बिजनेस स्टैंडर्ड - आकर्षक दांव है एसबीआई काड्र्स
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, April 03, 2020 03:18 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

आकर्षक दांव है एसबीआई काड्र्स

श्रीपाद ऑटे /  March 01, 2020

सूचीबद्घता के तीन महीने के अंदर एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने जिस तरह शानदार प्रतिफल दिया, उसके बाद बाजार एसबीआई काड्र्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज (एसबीआई काड्र्स) के आईपीओ को लेकर भी काफी उम्मीदें कर रहा है। मजबूत बुनियादी आधार के साथ साथ शानदार वृद्घि की संभावना और आकर्षक रिटर्न की आस के कारण महंगे मूल्यांकन के बावजूद यह आईपीओ अच्छा दांव बन गया है। यह आईपीओ 2 मार्च को खुल रहा है। 45-46 गुना पीई और 15 गुना की पीबी वैल्यू (अप्रैल-दिसंबर 2019 के सालाना आंकड़ों पर आधारित) के साथ इसका मूल्यांकन वैश्विक क्रेडिट कार्ड प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले महंगा है और घरेलू ऋणदाताओं के मुकाबले भी ऊंचा है। इक्विरस सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष रोहन मंडोरा का कहना है, 'एसबीआई काड्र्स के विशेष बिजनेस मॉडल, मजबूत वृद्घि संभावना और आकर्षक प्रतिफल अनुपात ने महंगे मूल्यांकन को तर्कसंगत साबित किया है।' 'खरीद' रेटिंग दे चुके नारनोलिया फाइनैंशियल एडवाइजर्स के विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊंची आय वृद्घि महंगे मूल्यांकन को सही ठहराती है।  नवंबर 2019 तक कार्डों की संख्या के लिहाज से एसबीआई काड्र्स की 18 प्रतिशत बाजार भागीदारी रही है। वित्त वर्ष 2015-19 से क्रेडिट कार्डों में उसकी बढ़ोतरी 27 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर से हुई। इससे कंपनी को बाजार भागीदारी में 300 आधार अंक की तेजी दर्ज करने में मदद मिली।

 
कुल क्रेडिट कार्ड खर्च में अच्छी तेजी, अपनी पैतृक (एसबीआई) से ग्राहकों के आने, और लागत किफायत (वित्त वर्ष 2017-19 के दौरान लागत-आय अनुपात 204 आधार अंक तक घटा) से एसबीआई काड्र्स को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने में मदद मिली है। कुल परिचालन आय और राजस्व वित्त वर्ष 2017-19 के दौरान 41 से 45 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ा और वित्त वर्ष 2020 के पहले 9 महीनों में इनमें सालाना आधार पर 35 प्रतिशत और 84 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। दो वर्षों के दौरान परिसंपत्तियों पर प्रतिफल 80 आधार अंक तक सुधरकर वित्त वर्ष 2019 में लगभग 5 प्रतिशत दर्ज किया गया।
 
मजबूत वृद्घि और शानदार प्रतिफल अनुपात का रुझान बरकरार रहने की संभावना है। धीमी कार्ड पहुंच (विकसित देशों में प्रति 100 लोगों पर 30 के मुकाबले भारत में प्रति 100 लोगों पर महज 3-4 कार्ड) से खुदरा ऋण वृद्घि अब मजबूत रहने की संभावना है और डिजिटलीकरण भी घरेलू क्रेडिट कार्ड उद्योग के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आया है। क्रिसिल रिसर्च के अनुमानों के अनुसार क्रेडिट कार्ड खर्च वित्त वर्ष 2015-19 के दौरान 32 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर के साथ बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था और वित्त वर्ष 2024 तक इसके 15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाने का अनुमान है। अनुकूल वृहद परिदृश्य के अलावा, छोटे और मझोले इलाकों पर ध्यान केंद्रित करने, मजबूत पहुंच, शानदार को-ब्रांडिंग रणनीति और एसबीआई के नए ग्राहक आधार से भविष्य में वृद्घि की रफ्तार में तेजी लाने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए, मौजूदा समय में कंपनी ने एसबीआई के संभावित ग्राहक आधार (छोटे खातों को छोड़कर) का 10 प्रतिशत हिस्सा भी इस्तेमाल नहीं किया है।
 
कई संभावित जोखिम भी हैं, जिनमें यूपीआई जैसे अन्य डिजिटल चैनलों से प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से शामिल है। हालांकि, इक्रा के सेक्टर हेड (वित्त क्षेत्र-रेटिंग्स) अनिल गुप्ता का कहना है कि क्रेडिट कार्ड बाजार के अन्य डिजिटल माध्यमों की वजह से प्रभावित होने की आशंका कम है, क्योंकि इनका इस्तेमाल अक्सर छोटे आकार के लेनदेन में किया जाता है, जबकि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल ऊंची राशि के लेनदेन में किया जा सकता है। निवेशकों को परिसंपत्ति गुणवत्ता पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए। एमके ग्लोबल के आनंद दामा और नीलम भाटिया का कहना है, 'कमजोर आर्थिक एवं रोजगार रुझानों की वजह से परिसंपत्ति गुणवत्ता जोखिम बढ़ रहा है। एसबीआई काड्र्स को ऊंची भुगतान चूक दर का सामना करना पड़ रहा है और उसका सकल एनपीए अनुपात दूसरी तिमाही के 2.3 प्रतिशत के मुकाबले 2.47 प्रतिशत रहा, जिसे देखते हुए सतर्क रहने की भी जरूरत है।'
 
मंदी या संकट की वजह से कुछ एशियाई देशों (हॉन्गकॉन्ग, ताइवान आदि) में भी क्रेडिट कार्ड भुगतान में चूक के मामले बढ़ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस वजह से, परिसंपत्ति गुणवत्ता में किसी तरह की गिरावट से मूल्यांकन पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि वेतनभोगी ग्राहकों की ऊंची भागीदारी (85 प्रतिशत से अधिक) से कुछ राहत मिली है। कुल मिलाकर, यह निर्गम दीर्घावधि परिदृश्य से निवेशकों के लिए अच्छा दिख रहा है।
Keyword: SBI cards, fintec firm,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार की पहल से दाल मिलों की घटेगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.