बिजनेस स्टैंडर्ड - बाजार में हेरफेर रोकने के लिए नई तकनीकों का प्रयोग
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बाजार में हेरफेर रोकने के लिए नई तकनीकों का प्रयोग

समी मोडक /  March 01, 2020

क्या आपने ब्लैक एज का नाम सुना है? हेज फंड उद्योग पर इसी नाम से लिखी गई लोकप्रिय पुस्तक में लेखक शीला कोल्हाटकर ने ब्लैक एज को 'सबसे मूल्यवान जानकारी' के तौर पर परिभाषित किया है, जिसमें यह मालिकाना हक, गैर-सार्वजनिक तथा बाजार में बदलाव लाने वाले कुछ अहम कारकों से जुड़े हो सकते हैं। इसमें किसी तरह का संदेह नहीं है कि पूरे विश्व के पूंजी बाजार नियामक इस तरह की जानकारी के प्रवाह पर रोक लगाने के लिए अथक प्रयास करने के साथ ही इनकी मदद से अवैध लाभ लेने वालों को दंडित भी कर रहे हैं। हालांकि व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, फेसबुक और टेलीग्राम जैसे संचार माध्यमों के जमाने में इस तरह की जानकारी के प्रवाह पर रोक लगाना बहुत मुश्किल है। 

 
इस बीच, भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी भेदिया कारोबार जैसी बाजार को प्रभावित करने वाली गतिविधियों तथा सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करने जा रहा है। सेबी ने 500 करोड़ रुपये की पूंजी के साथ तकनीकी विकास के लिए चार वर्ष का खाका तैयार किया है। यह विभिन्न तरह के डेटा को समाहित करते हुए वृहद रिपॉजिटरी 'डेटा लेक' तैयार करेगी और कृत्रिम मेधा (एआई) एवं मशीन लर्निंग जैसी नवीन तकनीकों की मदद से डेटा मॉडलिंग तथा एनालिटिक्स क्षमताएं विकसित करेगी। फिलहाल ई-कॉमर्स, टेलीकॉम, बैंकिंग तथा वित्तीय सेवाएं जैसे विभिन्न उद्योग नई तकनीकों तथा उपकरणों की मदद से डेटा मॉडलिंग का उपयोग कर रहे हैं जिससे कारोबार में मदद मिलने के साथ ही निर्णय लेने की क्षमता में तेजी तथा सटीकता बढ़ी है। 
 
विश्व में बैंकिंग तथा पूंजी बाजार से जुड़े कई नियामकों ने भी डेटा एनालिटिक्स का काफी अधिक उपयोग शुरू कर दिया है। केपीएमजी इंडिया में पार्टनर कुणाल पांडे कहते हैं, 'डेटा लेक जैसे तंत्र को विकसित करके सेबी बाजार हेरफेर के उदाहरणों का पता लगाने के लिए इन पैटर्न का इस्तेमाल कर सकता है जिससे कार्रवाई में तेजी लाई जा सकती है।' उन्होंने कहा कि डेटा तथा उसके प्रसंस्करण की बेहतर क्षमता हासिल करने से सेबी का भरोसा और मजबूत होगा। फिलहाल सेबी के निगरानी तंत्र में केवल 'संगठित डेटा' पर ही नजर रखी जा सकती है, अर्थात एक्सचेंज, ब्रोकर, जमाकर्ता तथा म्युचुअल फंड जैसे बाजार मध्यस्थों से मिले आंकड़ों की ही निगरानी होती है। हालांकि बैंक स्टेटमेंट तथा आयकर रिटर्न के तौर पर सेबी के पास  'सेमी स्ट्रक्चर्ड डेटा' भी उपलब्ध है लेकिन ब्लॉग, वीडियो तथा ऑनलाइन चर्चाओं में शामिल 'असंगठित डेटा' तक पहुंच नहीं है। सेबी अध्यक्ष अजय त्यागी ने कहा, 'संगठित डेटा विश्लेषण अधिक मददगार साबित नहीं हो रहा है और बाजार को प्रभावित करने वाले लोग निगरानी से बचने के लिए सभी तरह की तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। अव्यवस्थित आंकड़ों के प्रसंस्करण के लिए नई तकनीकों तथा उचित निवेश की आवश्यकता होगी।' सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली जानकारी तक पहुंच बनाना भी इस रणनीति का हिस्सा है। हालांकि उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि एनालिटिक्स टूल या डेटा मॉडलिंग प्लेटफॉर्म के अभाव में सेबी की क्षमताएं सीमित हो सकती हैं। वर्तमान में शेयर बाजार से जुड़ी बहुतायत जानकारी व्यक्तियों तथा कंपनियों द्वारा सोशल मीडिया तथा वाद-संवाद मंचों पर साझा की जा रही है। इस जानकारी की निगरानी करके भेदिया कारोबार रोकना तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना जटिल कार्य है। डेटा लेक रिपॉजिटरी लाने से इस तरह के आंकड़ों के विश्लेषण की सेबी की क्षमताओं का विकास होगा। इसे सेबी के पारंपरिक निगरानी तंत्र से जोड़ देने पर यह बेहतर तकनीक साबित हो सकती है। 
 
उदाहरण के लिए, स्टॉक एक्सचेंज असामान्य गतिविधि दर्ज कराने वाले शेयरों के अलर्ट रोजाना जारी करते हैं। ये सेबी का ध्यान आकर्षित करते हैं लेकिन इनका किसी गैरकानूनी गतिविधि से संबंध स्थापित करना जरूरी है। डेटा लेक की मदद से सेबी सोशल मीडिया, समाचार वेबसाइटें, वाद-संवाद मंच, वीडियो और पॉडकास्ट आदि पर दी जाने वाली संबंधित जानकारी पर नजर रख पाएंगे। उदाहरण के लिए अगर परिणाम यह बताते हैं कि कंपनी के अंदर से गैर-कानूनी तरीके से जानकारी बाहर साझा की गई है तो सेबी कंपनी को जिम्मेदार ठहरा सकती है। साथ ही, सूचीबद्ध कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील तथा विश्वसनीय जानकारी का प्रसार करने के लिए कहा जाता है जिससे सभी निवेशकों को इसके लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। हालांकि कुछ कंपनियां ट्विटर या टेलीविजन न्यूज चैनलों पर जानकारी दे देती हैं, जिन्हें कानून के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसका एक लोकप्रिय उदाहरण हाल ही में अमेरिका में देखा गया, जब एलन मस्क ने अगस्त 2018 में ट्वीट किया कि कंपनी ने निजी तौर पर जाने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर ली है। इसके बाद, अमेरिकी बाजार नियामक, प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) ने प्राधिकरण की मंजूरी के बिना जानकारी साझा करने के लिए मस्क को फटकार लगाई। मस्क द्वारा भविष्य में ट्विटर के उपयोग संबंधी नियामक के दिशानिर्देशों का पालन करने पर सहमति देने के बाद यह मामला पिछले साल सुलझाया गया। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में भी ट्विटर के बढ़ते इस्तेमाल के चलते इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। इसलिए, साझा की गई जानकारी किसी तरह के प्रकटीकरण मानदंडों का उल्लंघन नहीं करती, इसे सुनिश्चित करने के लिए नियामक को नवीन तकनीकों का उपयोग करना होगा। 
Keyword: SEBI, mutual fund, code,,
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