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कोरोना की गिरफ्त में बाजार

समी मोडक और सुंदर सेतुरामन / मुंबई March 01, 2020

कोरोनावायरस के कहर से बाजार को फिलहाल राहत के संकेत नहीं दिख रहे हैं। पिछले हफ्ते शेयर बाजारों का प्रदर्शन दशक में सबसे खराब रहा और आर्थिक आंकड़ों पर भी वायरस का असर दिखने लगा है। चीन में फैक्टरी गतिविधि की वृद्घि में तेज गिरावट दर्ज की गई। चीन के आधिकारिक परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) फरवरी में 35.7 दर्ज किया गया जो जनवरी में 50 अंक पर था। सप्ताहांत में भी चीन और दक्षिण कोरिया में कोरोनावायरस के नए मामले सामने आए, वहीं अमेरिका, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी वायरस की वजह से लोगों के मरने की खबर है।
 
फस्र्ट ग्लोबल के संस्थापक और वाइस चेयरमैन शंकर शर्मा ने कहा, 'बाजार के लिए यह कठिन समय है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्घि पर भी पड़ सकता है।' अधिकांश वैश्विक बाजारों में गिरावट देखी जा रही है और हालिया उच्च स्तर से करीब 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि अगर स्थिति काबू में नहीं आई तो आने वाले महीनों में यह वैश्विक महामारी का रूप ले सकता है। ऐसा होने पर बाजारों में 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के समूह प्रबंध निदेशक एवं चेयरमैन मोतीलाल ओसवाल ने कहा, 'कोरोनावायरस का दुनिया भर में तेजी से प्रसार हो रहा है और बाजार को डर है कि यह महामारी बन सकता है। अमेरिका और यूरोप में इसके प्रसार होने से वैश्विक मंदी की चिंता बढ़ सकती है। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर भी असर पड़ सकता है और भारत सहित अन्य देशों की आर्थिक वृद्घि भी प्रभावित हो सकती है।' बीते शुक्रवार को बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4 फीसदी लुढ़क गया और 2015 के बाद एक दिन में आई यह सबसे बड़ी गिरावट रही। दोनों सूचकांक मध्य जनवरी के सर्वकालिक उच्च स्तर से करीब 9 फीसदी नीचे आ गया है। 
 
हालांकि बीते समय में बाजार में 10 फीसदी की गिरावट आने के बाद अच्छी वापसी देखने को मिली थी। लेकिन इस बार तेज सुधार की गुंजाइश काफी कम है क्योंकि कोरोनावायरस का संकट अभी टला नहीं है। बीते शुक्रवार को भी शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी बाजार में तेज गिरावट देखी गई लेकिन बाद में यह 1.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ। अमेरिका में 10 वर्षीय टे्रजरी रिकॉर्ड 1.14 फीसदी पर बंद हुआ। बाजार के भागीदारों का कहना है कि 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल कोरोना को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है। भारत की बात करें तो बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला वीआईएक्स सूचकांक 31 फीसदी चढ़ गया। टे्रडरों का कहना है कि बाजार सितंबर के स्तर पर आ सकता है और आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
 
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले हफ्ते शेयर बाजार से 12,000 करोड़ रुपये की निकासी की। घरेलू निवेशकों ने इससे ज्यादा रकम निवेश किया लेकिन गिरावट को थामने में विफल रहे।विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवली बनी रह सकती है और केवल दीर्घावधि तक निवेश करने वाले निवेशक ही अपनी प्रतिबद्घताओं को पूरा करने तक निवेश बनाए रख सकते हैं।हालांकि बाजार के भागीदार शॉर्ट कवरिंग जैसे तकनीकी कारकों की वजह से बाजार की वापसी की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहा है कि दीर्घावधि वाले निवेशक गिरावट पर खरीद कर सकते हैं क्योंकि केंद्रीय बैंकों और सरकार की नीतियों से बाजार को राहत मिल सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दर में कटौती के भी संकेत दिए हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी में कार्यकारी निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी एस नरेन ने कहा, 'ऐतिहासिक तौर पर बाजार में जब भी गिरावट आती है तो वह निवेश का आकर्षक मौका होता है। लेकिन यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि मौजूदा संकट कब तक बना रहेगा, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए ऐसी स्थिति में निवेश करते समय किस्तों में निवेश करना चाहिए।'
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