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सूक्ष्म वित्त संस्थानों को जिम्मेदारी से कर्ज देने की जरूरत

नम्रता आचार्य /  March 01, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक का प्रतिबंध हटने के बाद बंधन बैंक एक महीने में 250 शाखाएं खोलने पर विचार कर रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब माइक्रोफाइनैंस उद्योग पर दबाव नजर आ रहा है। बंधन का करीब 60 प्रतिशत कारोबार माइक्रोफाइनैंस में है, उस पर एक साझा आचार संहिता पर हस्ताक्षर का दबाव है। बैंक के कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक चंद्रशेखर घोष ने नम्रता आचार्य के साथ बातचीत में बताया कि संहिता क्यों सही नहीं है। प्रमुख अंश... 
 
शाखाएं खोलने को लेकर रिजर्व बैंक द्वारा प्रतिबंध हटाए जाने से वृद्धि पर कैसे असर पड़ेगा?
 
बोर्ड की मंजूरी के बाद जब हम शाखाएं खोलना चाहते थे तो हमें रिजर्व बैंक की अनुमति लेनी पड़ती थी। इसमें वक्त लगता था। अब समय ज्यादा लगने से वृद्धि प्रभावित नहीं होगी।  
 
नई शाखाओं का लक्ष्य क्या है? 
 
हम मार्च के अंत तक देश में 250 नई शाखाएं खोलेंगे। 
 
प्रवर्तकों की हिस्सेदारी पर रिजर्व बैंंक के मानकों को लेकर आपकी क्या योजना है? 
 
हमारे पास अच्छी योजना है। हमारा पहला लक्ष्य अनुपालन है। 
 
खबर है कि सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) बैंक से बाहर निकलना चाहता है। क्या इस पर कोई चर्चा हुई है? 
 
सिडबी की बैंक और होल्डिंग कंपनी (बंधन की) में हिस्सेदारी थी। उन्होंने पहले ही बैंक के स्तर पर बिक्री कर दी है। यह आईपीओ के बाद हुआ। होल्डिंग कंपनी के बारे में उन्होंने कोई सूचना नहीं दी है। 
 
असम में बड़े पैमाने पर चूक की खबरें हैं। इसका कितना असर है? 
 
इसका हम पर कोई असर नहीं है। वहां हमारी पुनर्भुगतान दर 93 प्रतिशत है। यहां तक कि दिसंबर जैसे बुरे दौर में पुनर्भुगतान 80 प्रतिशत था। कुछ अस्थाई समस्याएं हैं और इससे बैंक के कारोबार पर असर नहीं पड़ेगा। 
 
लॉबी समूह एमएफआईएन (माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क) सभी कर्जदाताओं के लिए एक सामान्य आचार संहिता पर जोर दे रहा है। क्या आप इसमें शामिल होने की योजना बना रहे हैं? 
 
नहीं। संहिता पर हस्ताक्षर के लिए वे हमारे ऊपर दबाव डाल रहे हैं। हम एक सार्वभौम बैंक हैं, इसलिए उसमें शामिल नहीं हो सकते हैं। संहिता में दायित्वपूर्ण उधारी की बात कही गई है। हम ऐसा शुरुआत से ही कर रहे हैं। हमारी ब्याज दरें हमेशा सबसे कम रही हैं। एमएफआई को जिम्मेदारी से कर्ज देने की जरूरत है। हम लक्ष्य के आधार पर कर्ज नहीं देते हैं। हर साल हम 20 प्रतिशत नए ग्राहक जोड़ रहे हैं। संहिता में एमएफआई का कहना है कि तीन कर्जदाताओं में से 2 एमएफआई होने चाहिए। एमएफआई को यह फैसला क्यों करना चाहिए कि  कर्ज लेने वाले 3 लोग बैंक में जाएं या 3 लोग एमएफआई में जाएं? 
 
क्या एमएफआई में ओवरलेंडिंग है? 
 
बंधन पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है। एमएफआई उन ग्राहकों को कर्ज देने के लिए चुन रहे हैं, जिन्होंने बंधन से पहले कर्ज लिया है। 
 
क्या एमएफआई के कर्ज देने में तमाम गड़बडिय़ां हैं? 
 
हां, एमएफआई पूर्व में कर्ज देने के लिए बंधन के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। 
 
डिजिटलीकरण में आपकी क्या प्रगति है? 
 
बैंकिंग उद्योग में डिजिटलीकरण की जरूरत है। माइक्रोक्रेडिट कर्ज व्यापक मॉडल है। बहरहाल यह कब तक चल सकता है? इसलिए अब उन्होंने एमएसएमई की तरफ ध्यान देना शुरू किया है। सूचना तकनीक आंकड़ों के विश्लेषण में मदद देती है, जिससे जोखिम कम करने के लिए त्वरित फैसले किए जा सकें। 
 
बंधन बैंक में महिलाओं ने कितना एमएसएमई कर्ज लिया है? 
 
अच्छी संख्या है। न सिर्फ महिलाएं आ रही हैं बल्कि उनके पति भी उद्यम को परिवार के कारोबार में तब्दील कर रहे हैं। 
 
आपके कर्ज के पोर्टफोलियो में किस तरह का बदलाव हो रहा है? 
 
अगले 3 साल में हमारा 50 प्रतिशत कर्ज सस्ते आवास और एमएसएमई क्षेत्र में होगा। इस समय गृह की 195 शाखाएं हैं और हमने 106 खोली हैं। इस तरह से आवास ऋण के लिए हमारी 301 समर्पित शाखाएं हैं। पिछले समय में गृह के आवास ऋण का औसत 10 लाख रुपये है। हम अब यह बढ़कर 12 लाख रुपये हो गया है। सस्ते आवास के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं।
 
क्या राजनीतिक बाधाओं से ग्रामीण कर्ज पर पडऩे वाला असर चिंता का विषय है?
 
नहीं। सामान्यतया ऐसी स्थिति एक सप्ताह से ज्यादा नहीं रहती। आज असम में हो स्थिति है, उसकी तुलना में नोटबंदी के समय में स्थिति बहुत खराब थी। हमारे लिए यह समस्या नहीं है। 
Keyword: bandhan bank, branch, RBI,
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