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लक्ष्मी विलास पर बढ़ी बात

हंसिनी कार्तिक / मुंबई February 27, 2020

सिंगापुर सरकार की निवेश कंपनी टेमासेक होल्डिंग्स ने नकदी संकट से जूझ रहे लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने कहा कि टेमासेक ने एलवीबी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए कंपनी मामलों और वित्त मंत्रालयों से संपर्क साधा है। एक सूत्र ने कहा,'टेमासेक की पहले से वित्तीय क्षेत्र की कई इकाइयों में हिस्सदेारी है। लिहाजा, वह इस बात की अनुमति चाहती है कि एक या अधिक भारतीय बैंकों में हिस्सेदारी खरीद सकती है या नहीं।'
 
सूचीबद्ध कंपनियों की बात करें तो टेमासेक की एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी है। कंपनी ने पिछले साल ऐक्सिस बैंक और येस बैंक से अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी। सरकार से अनुमति मिलने के साथ टेमासेक एलवीबी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौते की पेशकश करेगी। एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, 'सितंबर 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक  ने एलवीबी को सुधारात्मक कार्रवाई के तहत रखा था। नियामक के साथ बातचीत के बाद बैंक ने कहा है कि उसकी पूंजी निवेश संरचना कैथलिक सीरियन बैंक की तरह ही होगी।' 31 दिसंबर तक एलवीबी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 3.46 प्रतिशत था, जो अनिवार्य 9 प्रतिशत स्तर से कहीं कम है। इससे बैंक को भारत में सबसे कमजोर बैंक के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकता है। 31 दिसंबर 2019 तक बैंक का कुल ऋण आवंटन 17,535 करोड़ रुपये और जमा राशि (डिपॉजिट) 23,565 करोड़ रुपये थी। 
 
समझा जा रहा है कि टेमासेक शुरू में एलवीबी में हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपनी भारतीय बैंकिंग इकाई डीबीएस बैंक इंडिया (डीबीएस सिंगापुर की सहायक इकाई) का सहारा ले सकती है। मई 2016 में आरबीआई ने विदेशी बैंकों को किसी भारतीय बैंक में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी थी। आरबीआई के परिपत्र के अनुसार किसी कमजोर बैंक के पुनर्गठन या बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए विदेशी बैंक कुछ शर्तों के साथ इस सीमा से अधिक हिस्सेदारी भी खरीद सकते हैं। डीबीएस बैंक इंडिया नियामकीय शर्तों के तहत एलवीबी में हिस्सेदारी खरीद कर भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है।
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