बिजनेस स्टैंडर्ड - 'विवाद से विश्वास' बढ़ाएगी करदाताओं का उत्पीडऩ
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 26, 2020 12:59 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

'विवाद से विश्वास' बढ़ाएगी करदाताओं का उत्पीडऩ

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली March 01, 2020

आयकर विभाग के अधिकारी प्रस्तावित विवाद समाधान योजना के अजीब से लक्ष्य से हतप्रभ हैं, जो सीधे उनके पदोन्नति और वेतन वृद्धि से जुड़ा होगा। एक आधिकारिक पत्र व्यवहार में फील्ड ऑफिसरों को सूचित किया गया है कि विवाद से विश्वास योजना के तहत प्रदर्शन के आकलन का लक्ष्य 100 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि कर अधिकारियों को प्रस्तावित योजना के तहत अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पात्र मामलों को लेना होगा, जिससे करदाताओं का उत्पीडऩ बढऩे का डर है। 
 
इस समय करदाता पहले ही लगातार फोन कॉल और कर अधिकारियों के दबाव से जूझ रहे हैं और उनके ऊपर योजना के तहत विवाद सुलझा लेने और दर्ज मुकदमे वापस ले लेने का दबाव है। पिछले सप्ताह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से भेजी गई आधिकारिक सूचना के मुताबिक, 'विवाद से विश्वास योजना में संबंधित फील्ड अधिकारियों के प्रदर्शन के आकलन का लक्ष्य विवादित कर के मामले में 100 प्रतिशत रखा गया है। इस योजना के तहत फील्ड अधिकारियों को 100 प्रतिशत मामलों का समाधान करना होगा।' 
 
प्रत्यक्ष कर अधिकारियोंं का तर्क है कि 100 प्रतिशत मामलों के समाधान का लक्ष्य अनुचित है और इससे करदाताओं का उत्पीडऩ बढ़ सकता है। इसके अलावा उनका तर्क है करदाता को योजना में शामिल होने के लिए दबाव देने का मतलब यह हुआ कि करदाताओं से उनके अपील करने के अधिकार को छीना जा रहा है। एक कर अधिकारी ने कहा, 'पहले चरण में ही 100 प्रतिशत लक्ष्य कैसे रखा जा सकता है? इससे यह संकेत मिलता है कि आप करदाताओं के अपील करने के अधिकार को छीन रहे हैं और विवाद का समाधान कर रहे हैं।'
 
इस समय करदाताओं को कर अधिकारियोंं की ओर से आने वाली कॉल से जूझना पड़ रहा है। नई दिल्ली के एक करदाता ने कहा कि सीआईटी (अपील) या आईटीएटी से मामला वापस लेने और योजना के तहत उसका समाधान करने के लिए कर अधिकारियों की ओर से उनके पास कम से कम 5 बार कॉल आ चुकी है। ऐसा न करने पर उन्हें कर अधिकारियों के पास जाकर सफाई देनी होगी कि वे योजना में शामिल क्यों नहीं हो रहे हैं।  अशोक माहेश्वरी ऐंड एसोसिएट्स के मैनेजिंग पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, 'इन अव्यावहारिक लक्ष्यों का अनपेक्षित असर हो सकता है। सीआईटी (ए) शायद योजना की अवधि तक या तो कोई फैसला नहीं करेंगे या करदाताओं के खिलाफ फैसला कर सकते हैं। साथ ही हमें नहीं लगता कि इस तरह का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और बड़े करदाताओं के हिसाब से योजना की सफलता सीमित रह सकती है।'  एएमआरजी एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा, 'कर अधिकारियों को प्रेरित किया गया है कि वे समझाने बुझाने से लेकर बल का इस्तेमाल कर सकते हैं और करदाताओं से योजना में किसी भी हाल में शामिल होने को लेकर दबाव डाल सकते हैं, क्योंकि इसका असर उनके प्रदर्शन, आकलन और मूल्यांकन पर पड़ेगा।'  नकदी का प्रबंधन और कंपनी से समय से मंंजूरी लेना प्रमुख चुनौती है, जिसका सामना कर आकलन करने वालों को करना पड़ रहा है। घोषणा करने वाले को विवाद से विश्वास फार्म के साथ आयुक्त (अपील), आयकर अपील न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय से ममला वापस लेने का आवेदन भी लगाना होगा।  संशोधित विवाद से विश्वास विधेयक सोमवार को संसद का सत्र शुरू होने के बाद कभी भी संसद में पेश किया जा सकता है। संसद की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित कर दिया जाएगा। 
Keyword: income tax, cabinet, nirmala sitaraman, budget,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई को और पुख्ता करना चाहिए अपना निगरानी तंत्र?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.