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राष्ट्रीय राजमार्गों का आवंटन 6 साल में सबसे सुस्त

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली February 27, 2020

जमीन अधिग्रहण में देरी की वजह से राजमार्ग परियोजनाओं का आवंटन 6 साल में सबसे सुस्त हो गया है। इसकी वजह से अगले 2 साल तक निर्माण में सुस्ती बनी रहेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) दोनों ही नई परियोजनाओं के आवंटन को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। एनएचएआई ने चालू वित्त वर्ष के दौरान 3,700 से 4,000 किलोमीटर परियोजनाएं आवंटित की है। इक्रा के वाइस प्रेसीडेंट, एसोसिएट हेड-कॉर्पोरेट राजेश्वर बुर्ला ने आज कहा, 'सड़क परियोजनाओं का आवंटन पिछले 6 साल में सबसे सुस्त रहा है और वित्त वर्ष 2021 में भी स्थिरता बने रहने की उम्मीद है।' 
 
अगले वित्त वर्ष में भी एनएचएआई के ऑर्डर बुक में स्थिरता बनी रहेगी। बहरहाल इस समय राजमार्ग परियोजनाओं पर काम सही चल रहा है। उन्होंने कहा, 'इसकी वजह यह है कि पिछले 4 साल के दौरान परियोजनाओं का आवंटन बहुत ज्यादा हुआ है, जिसकी वजह से कतार में परियोजनाएं ज्यादा हैं। उन पर इस समय काम हो रहा है।' परियोजना आवंटन में सुस्ती आई है, जिसका असर 2022 में नजर आएगा क्योंकि 2019 से आवंटन सुस्त हुआ है। बहरहाल कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि जमीन अधिग्रहण समस्या नहीं है, क्योंकि मुआवजा बेहद आकर्षक है। 
 
पूर्व सड़क परिवहन सचिव विजय छिब्बर ने कहा कि परियोजनाओं के आवंटन में देरी की एक वजह मूल्यांकन प्रक्रिया भी थी। उन्होंने कहा, 'मुख्य रूप से धन की वजह से सड़क परियोजनाओं को लागू करने का काम प्रभावित हुआ है, क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सड़क परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से देरी हो रही है।' उन्होंने कहा कि एक बार जब राजमार्ग परियोजना वित्त मंत्रालय के पास मूल्यांकन के लिए चली जाती है तो उसमें 6 से 9 महीने की देरी हो जाती है क्योंकि इसे वित्त की स्थाई समिति के पास से होकर गुजरना होता है, जिसकी वजह से उसे लागू करने में देरी होती है। 
 
कभी कभी परियोजनाओं को मंजूरी हासिल करने में मुश्किल होती है क्योंकि वित्त मंत्रालय तब तक मंजूरी नहीं देता, जब तक कि जमीन अधिग्रहण का 90 प्रतिशत काम पूरा न हो गया हो। छिब्बर ने कहा, 'व्यावहारिक रूप से देखें तो 80 प्रतिशत जमीन पर कब्जा मिलने के बाद काम शुरू किया जा सकता है और शेष 10 प्रतिशत अधिग्रहण काम शुरू होने के बाद किया जा सकता है क्योंकि पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया में 3 से 4 महीने लग जाते हैं। वहीं 80 प्रतिशत जमीन मिलने के बाद काम शुरू कर देने पर परियोजना में तेजी लाई जा सकती है।' 
 
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल संसद में कहा था कि सार्वजनिक उपयोग की जगहों के स्थानांतरण, पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरी और रेलवे की सड़क उपरिगामी सेतु (आरओबी) और सड़क भूमिगत सेतु (आरयूबी) जैसे मसलों के कारण देरी हो रही है। उन्होंने कहा था कि अतिरिक्त सुविधाओं के लिए जनता के विरोध प्रदर्शन, पंचाट और ठेकेदार के साथ ठेके संबंधी विवाद, भूमि अधिग्रहण में आने वाली कठिनाइयों, ठेकेदारों के खराब प्रदर्शन की वजह से भी निर्माण कार्य प्रभावित होता है।
 
मंत्री के मुताबिक सरकार ने सड़क परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए कदम उठाए हैं। मौजूदा सर्किल दर से ज्यादा मूल्य या पिछले तीन साल के दौरान जमीन की बिक्री संबंधी लेन देन के औसत से 50 प्रतिशत ज्यादा मूल्य दिए जाने का प्रावधान है। केंद्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण संबंधी मसलोंं के समाधान के लिए राज्य के मुख्य सचिवों के अधीन समिति का गठन किया है। तेजी से फैसले करने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को अधिकार दिया गया है। अन्य मंत्रालयों व राज्य सरकारों के साथ बेहतर तालमेल के लिए केंद्र सरकार नियमित समीक्षा करती है। 
Keyword: road, transport, NHAI, expressway, BOT,,
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