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नागरिकों को डिजिटल पहल से सुलभ सेवाएं

टी ई नरसिम्हन /  March 01, 2020

चेन्नई के सरकारी स्कूलों में छात्रों का देर से पहुंचना एक आम समस्या है। इसके कारण अध्यापक प्रत्येक कक्षा शुरू होने से पहले उपस्थिति लेने में काफी समय खर्च कर देते हैं। अब, चेन्नई के एक स्कूल में प्रायोगिक परियोजना के तौर पर नई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत जैसे ही छात्र स्कूल पहुंचते हैं, एआई तकनीक को समाहित किए चेहरा पहचानने वाली प्रणाली उनकी उपस्थिति तथा आने का समय दर्ज कर लेती है। इससे स्कूल में छात्रों के कक्षाओं से बाहर रहने के मामलों में 85 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

 
तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी (टीएनईजीए) द्वारा कई स्कूलों में परीक्षण किए जाने के बाद अब इस प्रणाली को राज्य के 3,000 सरकारी स्कूलों में लगाया जाएगा। तमिलनाडु ने हाल ही में किसानों की फसल पर लगने वाली बीमारी का पता लगाने में मदद करने के लिए 'एआई तकनीक आधारित फसल कीट का पता लगाना एवं समाधान' परियोजना शुरू की है। राज्य सरकार ब्लॉकचेन तकनीक की मदद से नागरिकों के लिए जरूरी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है, जैसे शिशु के पहले टीकाकरण के लिए सूचना भेजना आदि। 
 
तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी द्वारा तकनीक के उपयोग को लेकर उपरोक्त सभी परियोजनाएं कुछ उदाहरण हैं जिनके जरिये एजेंसी राज्य के मुख्यमंत्री पलनिस्वामी द्वारा ई-गवर्नेंस पहल को बढ़ाने के निर्णय को कारगर बनाने के प्रयास कर रही है।  टीएनईजीए के मुख्य कार्याधिकारी संतोष मिश्रा कहते हैं, 'बेहतर गवर्नेंस के लिए सस्ता, स्वदेशी तथा बेहतर समाधान लाना ही हमारा उद्देश्य है।' आईएएस अधिकारी मिश्रा एक्सीलेंस इन इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज के नए केंद्र में दर्जनों पेशेवरों का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका नजरिया बेहद आसान है: एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ द थिंग्स जैसी नवीन तकनीकों की मदद से सरकार के प्रदर्शन को बेहतर बनाना। इसके तहत ऐसी नीतियां बनाना शामिल है जो पुरानी मान्यताओं तथा अनुमानों के बजाय डेटा तथा एनालिटिक्स पर आधारित हों। 
 
टीएनईजीए बहुत से नए विचारों पर काम कर रही है और इनमें से कुछ को शुरू किया जा चुका है। जैसे छात्रों की उपस्थिति के लिए चेहरा पहचानने की तकनीक। पूर्ण रूप से स्वदेशी तौर पर विकसित इस प्रणाली की लागत केवल 3,000 रुपये है, जिसमें हार्डवेयर भी शामिल हैं। अभी तक इसने 99.5 प्रतिशत सटीकता दर्ज कराई है। मिश्रा कहते हैं, 'इस प्रणाली की मदद से अध्यापकों द्वारा छात्रों करी उपस्थिति लेने में खर्च होने वाले करीब एक घंटे की रोजाना बचत हो रही है और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है।'
 
हानिकारक कीड़ों से निगरानी 
 
टीएनईजीए द्वारा विकसित कीट पहचान प्रणाली का लक्ष्य किसानों को सही समय में कीटरोधी उपाय करने की जानकारी देकर खेती में होने वाले नुकसान को कम करना है। इस प्रणाली का नाम 'उजावन' रखा गया है। किसान कीड़े द्वारा खाए हुए पत्ते की फोटो को मोबाइल ऐप पर अपलोड कर सकता है। बैंकएंड पर ऐप एआई आधारित इमेज प्रोसेसिंग एल्गोरिद्म की मदद से इस तस्वीर का प्रसंस्करण करता है और कीड़े तथा बीमारी की पहचान करता है। 24 घंटे के अंदर किसान को जरूरी सुझाव के साथ संदेश भेज दिया जाता है। 
 
उजावन ऐप पर रोजाना करीब 500 किसान अपनी समस्याएं साझा करते हैं। फिलहाल 5,00,000 से अधिक किसान ऐप का उपयोग कर रहे हैं। तमिलनाडु में खेती पर निर्भर करीब 70 प्रतिशत जनसंख्या इसका उपयोग कर रही है। देश के दूसरे हिस्सों में भी इसका उपयोग करके प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। 
 
चैटबॉट अनिल
 
टीएनईजीए यह समझने का प्रयास कर रही है कि नागरिक सरकारी सेवाओं का डिजिटल स्तर पर उपयोग क्यों नहीं कर रहे हैं। इसके लिए आईआईएम तिरुचिरापल्ली में अध्ययन चल रहा है और निष्कर्ष बताते हैं कि अधिकांश नागरिक कीबोर्ड के बारे में ही नहीं जानते। एजेंसी ने अन्ना यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर स्वचलित वर्चुअल असिस्टेंट 'अनिल' बनाया है, जो तमिल भाषा में लोगों से बात कर सकता है। स्मार्ट असिस्टेंट गाइड अनिल लोगों को जन्म प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र आदि के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रत्येक चरण के बारे में बताता है। टीएनईजीए को उम्मीद है कि भविष्य में इस प्रणाली को आवाज आधारित प्रणाली में तब्दील कर लिया जाएगा।
 
ब्लॉकचेन के साथ ई-सेवाएं 
 
राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई भविष्योन्मुखी परियोजनाओं में ब्लॉकचेन आधारित ढांचा विकसित करना शामिल है जिससे ई-गवर्नेंस सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। टीएनईजीए ने ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट रखा है जो सभी सरकारी विभागों को दिया जाएगा। 'नांबिक्कइ इनायम' नामक (अर्थात भरोसा बढ़ाने वाला संबंध) प्लेटफॉर्म राज्य स्तरीय मूलभूत ढांचा उपलब्ध कराएगा जिसे सभी सरकारी विभाग नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध कराने तथा विभागीय लेनदेन के लिए उपयोग कर सकेंगे।
 
इसके अलावा, टीएनईजीए सभी सरकारी सेवाओं के लिए प्रीडिक्टिव सर्विसेज डिलिवरी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इसके पीछे उद्देश्य नागरिकों को जब आवश्यकता हो तो उन्हें पहले ही त्वरित सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएं। मिश्रा कहते हैं, 'उदाहरण के लिए, जब एक बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जारी किया जाता है तो बच्चे के छह महीने का होते ही हमारी ओर से टीकाकरण संबंधी जानकारी मेसेज के जरिये भेज दी जाएगी। इसी तरह, जब बच्चा पांच साल का हो तो माता-पिता को उसका आधार कार्ड बनाने के लिए संदेश भेज दिया जाएगा।'
 
प्रमाणपत्र जारी करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेटर में जरूरी बदलाव किए जाएंगे जिससे ऑनलाइन जारी होने वाले प्रमाणपत्र सीधे राज्य नागरिक संख्या से मेल खाए और उनके 'सिटिजन वॉल्ट' में पहुंच जाए। टीएनईजीए ने पहले ही राज्य के 7 करोड़ लोगों के लिए नागरिक संख्या तैयार कर ली है और प्रत्येक नागरिक के लिए एक स्टोरेज 'सिटिजन वॉल्ट' तैयार किया गया है।  नागरिक अपने मोबाइल नंबर तथा यूजर आईडी की मदद से इस वॉल्ट में आए कागजात अथवा प्रमाणपत्र देख सकते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक, सभी तरह के जरूरी कागजात जैसे शैक्षणिक कागजात, जाति, आय प्रमाणपत्र आदि सभी ब्लॉकचेन आधारित एक प्रणाली पर लाए जाएंगे और प्रत्येक सरकारी विभाग इससे जुड़ा होगा।
 
मिश्रा कहते हैं, 'राज्य की योजनाएं बिल्कुल स्पष्ट हैं। सरकार के तौर पर हमें नागरिकों को सुलभ प्रक्रियाएं तथा सेवाएं उपलब्ध करानी हैं जो उनकी जीवनशैली आसान करे और उन्हें जरूरी कागजातों तथा प्रमाणपत्रों के लिए इधर-उधर न जाना पड़े।' राज्य ने प्रीडिक्टिव सर्विसेज डिलिवरी प्रोजेक्ट के लिए 90 करोड़ रुपये के बजट का आवंटन किया है जो फिलहाल ब्लूप्रिंट स्तर पर है और अगले वर्ष तक एक  ढांचे में आ जाएगी।  साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तथा कुमार ऐंड राज के संस्थापक विठ्ठïल राज टीएनईजीए के काम की सराहना करते हैं। वह कहते हैं, 'किसी भी सफल ई-गवर्नेंस परियोजना के लिए गुड गवर्नेंस मॉडल, तकनीकी ढांचा तथा मानवीय पूंजी की आवश्यकता होती है। हालांकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इसके साथ साथ राजनीतिक तथा प्रशासकीय इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता होगी।'
 
राज्य सरकार सीटी स्कैन से आंतरिक रक्तस्राव की पहचान करना, दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए सुरक्षित ब्लॉक चेन आधारित उपाय विकसित करना और इंटरनेट ऑफ द थिंग्स आधारित प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में पीने योग्य पानी की आपूर्ति की निगरानी करना जैसे नवीन विचारों पर भी काम कर रही है। 
Keyword: AI, tech, Blockchain,,
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