बिजनेस स्टैंडर्ड - दिल्ली हिंसा: कितना हुआ नुकसान
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दिल्ली हिंसा: कितना हुआ नुकसान

शुभायन चक्रवर्ती, शाइन जैकब और अरूप रायचौधरी /  03 02, 2020

दंगे की आग

बिजनेस स्टैंडर्ड दिल्ली हिंसा: कितना हुआ नुकसानजब दुकानों को आग लगाई जा रही थी तो अशोक शर्मा को पता था कि वह अपनी दुकान को बचाने के लिए बहुत कुछ नहीं कर सकते। शर्मा की पेंट एवं हार्डवेयर की दुकान थी। पेंट काफी ज्वलनशील होता है। जौहरी एनक्लेव मेट्रो स्टेशन की ओर से करावल नगर में प्रवेश करने पर जौहरीपुर रोड के किनारे बाजार में उनकी दुकान सबसे बड़ी थी। सामने दुकान थी और उसके पीछे गोदाम जिसे शर्मा अपने भतीजे मुकेश के साथ मिलकर चलाते थे। उनकी दुकान और गोदाम दोनों पूरी तरह आगजनी की चपेट में आ गए। 

आगजनी से पूरी तरह तहस-नहस हुई दुकान में हम टूटे हुए शटर से झांक रहे थे तो शर्मा ने कहा, 'हमारी दुकान और गोदाम में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये मूल्य के पेंट, घरेलू इलेक्ट्रिक उपकरण और सैनिटेरी हार्डवेयर एवं फिटिंग के सामान रखे हुए थे।' पेंट के डिब्बे, बाथरूम फिटिंग, पाइप आदि सबकुछ पिघले हुए दिख रहे थे। 

नगर निगम के कर्मचारी बुल्डोजर और ट्रैक्टर के जरिये सड़कों से मलबा साफ कर रहे थे। करावल नगर किसी युद्ध क्षेत्र की तरह दिख रहा है। कभी कार और मोटरसाइकिलों की भीड़भाड़ वाली उस सड़क पर ईंट, पत्थर, बोतल, कचरा, जले हुए भूसे आदि बिखड़े पड़े थे। अधिकतर मकान और दुकान जला दिए गए और उनमें से कुछ से धुआं अब भी निकल रहा था। चारों ओर मौत और निराशा का मंजर दिख रहा था। इस हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित हुए लोग प्रशासन को पूरी तरह विफल बता रहे थे।

उत्तर पूर्व दिल्ली के कारोबारी संगठन इस दंगे के कारण हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। दिल्ली चैम्बर ऑफ कॉमर्स का मानना है कि करीब 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है क्योंकि मुख्य सड़क के किनारे मौजूद तमाम शोरूम को आग के हवाले कर दिया गया। थोक माल से भरे कई गोदामों में लूटपाट की गई और छोटी फैक्टरियों के भीतर तोडफ़ोड़ की गई।

शर्मा ने उत्तर प्रदेश के लोनी बॉर्डर से सटे उत्तर पूर्व दिल्ली के इस क्षेत्र में अपनी पूरी जिंदगी बिता दी और करीब 20 वर्ष पहले उन्होंने अपनी दुकान और गोदाम खोला था। शर्मा कहते हैं, 'यह मिलाजुला बाजार है। कोई दुकान हिंदू की है तो कोई मुसलमान की। कभी कोई समस्या नहीं हुई। यहां तक कि 1984 और 1992-93 में भी सबकुछ शांत रहा।हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा।'

बिजनेस स्टैंडर्ड ने करावल नगर, भजनपुरा और चांदबाग में दर्जनों दुकानदारों और गोकुलपुरी टायर बाजार एसोसिएशन (टायर बाजार में करीब 80 दुकानें जला दी गईं) के सदस्यों से बातचीत की। शर्मा उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्होंने अपने कारोबार का बीमा करा रखा था। उन्होंने कहा, 'हमारी दैनिक बिक्री आसानी से 10,000 रुपये से अधिक की हो जाती थी। अब सबकुछ खो गया। लेकिन हमें बताया गया है कि हम बीमा भुगतान के तौर पर करीब 40 लाख रुपये की उम्मीद कर सकते हैं।'

कुछ ही मीटर दूर अमित अग्रवाल अपने थोक कारोबार को हुए नुकसान का आकलन कर रहे थे। वह उस क्षेत्र के पान एवं सिगरेट दुकानदारों को पान मसाला, गुटखा, चिप्स, स्नैक्स एवं अन्य खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति करते थे। अग्रवाल ने कहा, 'मेरे बहीखाते भी दुकान के भीतर ही थे। अब मैं नहीं जानता कि किसका मुझ पर कितना बकाया है अथवा मेरा किसी पर कितना बकाया है।'

सुर्खियों से दूर

गली के अंतिम छोड़ पर अग्रवाल के चाचा का मकान है। उनके सभी किरायेदार मुसलमान हैं। करावल नगर मिलाजुला क्षेत्र है जहां स्पष्टï तौर पर कोई हिंदू अथवा मुसलमान इलाका नहीं है। वहां हिंसा शुरू होते ही अधिकतर निवासी भाग गए थे। कुछ लोग नुकसान का आकलन करने के लिए लौटे हैं। यहां तक कि पुलिस भी हाथ में रजिस्टर लिए गश्त लगा रही है और लोगों को हुए नुकसान के बारे में पूछताछ कर रही है। 

बहुत देर हो गई। लोगों की आम शिकायत है कि अन्य क्षेत्रों के विपरीत करावल नगर में सोमवार को हिंसा फैलने के करीब 36 घंटे बाद भी पुलिस अथवा मीडिया की कोई मौजूदगी नहीं दिखी। अग्रवाल के पड़ोसी गुलफाम पूर्वी दिल्ली के मंडावली में एक पिं्रटिंग प्रेस में काम करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह प्रशासन की पूरी तरह से विफलता है। बाहर कोई भी नहीं जानता कि इस क्षेत्र में आगजनी की गई।' गुलफाम दिहाड़ी पर काम करते हैं और फिलहाल उन्हें नहीं पता कि वह कब तक काम करने लायक हो जाएंगे। अग्रवाल की दुकान के बाद खाली प्लॉट में स्थानीय निवासियों के लिए पार्किंग की जगह है। वहां तमाम छोटी-बड़ी करीब 70 गाडिय़ां जली पड़ी थीं। ऐसे में केवल बीमा ही पर्याप्त नहीं होगी।

भजनपुरा मार्केट एसोसिएशन के महासचिव ज्ञानपाल ने कहा, 'भारतीय जीवन बीमा निगम और न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसी बीमा कंपनियों के दफ्तर बंद हैं और हमें लगता है कि वास्तविक नुकसान का आकलन करने वाले अधिकारियों को उत्तर पूर्व दिल्ली से आने वाले दावों पर कोई प्रतिक्रिया न देने का निर्देश दिया गया है।'

ज्ञानपाल के ही पास खड़े ताज मोहम्मद ने भी चुपचाप सिर हिला दिया। वह करीब एक सप्ताह पहले तक सिले-सिलाए कपड़ों के थोक कारोबारी थे। उन्होंने कहा, 'करीब 12 लाख रुपये के कपड़े स्वाहा हो गए जिनमें आगामी गर्मी के लिए नए कलेक्शन भी थे। पिछला साल कारोबार के लिहाज से हमारे लिए बहुत खराब रहा क्योंकि त्योहारी सीजन के दौरान कोई खरीदार नहीं था। लेकिन इस बार मुझे दमदार मुनाफे की उम्मीद थी क्योंकि चीन में कोरोनावायरस के फैलने से कपड़ों के दाम जल्द ही बढऩे वाले थे।'

अपराधियों का बोलबाला

उत्तर पूर्व दिल्ली में लोगों को एक अन्य डर सता रहा है। हिंसा के शिकार और चांदबाग मुख्य सड़क पर एक रेस्तरां चलाने वाले सैफुद्दीन अली ने कहा, 'दिल्ली के इस भाग में विभिन्न गैंगों द्वारा अपने इलाके में आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है। तस्करी और जबरन वसूली के अलावा छोटे कारोबारियों को उधारी देकर ब्याज वसूलना उनकी कमाई का मुख्य जरिया है।'

अली को अपनी छोटी-सी खानेपीने की दुकान में आठ प्रकार के बर्गर बेचने पर गर्व था। उन्होंने कहा, 'बैंकों ने मुझे ऋण देने से इनकार कर दिया और स्थानीय वित्तीय कंपनियों ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि मेरे जैसा छोटा कारोबार कब तक चलेगा। इसलिए कुर्सियां और दुकान के साजो-सामान खरीदने के लिए मेरे पास सूदखोरों के पास जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था।'

तमाम लोगों ने पुष्टिï की है कि कई कारोबारियों को एक महीने के भीतर ऋण चुकाने का नोटिस मिला है। दंगा शुरू होने के बाद से ही भजनपुरा और चांदबाग सुर्खियों में रहे हैं। छह लेन वाली सड़क से विभाजित इस क्षेत्र में एक ओर हिंदू बहुल आबादी है तो दूसरी ओर मुस्लिम बहुल। सड़क किनारे हिंसा के वीडियो वायरल हो चुके हैं जिसमें भजनपुरा की ओर इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप में लगाई गई आग भी शामिल है।

पेट्रोलियम खुदरा उद्योग के एक संगठन के अनुसार, कंपनी के स्वामित्व और डीलर द्वारा संचालित इस पेट्रोल पंप को आगजनी के कारण करीब 1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उस पेट्रोल पंप के सामने खड़े 90 वर्ष के अवतार सिंह ने कहा, 'मेरे जीवन में ऐसी एकमात्र घटना 1984 में हुई थी। लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, दुकानों में आगजनी की जा रही थी और देखिये, लोग इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें नहीं लगता कि पेट्रोल पंप में आगजनी से एक बड़ी आपदा हो सकती है।'

उस पेट्रोल पंप से कुछ ही सौ मीटर दूर वजीराबाद में एक रिलायंस फ्रेश स्टोर में पिछले मंगलवार को कर्मचारी और खरीदार दो दंगाई समूहों के बीच फंस गए। स्टोर के भीतर शरण लेने वाले राहगीरों सहित करीब 25 लोग लगभग 10 घंटे तक छिपे रहे। दो उन्मादी गुटों- एक भजनपुरा की तरफ से और दूसरा चांदबाग की ओर से- ने रिलायंस फ्रेश स्टोर के सामने वाली सड़क को दो दिनों के लिए युद्धक्षेत्र में बदल दिया। स्टोर के सामने खड़ी आठ बाइक जला दी गईं। इस आउटलेट में रोजाना लगभग 4 लाख रुपये का कारोबार होता था।

चांदबाग की ओर मोटरसाइकिल के कई शोरूम पूरी तरह अथवा आंशिक तौर पर जला गए थे। पुरानी मोटरसाइकिलों और स्कूटरों की बिक्री करने वाली क्रेडरट्रू बाइक्स के कर्मचारी रवीश कुमार ने कहा, 'इस आगजनी से एक बाइक को करीब 60 बाइकों का नुकसान हुआ। पास के ही सुजूकी बाइक शोरूम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया और इस क्षेत्र में कम से कम तीन महीने तक कोई कारोबार नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि यह शोरूम हर महीने लगभग 60 लाख रुपये का कारोबार करता है। एक फल विक्रेता मोहम्मद रियाज ने कहा, 'मैं फलों की बिक्री से रोजाना 500 से 600 रुपये कमा लेता था। लेकिन पिछले पांच दिनों से कारोबार बंद है और मेरा 15,000 रुपये का सामान बरबाद हो गया। इस बाजार के अधिकांश विक्रेताओं की स्थिति भी मेरे जैसे ही है। कुछ लोगों को तो लाखों का नुकसान हुआ है।' 

चांद बाग इलाके में दवा की महज एक दुकान सिद्दीकी मेडिकोज खुली थी। वहां आवश्यक दवाओं और प्राथमिक चिकित्सा सामग्रियों की तेजी से बिक्री हो रही थी। इस दवा दुकान के मालिक फैजल इस्लाम ने केवल इतना कहा, 'राजनेताओं को फायदा हुआ और हमारे जैसे आम लोगों को नुकसान। मैंने पुलिस के कहने के बाद ही आज दुकान खोली है।' 

दिन भर साफ-सफाई

इस क्षेत्र में साफ-सफाई के एकमात्र कारोबार में तेजी दिख रही है। लोग जले हुए वाहनों, पिघले हुए लोहे और पत्थरों के मलबे से जितना संभव हो उतना बचाने के लिए उत्सुक हैं। अधिकतर निवासियों ने शिकायत की कि हिंसा खत्म होने के तीन दिन बाद भी नगर निगम के सफाई कर्मचारी इलाके में नहीं पहुंचे हैं। जबकि आसपास सुलगते हुए मलबे के कारण कई लोग झुलस चुके हैं। बारहवीं कक्षा के छात्र मनोज यादव ने कहा, 'इस क्षेत्र में छोटे प्लास्टिक कंटेनर बनाने वाली कई इकाइयां थीं। आग ने रसायनों को चारों ओर फैला दिया होगा। वहां जबरदस्त गंध आ रही है। यहां तक कि मामूली खरोंच या घाव भी तेजी से फैल रहा है और उसमें काफी जलन महसूस हो रहा है। हम काफी डरे हुए हैं।' अन्य निवासियों ने बताया कि अपने जले हुए मकानों की साफ-सफाई के लिए उन्होंने बाहर से लोगों की मदद ली है।

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