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डीसीसी बैठक विफल, कंपनियों को करना होगा इंतजार

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली February 28, 2020

लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपये के लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क भुगतान के संकट से जूझ रहे दूरसंचार उद्योग के लिए केंद्र सरकार द्वारा राहत पैकेज की राह में अपर्याप्त डेटा बाधक बन रहा है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रहे दूरसंचार क्षेत्र के लिए राहत उपायों की उम्मीद के साथ शुक्रवार को हुई डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (डीसीसी) की बैठक डेटा मुद्दे पर विफल साबित हुई। माना जा रहा है कि निर्णय लेने वाली उच्च पदस्थ संस्था डीसीसी को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की गणना के लिए डेटा में विसंगति का सामना करना पड़ रहा है। 
 
डीओटी सचिव की अध्यक्षता वाली डीसीसी में वित्त, वाणिज्य और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के सचिवों के अलावा नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी भी शामिल हैं। डीसीसी के सदस्यों ने दो घंटे चली बैठक के दौरान हुई चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि एजीआर डेटा के मिलान के लिए और ज्यादा विवरण की जरूरत है। डीसीसी द्वारा आने वाले दिनों में फिर से बैठक किए जाने की संभावना है। हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि बैठक में एजीआर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, लेकिन भारत नेट प्रोजेक्ट पर पीपीपी (सार्वजनिक निजी भागीदारी) के लिए परियोजना क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। 
 
दरअसल, इस बैठक से कुछ दिन पहले, वोडाफोन आइडिया ने सरकार को बताया था कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित बकाया तब तक चुकाने में सक्षम नहीं होगी, जब तक कि भुगतान अवधि और कम लाइसेंस शुल्क के संदर्भ में सरकार द्वारा मदद नहीं दी जाती।  वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग को भेजे एक पत्र में एजीआर बकाया के खिलाफ लगभग 8,000 करोड़ रुपये के जीएसटी रिफंड समायोजन का अनुरोध किया था।  दूरसंचार उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने गुरुवार को केंद्र सरकार से इस मामले में तेजी दिखाने का अनुरोध किया था जिससे कि इस क्षेत्र को पुन: पटरी पर लाया जा सके।
 
सीओएआई ने लाइसेंस शुल्क को 8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किए जाने के अलावा स्पेक्ट्रम इस्तेमाल शुल्कों में भी कटौती किए जाने का अनुरोध किया है।  सीओएआई ने चीन, ब्राजील और रूस जैसे बाजारों की तुलना में भारत के कम औसत प्रति उपयोगकर्ता राजस्व (एआरपीयू) का हवाला देते हुए दूरसंचार क्षेत्र के हित को ध्यान में रखकर न्यूनतम मूल्य पर जोर दिया था।  सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल अक्टूबर में दूरसंचार कंपनियों की एजीआर गणना में गैर-प्रमुख व्यवसायों से राजस्व शामिल किए जाने के निर्णय का समर्थन किया था। एजीआर का एक हिस्सा लाइसेंस और स्पेक्ट्रम शुल्क के तौर पर सरकारी खजाने में जाता है।  इस महीने के शुरू में सर्वोच्च न्यायालय ने भुगतान अवधि में रियायत मांगने के संदर्भ में भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की याचिका को ठुकरा दिया था। 
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