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तैयार मकानों के अंबार ने किया रियल्टी को बीमार

रामवीर सिंह गुर्जर /  03 03, 2020


अगर आप दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट में आ रहे सुधार की खबरें सुनकर अच्छे रिटर्न की उम्मीद में यहां की परियोजनाओं में निवेश करना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए इंतजार करना होगा। सुधार के बावजूद छोटी अवधि में बहुत कम रिटर्न की गुंजाइश है। हालांकि निवेश लंबी अवधि के लिए किया जाए तो अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
निवेशकों के लिए रियल एस्टेट उद्योग पैसा बनाने का पसंदीदा क्षेत्र रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों से देश के साथ ही दिल्ली-एनसीआर का रियल एस्टेट उद्योग बुरे दौर से गुजर रहा है और इसने निवेशकों को भी निराश किया है। हालांकि पिछले साल आवासीय क्षेत्र में सुधार देखा गया। इस साल भी रियल एस्टेट जानकारों को सुधार की उम्मीद है। यह सुधार वास्तविक उपयोग के लिए घर खरीदारों की ओर से बढ़ रही मांग के कारण हो रहा है। मांग में इस इजाफे के बावजूद ऐसी स्थिति अब भी नहीं बनी है कि निवेशक अच्छे रिटर्न की उम्मीद में घर खरीद सकें। रियल एस्टेट जानकारों की माने तो अगले एक दो साल में खुद उपयोग के लिए घरों की मांग तो बढ़ सकती है। लेकिन निवेश के लिए खरीदे गए घर पर बेहतर रिटर्न मिलने में अभी लंबा इंतजार करना होगा। एक से दो साल में एफडी जितना भी रिटर्न मिलने की उम्मीद नहीं है। निवेशकों को अच्छे रिटर्न के लिए 3 से 5 साल इंतजार करना होगा।
रियल एस्टेट सलाहकार फर्म नाइट फै्रंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक (उत्तर) मुदस्सिर जैदी कहते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले साल आवासीय परियोजनाओं में घरों की बिक्री 5 फीसदी बढऩे से इस साल भी सुधार के संकेत हैं, जो बुरे दौर से गुजर रहे रियल एस्टेट उद्योग के लिए राहत की बात है। जहां तक निवेश के लिहाज से घर खरीदने का सवाल है तो अभी छोटी अवधि में इस लायक माहौल नहीं है। इस समय 80 से 85 फीसदी तुरंत उपयोग के लिए घर खरीद रहे हैं। 2009-11 के दौरान 60 फीसदी निवेशक थे। निवेश के लिए घर खरीदने पर 20-25 फीसदी रिटर्न अच्छा माना जाता है। नोएडा एक्सटेंशन, राजनगर एक्सटेंशन विकसित होने के शुुरूआती दौर में इन क्षेत्रों में निवेश पर दोगुना भी रिटर्न देखा गया है। लेकिन बीते कुछ सालों से घरों के दाम बहुत ज्यादा नहीं बढ़े हैं और अब घरों की मांग में आ रहे सुधार से अगले एक से दो साल में 3-4 फीसदी रिटर्न मिलने की उम्मीद है क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में अनबिके घरों का काफी दबाव है। इनके निकलने में ही डेढ़ से दो साल लग जाएंगे। अगर निवेश कर्ज लेकर किया गया है तो छोटी अवधि में लाभ के बजाय नुकसान ही होगा। खुद के बचत के पैसे से निवेश पर भी रिटर्न एफडी से कम या बराबर मिलेगा। जैदी के अनुसार निवेश के लिहाज से घर खरीदने पर अच्छे रिटर्न के लिए 3 से 5 साल का इंतजार करना होगा। अभी जो निवेश के लिए घर खरीद रहे हैं, उनमें ऐसे निवेशकों की तादाद ज्यादा है जो 3-4 साल बाद उक्त घर में रहने की सोच रहे हैं।  जैदी कहते हैं कि जिन लोगों को 2009 से 2011 के दौरान खरीदे गए घर का कब्जा मिल चुका है, उन्हें इस घरों को किराये पर चढ़ाने पर भी अच्छी आमदनी हो रही है और इन्हें लंबी अवधि में बेचने पर काफी अच्छा रिटर्न भी मिल सकता है। एनारॉक प्रॉपर्टीज कंसल्टेंट के उपाध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि अब घरों की मांग में वृद्घि होने के आसार नजर आ रहे हैं। लेकिन अगले एक से डेढ़ साल में कुछ परियोजनाओं में ही 6 से 7 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए स्थिति बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं दिख रही है। करीब 80 लाख रुपये की कीमत में घर खरीदने की सोचने वालों के लिए नोएडा व राजनगर एक्स्टेंशन, सोनीपत और नोएडा एक्सप्रेसवे अच्छे इलाके हैं। 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की कीमत के मकान चाहने वालों के लिए द्वारका, गुरुग्राम और मध्य नोएडा बेहतर रहेंगे। वर्ष 2019 में पेश की गई 35,300 इकाइयों में से 25,670 मकान 80 लाख रुपये से कम कीमत के थे।
रियल्टी कंपनी एबीए कॉर्प के निदेशक और क्रेडाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अमित मोदी ने बताया कि इस वक्त रियल एस्टेट क्षेत्र सुधार की राह पर है। ऐसे में लंबी अवधि के लिए निवेश करना अच्छा विकल्प है और नई परियोजनाओं में निवेश करने पर 4-5 साल के भीतर अच्छा रिटर्न मिल सकता है। किफायती आवासीय परियोजनाओं में ज्यादा मांग को देखते हुए डेढ साल के अंदर भी सकारात्मक रिटर्न मिल सकता है। मोदी कहते हैं कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट, जेवर, राजनगर, द्वारका और गुरुग्राम इस वक्त निवेश के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में अच्छी लोकेशन सबसे अहम भूमिका निभाती है। किफायती और लक्जरी दोनों ही सेगमेंट में इन क्षेत्रों के अंदर विकल्प मौजूद भी है। किफायती श्रेणी में 45 लाख रुपये कीमत में घर खरीदने पर लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिल सकता है। इस कीमत में इलाके के हिसाब से 800 से 1,200 वर्ग फुट के मकान आसानी से मिल सकते हैं। कुछ वर्ष पहले तक आवासीय परियोजनाओं में लंबी व छोटी अवधि के लिए निवेश अच्छा निवेश माना जाता था मगर फिलहाल ज्यादातर निवेशकों का रुख व्यावसायिक संपत्ति की तरफ है। लेकिन आने वाले 2 से 3 साल के अंदर निवेशक आवासीय परियोजनाओं की तरफ  वापस आते हुए नजर आएंगे। करीब 20 से 25 फीसदी  निवेशकों के वापस आने का अनुमान है।
रियल एस्टेट संगठन नारेडको के वाइस चेयरमैन और ट्यूलिप समूह के सीएमडी प्रवीण जैन ने कहा सरकार द्वारा बीते एक साल में उठाए जा रहे सुधारों के कदमों का असर अब अर्थव्यवस्था के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट क्षेत्र पर ही पड़ता दिख रहा है। विभिन्न आवास परियोजनाओं में ग्राहकों की पूछताछ बढऩे लगी है और घरों की कीमतों में भी एक ठहराव आता दिख रहा है। कुछ क्षेत्रों में कीमतें बढऩा भी शुरू हो चुकी हैं। बीते पांच साल से दिल्ली-एनसीआर में आवासीय क्षेत्र ने काफी मंदी देखी है। निवेश के लिए घर खरीदने वाले निवेशक भी पहले से अधिक सक्रिय दिख रहे हैं जो कि इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि घरों की कीमतें बढऩे वाली हैं। अभी घर खरीदते हैं तो अगले एक से दो साल में निवेश पर अच्छा निवेश प्राप्त कर सकते हैं। नया किराया कानून आने के बाद अब किरायेदारों से डरने का दौर खत्म हो चुका है। दिल्ली-एनसीआर में किसी भी आवासीय परियोजना में किए गए निवेश पर 6 से 8 फीसदी रिटर्न किराये से प्राप्त किया जा सकता है। विभिन्न सर्वे रिपोर्ट के अनुसार आवासीय परियोजनाओं में शुरूआत में 30 से 35 फीसदी घरों की बुकिंग निवेशकों द्वारा की जाती है और इस समय उन्होंने निवेश करना शुरू कर दिया है। अनबिके मकान भी कम हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में कीमतों में उछाल आना भी तय है।
प्रॉप इक्विटी के संस्थापक व एमडी समीर जसूजा कहते हैं कि अगर आप निवेश के माध्यम से अच्छा रिटर्न चाहते हैं कि तो आपको कीमतों में वृद्घि के लिए 2 से 3 साल का इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि रुकी हुई परियोजनाओं में अभी समय लगेगा। अभी संपत्ति की कीमतें बढऩे में दो साल का समय लगेगा। हालांकि अगर आपको रेडी टू मूव मकान में जाना है तो नोएडा एक्सप्रेसवे, गुरुग्राम, गॉल्फ  कोर्स जैसे विकल्प बेहतर साबित हो सकते हैं। ठ्ठ



'अनबिके मकानों का अंबार घटेगा तो रियल्टी का सूरज चमकेगा'


रियल्टी उद्योग के संगठन क्रेडाई के चेयरमैन जक्सय शाह को बाजार से बहुत उम्मीद हैं। उन्हें लगता है कि किफायती मकानों का ढेर छंटने से उद्योग भी सुधरेगा। शाह ने ऋषभ कृष्ण सक्सेना से कहा कि सरकार ग्राहकों को अधिक प्रोत्साहन दे और बैंक आवास ऋण ज्यादा सस्ता कर दें तो रियल एस्टेट का बाजार एक बार फिर चमक जाएगा। प्रमुख अंश:

रियल्टी बाजार की तस्वीर कैसी दिख रही है?
इस वक्त पहले बने मकान कम हो रहे हैं। रेरा लागू होने के बाद नई परियोजनाओं की संख्या घट गई है। अनबिके मकानों में ज्यादातर किफायती श्रेणी के हैं। अब तो मांग ज्यादा है आपूर्ति कम। युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में दूसरे शहर जा रही है, जिससे को-लिविंग को बढ़ावा मिलेगा। सरकार सस्ते मकानों पर जोर दे रही है। इसलिए किफायती मकानों की मांग ही बढ़ रही है, जहां निवेश करने पर अच्छा प्रतिफल मिल सकता है।

बजट में रियल्टी के लिए कुछ खास दिखा?
बजट ठीक था मगर रियल एस्टेट के लिए इसमें कुछ नहीं था। अगर बजट प्रस्तावों की वजह से जीडीपी वृद्घि दर 5 से बढ़कर 6.5 फीसदी तक पहुंच जाती है और लोगों की आय में भी इजाफा होता है तो उद्योग को फायदा होगा। हालांकि बजट में कर संबंधी बदलावों से खरीदारों के हाथ में मकान खरीदने के लिए ज्यादा पैसा आ जाएगा। बजट में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश पर 100 फीसदी कर छूट दी गई है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में भी निवेश आएगा।

रियल्टी बाजार में निवेशकों के लिए भी कोई गुंजाइश है?
बाजार निवेशकों के लिए एकदम तैयार तो नहीं कहा जा सकता। लेकिन नई बन रही परियोजनाओं में पैसा लगाने का हौसला खरीदारों में लौट रहा है। रेरा के कारण शिकायतें कम हुई हैं और निवेशक खुश तथा निवेश के लिए तैयार दिख रहे हैं।

अगले एक साल में बाजार कैसा रहेगा?
कैलेंडर वर्ष के मध्य में बाजार सुधर सकता है। सबसे पहले 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनबिके मकान बेचने होंगे। ग्राहकों को नए और अधिक प्रोत्साहन देने होंगे, निवेशक को भी किराये से होने वाली आय पर छूट देनी होगी। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से भी ब्याज दरों में कमी आएगी और सस्ते कर्ज के कारण आवासीय रियल्टी में तेजी आएगी।
बिजनेस स्टैंडर्ड तैयार मकानों के अंबार ने किया रियल्टी को बीमार

 

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