बिजनेस स्टैंडर्ड - घर खरीदने वालों का ही बाजार निवेशकों को करना होगा इंतजार
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घर खरीदने वालों का ही बाजार निवेशकों को करना होगा इंतजार

ऋषभ कृष्ण सक्सेना /  03 03, 2020

पिछले एक दशक में भारत में जिन क्षेत्रों ने सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव झेले हैं, उनमें रियल एस्टेट बहुत आगे है। निवेशकों की भरमार के कारण किसी समय तूफान की तरह भाग रहे इस उद्योग की रफ्तार पर पहला ब्रेक वैश्विक मंदी का लगा। उस थपेड़े से उबरता तब तक नोटबंदी और रियल एस्टेट नियामकीय प्राधिकरण (रेरा) कानून ने इसकी चूलें हिला दीं। यही वजह है कि पिछले पांच-छह वर्षों में कई परियोजनाएं अटक गईं और कई छोटी कंपनियों को कारोबार से किनारा करना पड़ा।
दिलचस्प है कि नोटबंदी और रेरा की वजह से ही यह उद्योग एक बार फिर अच्छे दिनों की उम्मीद करता दिख रहा है। उद्योग में काले धन की आवक एकदम बंद हो जाने और ग्राहकों में रेरा के कारण समय पर परियोजनाएं पूरी होने का भरोसा जगने के कारण बिक्री फिर तेज हो हो रही है, जिस कारण अनबिके मकानों का ढेर घटने की उम्मीद जग गई है। सलाहकार फर्म लायसेस फोरास के आंकड़े भी बताते हैं कि कम से कम आवासीय रियल एस्टेट बाजार निखरने लगा है। फर्म की रिपोर्ट बताती है कि सितंबर-दिसंबर 2019 में भारत के शीर्ष 35 शहरों में बिक्री साल भर पहले की तुलना में करीब 3 फीसदी बढ़ी और जुलाई-सितंबर तिमाही के मुकाबले इसमें 5 फीसदी इजाफा हुआ। इनमें महानगर और छोटे शहर भी शामिल हैं।
डेवलपर और रियल्टी उद्योग की संस्थाएं भी कारोबार को करवट लेता देख रही हैं। क्रेडाई के राष्टï्रीय चेयरमैन जक्सय शाह को लगता है कि किफायती मकानों पर सरकार के जोर के कारण आशियाना तलाशने वालों को तो फायदा होगा ही, मांग बढऩे पर निवेशकों को भी अच्छा प्रतिफल मिल जाएगा। इस तरह रियल एस्टेट में एक बार फिर उन निवेशकों की वापसी का रास्ता भी खुल सकता है, जो कीमतें गिरने और नोटबंदी होने के बाद गायब हो गए थे। किफायती मकानों के बारे में शाह के अनुमान को लायसेस फोरास की रिपोर्ट भी सही साबित करती है। रिपोर्ट बताती है कि दिसंबर में बिके कुल फ्लैटों में 58 फीसदी से अधिक 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले फ्लैट थे। उस दौरान आरंभ हुई नई परियोजनाओं में भी 66 फीसदी हिस्सेदारी इसी श्रेणी की रही।
तो क्या रियल एस्टेट के बुरे दिन पूरी तरह गुजर चुके हैं? एक बार फिर बाजार गुलजार होने को है? विशेषज्ञ और डेवलपर बुरा दौर पूरी तरह बीतने की बात कहने से तो परहेज कर रहे हैं क्योंकि तैयार मकानों का भंडार पूरी तरह खत्म होने के बाद ही उद्योग असल में तेजी पकड़ेगा। उद्योग भागीदारों का कहना है कि अभी करीब 10 लाख करोड़ रुपये के तैयार मकान बिना बिके पड़े हैं, जिन्हें बिकने में डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। इस लिहाज से 2021 के अंत तक रियल एस्टेट मजबूत होने की उम्मीद नजर आ रही है। लेकिन पहले जैसी अनाप-शनाप कीमतों का दौर नहीं लौटेगा और न ही निवेशकों को झटपट मोटा प्रतिफल मिलेगा। बेशक एक समय साल-छह महीने के भीतर मकानों से 50 फीसदी तक प्रतिफल लेकर निवेशक वारे-न्यारे कर रहे थे। लेकिन उद्योग जानकारों की मानें तो अब रियल्टी बाजार लंबे अरसे के लिए निवेश करने वालों का ही बाजार है। रियल्टी कंपनियों के संगठन नारेडको के वाइस चेयरमैन और ट्यूलिप इन्फ्राटेक के सीएमडी प्रवीण जैन के अनुसार कम से कम 2-3 वर्ष के लिए निवेश करने वाले 15 से 18 फीसदी प्रतिफल की उम्मीद लगा सकते हैं।
बहरहाल इस बात पर सभी सहमत हैं कि बुनियादी दिक्कतें अब दूर होने लगी हैं। रिजर्व बैंक की पहल से आवास ऋण सस्ता हो गया है। भारतीय स्टेट बैंक ने इस वर्ष जनवरी से बेंचमार्क उधारी दर केवल 7.8 फीसदी कर दी और नए आवास ऋण पर केवल 7.9 फीसदी की दर से ब्याज वसूलना शुरू कर दिया। कई अन्य बैंकों ने भी कर्ज सस्ता कर दिया है, जिसका फायदा रियल्टी की बिक्री में नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी ने भी लोगों को अपना मकान खरीदने का हौसला दिया है, जिस कारण किफायती मकानों के निर्माण और बिक्री दोनों में तेजी आई है।
मगर अटकी परियोजनाएं अभी तक परेशानी का सबब हैं। सरकार ने कुछ अरसा पहले रियल्टी के लिए एक कोष बनाने का ऐलान किया था, जो अटकी परियोजनाओं के लिए धन देने के काम आएगा। लेकिन अभी इस दिशा में ठोस काम नहीं दिख रहा है। कई डेवलपर उस कोष को अमली जामा पहनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं ताकि अटकी परियोजनाएं चालू हो सकें और रियल्टी की गाड़ी एक बार फिर रफ्तार पकड़ सके।
इस बीच वाणिज्यिक संपत्तियों का बाजार लगभग ठहरा हुआ ही है। बड़े सौदे तो हो रहे हैं, लेकिन छोटे और मझोले शहरों में किराये बहुत अधिक होने और मंदी का दौर होने के कारण बड़ी संख्या में दुकानें और दफ्तर खाली दिख रहे हैं। ऐसे में जानकार भी निवेशकों को इस श्रेणी में रकम लगाने की सलाह देने से बच रहे हैं और यह अंदाजा भी नहीं लगा रहे हैं कि हालात कब तक सुधरेंगे।
बिजनेस स्टैंडर्ड घर खरीदने वालों का ही बाजार निवेशकों को करना होगा इंतजार

 

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