हैं। फिलहाल तीन महीने तो गिरावट नहीं दिख रही है लेकिन मई के बाद कीमतों में नरमी आ सकती है क्योंकि तब तक अमेरिका-चीन और सऊदी अरब की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। ऐसा हुआ तो सोने की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।
सोने में निवेश के लिए इस समय वायदा बाजार एक उपयुक्त मंच माना जा रहा है। एमसीएक्स के सराफा प्रमुख शिवांशु मेहता कहते हैं कि पिछले छह महीने में छोटे निवेशकों की संख्या और मात्रा, दोनों में बढ़ोतरी हुई है। छोटे निवेशक भी सोना वायदा का फायदा उठा सकें, इसलिए एक्सचेंज में एक ग्राम के अनुबंध शुरू किए गए हैं। नियामक के नियमों का हवाला देते हुए मेहता कहते हैं कि हम कीमतों पर बात नहीं कर सकते हैं लेकिन जोखिम कम करने के लिए वायदा बाजार में हेजिंग बेहतरीन हथियार है। जोखिम कम होने के साथ साथ, दूसरे जगह की अपेक्षा यहां निवेश का खर्च भी कम है, यानी वायदा कारोबार में निवेशकों को जोखिम कम और फ ायदा ज्यादा होता है।
सराफा कारोबार पर नजर रखने वाली जिंस एजेंसियां इस साल निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। वर्ष 2020 में डॉलर में बदलाव, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, निवेश और भौतिक मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, इक्विटी बाजार के प्रदर्शन और वैश्विक राजनीतिक तनाव जैसे विभिन्न कारकों से सोने की कीमतों की दिशा तय होगी। इस बीच वैश्विक आर्थिक विकास के कारण जोखिम लेने की क्षमता में वृद्घि, फेडरल रिजर्व के कम हस्तक्षेप और उपभोक्ता की ओर मांग कम होने से सोने की कीमतों की बढ़त पर रोक लग सकती है। अमेरिका की आंतरिक गतिविधियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। नवंबर 2020 में अमेरिकी राष्टï्रपति चुनाव होने वाले हैं। इस चुनावी साल में वित्तीय बाजारों में ज्यादा अस्थिरता देखी जा सकती है, जो सोने की कीमतों में बदलाव को प्रभावित कर सकती है। ईटीएफ जैसी निवेश मांग में तेजी आने से 2020 में सोने की कीमतों को मदद मिल सकती है, क्योंकि 2019 में एसपीडीआर गोल्ड ईटीएफ की हिस्सेदारी 730 टन के मुकाबले करीब 900 टन पहुंच गई थी।
चांदी की कीमतों में भी तेजी आई है। देश के प्रमुख चांदी कारोबारी राहुल मेहता कहते हैं कि कम पूंजी वाले या सोने में निवेश नहीं कर पा रहे लोगों के लिए चांदी बेहतरीन विकल्प है। देश और दुनिया में छाई औद्योगिक मंदी के बावजूद चांदी की मांग और कीमतों में इजाफा होने की सबसे बड़ी वजह इसकी निवेश मांग में वृद्घि होना है। साल दर साल चांदी का उत्पादन कम होने के कारण इसकी आपूर्ति में कमी आई है जबकि औद्योगिक मांग बढ़ रही है। बुलियन कारोबारियों की मानें तो इस साल चांदी 65,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। अगले छह महीने में चांदी निवेशकों के लिए कितनी सुरक्षित है, इसके जवाब में एसएमसी कमोडिटी का कहना है कि जहां तक कीमतों में बदलाव का संबंध है, चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है क्योंकि अपनी दोहरी प्रकृति के कारण चांदी की कीमतें मूल धातुओं की कीमतों में बदलाव से भी प्रभावित होती हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव 2020 में भी चांदी की कीमतों को प्रभावित करता रहेगा। मध्यावधि में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार के अनुमान में बदलाव से अमेरिकी डॉलर और इस कारण चांदी की कीमतों की दिशा तय होगी।
अंतरराष्टï्रीय बाजार में सोना छह साल के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए सराफा  कारोबारियों को उम्मीद थी कि सरकार बजट में सोने के आयात शुल्क में कटौती करेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि सरकार सोने का आयात नहीं बल्कि निर्यात बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार अगले पांच साल में आभूषणों का निर्यात 80 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अभी यह 40 अरब डॉलर है। वाणिज्य मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार रूपा दत्ता के मुताबिक केंद्र को आभूषण उद्योग से 20 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख लोग काम करते हैं। आभूषण निर्यात अगले पांच साल में 80 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2018-19 में देश ने 40 अरब डॉलर के आभूषणों का निर्यात किया था। हालांकि वैश्विक स्तर पर मंदी के कारण आभूषण निर्यात वृद्घि की रफ्तार धीमी पड़ी है। 

ग्राहकों के लिए फायदेमंद होंगे नए नियम 
सोने-चांदी के आभूषणों में वर्षों से चल रही धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार गंभीर रही है। इसलिए सरकार आभूषणों की बिक्री पर हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की कवायद शुरू कर चुकी है। कीमती धातुओं के कारोबार में कालेधन का जमकर इस्तेमाल होता रहा है, यह बात जग जाहिर है। सरकार इस पर भी नकेल लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार आने वाले समय में सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी पर स्थायी खाता संख्या (पैन नंबर) की जगह आधार क्रमांक को अनिवार्य कर सकती है। सरकार के ये कदम आभूषण कारोबार में पारदर्शिता लाने में सफल हो सकते हैं, लेकिन इससे गहनों की बिक्री और सराफों का कारोबार प्रभावित जरूर होगा।

नकली आभूषणों पर हॉलमार्किंग की नकेल
सोने के आभूषणों में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने सराफों के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश भर में 15 जनवरी, 2021 से सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि उसके बाद कोई भी सराफ बिना हॉलमार्किंग के सोने के आभूषण नहीं बेच पाएगा। धातुओं की पहचान के लिए हॉलमार्किंग दुनिया भर में सबसे प्रामाणिक और सटीक तरीका माना जाता है। इसे सोने के आभूषणों में सोने की मात्रा की गारंटी माना जाता है और इससे असली और नकली सोने के आभूषणों की पहचान करना आसान हो जाता है।
भारत में हॉलमार्किंग की जिम्मेदारी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पास है। हॉलमार्किंग वाले सोने के आभूषणों पर कैरट में सोने की शुद्धता, बीआईएस का निशान, शुद्धता मापने वाले केंद्र का नाम और आभूषण बेचने वाली दुकान का निशान अंकित होता है। हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद केवल तीन ग्रेडों यानी 14, 18 और 22 कैरट सोने के आभूषण ही बाजाार में बिकेंगे। अभी तक कुल 10 ग्रेड में सोने के आभूषणों की बिक्री होती है। सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई आभूषण निर्माता या विक्रेता 15 जनवरी 2021 के बाद बिना हॉलमार्किंग के सोना बेचेगा तो उसे 1 साल की जेल की सजा या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों हो सकते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के तहत केंद्र सरकार को सोने की हॉलमार्किंग जरूरी बनाने का अधिकार दिया गया था। सरकार के फैसले के अनुसार अब देश भर में सोने के आभूषण बेचने वाले सराफों को इन्हें बीआईएस से पंजीकृत कराना होगा। इस पंजीकरण के बाद सराफ केवल बीआईएस प्रमाणित केंद्र से ही सोने की शुद्धता की जांच करवा पाएंगे और आभूषण विनिर्माता हॉलमार्क वाले आभूषण ही बेच पाएंगे। फैसले की एक बड़ी बात यह है कि सोने की कलाकृतियों पर भी यह नियम लागू होगा। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्टï किया है कि घर या बैंकों में रखे सोने की हॉलमार्किंग अभी अनिवार्य नहीं की गई है, लेकिन बीआईएस से लोगों को अपने सोने की हॉलमार्किंग कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद उस सोने की कीमत बनी रहे।
फिलहाल, भारत में सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था तो है, लेकिन उसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है। अगर चाहे तो सोने के आभूषणों का कोई निर्माता भारतीय मानक ब्यूरो से अपने उत्पाद के लिए हॉलमार्किंग का अधिकार ले सकता है। मौजूदा समय में देश में केवल 40 फीसदी सोने की ही हॉलमार्किंग की जाती है। अनिवार्यता न होने और हॉलमार्किंग केंद्रों के अभाव की वजह से देश के महज 28,849 जौहरियों ने ही बीआईएस से पंजीकरण कराया है, जबकि देश में सराफों की संख्या चार लाख के आसपास बताई जा रही है।
देश के 234 जिलों में ऐसे 892 केंद्र हैं जहां सोने की हॉलमार्किंग की जाती है। भारत में वर्ष 2000 से ही सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सका था लेकिन 15 जनवरी, 2021 से सोने की हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी।

पैन के बदले आधार हो सकता है अनिवार्य
सरकार मानती है कि सोने के कारोबार में बड़े पैमाने पर काला धन लगा है। इस पर लगाम लगाने के लिए ही सोना-चांदी की खरीदारी पर स्थायी खाता संख्या (पैन) जरूरी किया गया है। इसके अलावा सोने-चांदी की खरीद को आधार के साथ
जोडऩे की कवायद भी शुरू की गई है। हालांकि यह योजना अभी सामने नहीं आई है लेकिन अभी से सराफों में बेचैनी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सरकार का यह कदम आम आदमी की परेशानी बढ़ाने वाला होगा।
काले धन पर लगाम कसने के लिए सरकार जल्द ही सोने-चांदी की बड़ी खरीदारी के लिए पैन  नंबर के बजाय आधार क्रमांक को अनिवार्य बना सकती है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार हो रहा है। वित्त मंत्रालय कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें आधार या अन्य पहचान के दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पैन नंबर के स्थान पर आधार क्रमांक को प्राथमिकता दी जा रही है। नवंबर 2016 में नोटबंदी और जुलाई 2017 में वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद सरकार सभी वाणिज्यिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है। इसके बावजूद वाणिज्यिक गतिविधियों के संबंध में लागू नियमों की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में कई आभूषण सौदों में पैन नंबर के गलत इस्तेमाल के बाद ऐसे सौदों के लिए आधार क्रमांक को ओटीपी सत्यापन के साथ अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
काले धन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अगस्त 2017 में 50 हजार रुपये से ज्यादा के गहनों की खरीद को पीएमएलए ऐक्ट दायरे में शामिल किया था। लेकिन तकनीकी कारणों से इसे खत्म कर दिया गया। मौजूदा समय में दो लाख रुपये से ज्यादा की सोना-चांदी खरीद के लिए पैन नंबर देना अनिवार्य है। हालांकि सराफ लंबे समय से इस सीमा का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए। सराफ मानते हैं कि यदि यह नया नियम लागू किया गया तो इससे आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
बिजनेस स्टैंडर्ड कसौटी पर खरे उतरे सोना-चांदी

 

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