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इंडसइंड बैंक के प्रमुख की दौड़ में टाटा कैपिटल के सबरवाल

रघु मोहन / मुंबई February 26, 2020

इंडसइंड बैंक के रमेश सोबती के उत्तराधिकारी की दौड़ थोड़ी दिलचस्प हो गई है क्योंकि टाटा कैपिटल के राजीव सबरवाल भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं। अब टाटा कैपिटल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी सबरवाल और हिंदुजा के प्रवर्तित बैंक के मौजूदा प्रमुख (उपभोक्ता कर्ज) सुमंत कठपालिया के बीच यह दौड़ दोतरफा हो गई है। साथ ही यह पहला मौका है जब किसी एनबीएफसी के प्रमुख को बैंक के संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है। इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ सोबती का कार्यकाल इस साल 23 मार्च को खत्म हो रहा है। 
 
निजी क्षेत्र के दो बैंकों में बाहरी लोग सत्ता संभाल चुके हैं - एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के अमिताभ चौधरी ने ऐक्सिस बैंक में शिखा शर्मा की जगह ली है जबकि डॉयचे बैंक के रवनीत गिल ने येस बैंक से राणा कपूर के निकलने के बाद पद संभाला। चंदा कोछड़ केबाद पद संभालने वाले संदीप बख्शी आईसीआईसीआई बैंक के मुख्य परिचालन अधिकारी थे और तीन दशक से आईसीआईसीआई समूह के दिग्गज रहे हैं। इंडसइंड बैंक के साथ कोई मसला नहीं जुड़ा है, जो उसके उत्तराधिकार की दौड़ को अलग बनाती है, जैसा कि आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और येस बैंक के मामलों मे देखा गया था। यह हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि आरबीआई शायद अनिवार्य रूप से किसी आंतरिक व्यक्ति को बने रहने पर जोर नहीं दे सकता है। देश के किसी अन्य बैंक में सभी आला अधिकारी अपने कैरियर के ज्यादातर समय प्रमुख के तौर पर बैंक के साथ जुड़े नहीं रहे हैं। हमेशा ही कयास लगाए गए थे कि अगर किसी एक को सोबती की जगह तैनात किया गया तो पूरी टीम एकसाथ रह पाएगी, यह निश्चित नहीं है। यह चिंता साल 2014 में विश्लेषकों ने जताई थी जब उनके कार्यकाल में एक साल की बढ़ोतरी की गई थी। वह 2015 में 65 साल के हो गए, जो तब निजी बैंक के प्रमुख के अवकाश प्राप्त करने की सीमा थी। एक साल का विस्तार तब कंपनी अधिनियम के तहत दिया गया था और उसकी सीमा 70 साल की गई थी। सबरवाल का नाम आने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मौजूदा अग्रणी टीम वहां एक साथ रह पाएगी। 
 
अगर आरबीआई सबरवाल के नाम को हरी झंडी देता है तो एचडीएफसी बैंक में भी बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति हो सकती है जहां प्रबंध निदेशक आदित्य पुरी का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2020 को समाप्त हो रहा है। माना जा र हा है कि दोनों बैंक के मौजूदा प्रबंधन की तरफ से चुने गए उम्मीदवार को जरूरी नहीं है कि केंद्रीय बैंक की मंजूरी मिल ही जाए। केंद्रीय बैंक उम्मीद करता है कि निजी बैंक उत्तराधिकार की योजना अग्रिम तौर पर बनाए ताकि आंतरिक या बाहरी उम्मीदवार के चयन के लिए पर्याप्त समय हो। 
Keyword: indusind bank, tata capital,,
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