बिजनेस स्टैंडर्ड - बीते साल का प्रदर्शन देखकर ही न कर डालें डेट फंडों में निवेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, April 10, 2020 04:19 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

बीते साल का प्रदर्शन देखकर ही न कर डालें डेट फंडों में निवेश

संजय कुमार सिंह /  March 01, 2020

म्युचुअल फंडों की किसी भी श्रेणी में बीते वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर निवेश करना नुकसान की रणनीति मानी जाती है। लेकिन यह डेट फंडों में विशेष रूप से नुकसानदेह है। पिछले साल डेट फंडों में में लंबी अवधि के फंडों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था, जिन्होंने औसतन 12.13 फीसदी प्रतिफल दिया। हालांकि अगर आप भी ऐसा प्रतिफल हासिल करने के लिए इस श्रेणी में निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो अपना विचार त्याग दें। बाजार की स्थितियां बदलने से आपको इन फंडों में नुकसान हो सकता है। 

 
दरों की दिशा अनिश्चित 
 
ब्याज दरें किस दिशा में जा रही हैं, इसे लेकर आज फंड प्रबंधकों के अलग-अलग विचार हैं। कुछ का मानना है कि लंबी अवधि के बॉन्डों का प्रतिफल 2020 में बढऩे जा रहा है। आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) में मुख्य निवेश अधिकारी (फिक्स्ड इनकम) मनीष डांगी ने कहा, 'वैश्विक और घरेलू स्तर पर वृद्धि में सुधार आ रहा है और महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए 10 साल के सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल अगली तीन-चार तिमाहियों में बढ़कर 7 फीसदी के आसपास पहुंच सकता है, जो इस समय करीब 6.6 फीसदी है।'
 
अन्य डेट फंड प्रबंधकों का मानना है कि लंंबी अवधि के बॉन्डों पर प्रतिफल में नरमी कुछ समय और बनी रह सकती है। आईडीएफसी एएमसी के प्रमुख (निश्चित आय) सुयश चौधरी ने कहा कि इस समय अवधि का अंतर (एक साल और लंबी ïअवधि के बॉन्डों के प्रतिफल में अंतर) बहुत अधिक है। वह कहते हैं, 'केवल मूल्यांकन के लिहाज से लंबी अवधि के बॉन्ड आकर्षक नजर आ रहे हैं। अगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अवधि के अंतर को लक्षित करने वाले टूल का उपयोग जारी रखता है और सरकार मध्यम अवधि में उधारी की खातिर विदेशी पूंजी लाने के किसी खाते को पेश करती है तो लंबी अवधि के बॉन्डों को लेकर नजरिया कम से कम कुछ महीनों तक सकारात्मक बना रहेगा। लेकिन अगर आरबीआई कुछ महीनों बाद इस रणनीति को वापस ले लेता है तो इन बॉन्डों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।'
 
साफ तौर पर ऐसे माहौल में जहां इस बारे में कोई सहमति नहीं है कि ब्याज दरें किस दिशा में जा रही हैं तो खुदरा निवेशकों को सबसे पहले सुरक्षा के सिद्धांत पर टिके रहना चाहिए। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी ने कहा, 'खुदरा निवेशकों को इक्विटी फंडों में जोखिम लेना चाहिए और अपने डेट फंड के पोर्टफोलियो से सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।'
 
आवंटन मॉडल को अपनाएं 
 
खुदरा निवेशकों को डेट फंड का पोर्टफोलियो बनाते समय युक्तिपूर्वक सोचने के बजाय परिसंपत्ति आवंटन मॉडल अपनाना चाहिए। चौधरी ने सुझाव दिया कि निवेशक पोर्टफोलियो को तीन हिस्सों- लिक्विडिटी, कोर और सैटेलाइट बकेट में बांटें। लिक्विडिटी बकेट नकदी प्रबंधन के लिए होना चाहिए। इसके लिए लिक्विड और ओवरनाइट फंडों में निवेश किया जाना चाहिए। निवेशक के निश्चित आय आवंटन में बड़ा हिस्सा कोर बकेट का होना चाहिए, भले ही वित्तीय बाजार किसी भी चक्र में हों।  चौधरी ने कहा, 'कोर निवेश की खूबी यह होनी चाहिए कि इसमें क्रेडिट और अवधि का जोखिम सामान्य होना चाहिए।' इस श्रेणी में वे फंड आएंगे, जो 4-5 साल की अवधि वाले एएए और सॉवरिन बॉन्डों में निवेश करते हैं। इसमें मनी मार्केट से लेकर लघु से मध्यम अवधि के फंड शामिल होंगे। 
 
आखिर में सैटेलाइट बकेट है। इसमें क्रेडिट और अवधि का जोखिम अधिक हो सकता है, लेकिन इसमें आवंटन का शेष या छोटा हिस्सा रखा जाना चाहिए। अगर निवेशक क्षमता रखता है तो वह थोड़ा अवधि या क्रेडिट जोखिम ले सकता है। वह सक्रिय रूप से प्रबंधित डायनेमिक बॉन्ड फंड में निवेश कर सकता है, जिसने पिछले 10 से 15 वर्षं में लगातार ब्याज दर चक्र को लगातार प्रबंधित करने में अपनी क्षमता को साबित किया है। निवेशक अपने धन का करीब 10 से 15 फीसदी हिस्सा लिक्विड बकेट में लगा सकते हैं। वही 60 फीसदी पैसा कोर बकेट में और 20 फीसदी पैसा सैटेलाइट बकेट में लगाया जा सकता है। 
 
अवधि और क्रेडिट जोखिम से बचें 
 
इस समय यह निश्चित नहीं है कि लंबी अवधि में ब्याज दरें किस दिशा में जाएंगी, इसलिए निवेशकों को अवधि के जोखिम लेने से बचना चाहिए। बनर्जी ने कहा, 'ऐसे पुराने निवेशक, जिन्हें वृहद अर्थव्यवस्था की समझ है या जो सलाहकार की सेवाएं लेते हैं, उन्हें ही अवधि का जोखिम लेना चाहिए। ज्यादातर खुदरा निवेशकों को लंबी अवधि के फंडों से दूर रहना चाहिए।' अगर लंबी अवधि के बॉन्डों के प्रतिफल में इजाफा होता है तो उन्हें इन फंडों में घाटा हो सकता है। ऋण के लिहाज से बाजारों में पिछले डेढ़ साल के दौरान बड़ा उठापटक रही है। अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, इसलिए कर्ज की स्थिति ठीक नहीं है। ऋण लौटाने में डिफॉल्ट करने की और घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए यह निवेशकों के लिए क्रेडिट रिस्क फंड जैसी अधिक प्रतिफल वाली रणनीतियां अपनाने को उपयुक्त समय नहीं है। गौरतलब है कि क्रेडिट रिस्क फंड कम रेटिंग वाले बॉन्डों में निवेश करते हैं। 
 
सुरक्षित जगह 
 
इस समय कॉरपोरेट बॉन्डों और सरकारी बॉन्डों के बीच अंतर अधिक है। अगर नकदी की स्थिति ऊंचे स्तरों पर बनी रहती है तो एएए और एए रेटिंग प्राप्त एक से तीन साल के कॉरपोरेट बॉन्डों पर प्रतिफल थोड़ा और कम हो सकता है। डांगी ने कहा, 'उन फंडों में निवेश करें, जो एक से तीन साल की अवधि वाले एएए और एए रेटिंग प्राप्त बॉन्डों में निवेश करते हैं। एक साल के लिए निवेश करने वाला व्यक्ति कम अवधि के फंड में निवेश कर सकता है, जबकि दो से तीन साल के लिए निवेश करने वाले कॉरपोरेट बॉन्ड फंड को चुन सकते हैं।' कॉरपोरेट बॉन्ड फंड का गुणवत्तायुक्त पोर्टफोलियो होना चाहिए, जिनका निवेश मुख्य रूप से एएए रेटिंग प्राप्त सरकारी कंपनियों के बॉन्ड में होना चाहिए। 
 
केवल मार्जिन पर लें जोखिम 
 
बहुत सी कंपनियों ने कम नकदी और आर्थिक मंदी दोनों स्थितियां झेली हैं। इस उठापटक के दौर में भी उनके बॉन्डों की रेटिंग एए रही है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछली कुछ तिमाहियों में हालात कठिन होने के बावजूद उनके बॉन्डों की रेटिंग कम नहीं हुई है। ये ऐसी कंपनियां हैं, जिनका बाजार में दबदबा है और उन पर अत्यधिक कर्ज भी नहीं है। उनके पास अच्छा प्रबंधन भी है। डांगी का सुझाव है कि ऐसे फंड चुनें, जो इन बॉन्डों में निवेश करते हों। आम तौर पर पीएसयू क्षेत्र में एएए रेटिंग प्राप्त दो से तीन साल की अवधि वाले बॉन्डों का प्रतिफल करीब 6.50 से 6.75 फीसदी बना हुआ है। ये एए रेटिंग प्राप्त बॉन्ड 8.5 से 9 फीसदी प्रतिफल दे रहे हैं, इसलिए निवेशक दो प्रतिशत अधिक प्रतिफल अर्जित कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए थोड़ा जोखिम लेना पड़ता है। इस चीज के लिए तैयार निवेशक डायनेमिक बॉन्ड फंडों में निवेश कर सकते हैं। 
Keyword: mutual fund, sebi, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोविड-19 संकट के बाद जल्द उबर पाएगी देश की अर्थव्यवस्था?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.