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एसबीआई कार्ड्स के आईपीओ में एफपीआई की भागीदारी पर असर

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई March 02, 2020

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का एक वर्ग एसबीआई कार्ड्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम में कई आवेदन शायद नहीं कर पाएगा। देसी बाजार की चौथी सबसे बड़ी पेशकश में संस्थागत निवेशकों की काफी दिलचस्पी की संभावना है क्योंकि सार्वजनिक निर्गम लाने वाली यह पहली कार्ड कंपनी है।

एफपीआई के लिए 2019 में जारी दिशानिर्देश के मुताबिक, मल्टीपल इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (एमआईएम) ढांचे के तहत एक पैन (अलग-अलग लाभार्थी के खाता संख्या के साथ), क्लाइंट आईडी और डिपॉजिटरी आईडी के जरिये जमा कराई गई बोली को अलग-अलग बोली शायद नहीं मानी जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि सभी एक पैन व अलग-अलग डीमैट खाते वाले सभी गैर-एमआईएम निवेशकों को एक निवेशक माना जाएगा और वह आईपीओ में कई बोली लगाने में सक्षम नहीं होगा।

मौजूदा नियमों के तहत सामान्य तौर पर किसी आईपीओ में एक पैन कार्ड के जरिए कई आवेदन करने वालों का आवेदन खारिज हो जाता है। हालांकि पहले के नियमों में म्युचुअल फंडों और विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए अपवाद का प्रावधान किया गया था।

साल 2003 में जारी सेबी के सामान्य सूचना दस्तावेज में कहा गया था, एक पैन कार्ड पर अलग-अलग लाभार्थी के खाते, क्लाइंट आईडी व डीपी आईडी के साथ म्युचुअल फंडों और एफपीआई के खातों के जरिये जमा कराई बोली को मल्टीपल बिड नहीं माना जाएगा। मौजूदा सूचना दस्तावेज में हालांकि सिर्फ एफपीआई को एमआईएम ढांचे के तहत कई आवेदन जमा कराने की अनुमति है।

एक कस्टोडियन ने कहा, सेबी को देखना चाहिए कि मौजूदा एफपीआई की व्यवस्था में एक पैन व अलग-अलग डीमैट खाते के साथ एमआईएम के अलावा कुछ वैध ढांचे हैं। उन्हें कई आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए। नए दिशानिर्देश से अम्ब्रेला फंड पर असर पड़ सकता है, जिसका एफपीआई पंजीकरण एकसमान है। अम्ब्रेला फंड सामूहिक निवेश योजना है, जिसका अस्तित्व एक कानूनी इकाई के तौर पर होता है, लेकिन इसके अलग-अलग उप-फंड होते हैं, लिहाजा वैयक्तिक निवेश फंडों केतौर पर इनकी ट्रेडिंग होती है।

एसआईसीएवी फंडों के साथ यूरोप में यह सामान्य है, जो ओपन ऐंडेड म्युचुअल फंडों के समान है। भारत में निवेश करने वाले करीब 20 फीसदी एसआईसीएवी फंडों का एफपीआई पंजीकरण एकसमान हो सकता है और विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर असर पड़ सकता है।

साल 2019 में जारी एफपीआई के दिशानिर्देशों में प्रोप्राइटरी डेरिवेटिव इन्वेस्टमेंट व एफपीआई के ओडीआई निवेश गतिविधियोंं के लिए अलग-अलग पंजीकरण की बात कही गई है। ऐसे में पार्टिसिपेटरी नोट्स जारी करने वाले एफपीआई उसी पंजीकरण के तहत डेरिवेटिव में निवेश नहीं कर सकते। ओडीआई जारी करने वाले मोटे तौर पर प्राइम ब्रोकर मसलन सिटी बैंक, जेपी मॉर्गन या बीएनपी पारिबा होते हैं। ये विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं जो सेबी के पास खुद के पंजीकृत कराए बिना भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं।

नए दिशानिर्देश के बाद इन ब्रोकरों को दो अलग-अलग निवेश खाते बनाने होंगे : पहला, खुद के लिए और दूसरा, क्लाइंटों के बदले ओडीआई के जरिए निवेश के लिए। चूंकि दोनों खातों में एक ही पैन होगा, लिहाजा किसी आईपीओ में इनका इस्तेमाल अलग-अलग बोली के लिए नहीं किया जा सकता। बोली एक खाते के जरिए लगानी होगी, जो कुछ निवेशकों के लिए फायदेमंद नहीं होगा।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, इस भ्रम में सेबी ने और इजाफा किया है। नियामक ने विगत में संकेत दिया है कि ओडीआई जारी करने वाले आईपीओ में निवेश नहीं कर सकते। इस पर अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।
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