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ताप्ती क्षेत्र के लिए ओएनजीसी ने मांगा नया लाइसेंस

शाइन जैकब / नई दिल्ली February 26, 2020

सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) मुंबई के नजदीक ताप्ती क्षेत्र को बहाल करने की कतार में शामिल हो गई है। इस मामले से जुड़े कई सूत्रों ने बताया कि इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए देश की सबसे बड़ी हाइड्रोकार्बन उत्पादक ने 10 साल के लिए सरकार से नए पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस की मांग की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और शेल इन क्षेत्रों से 2016 में उत्पादन बंद कर दिया था और ओएनजीसी पहले से ही ताप्ती के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल अपने अन्य क्षेत्रों में कर रही है, जिससे उनका बेहतर इस्तेमाल हो सके।  पन्ना-मुक्ता और ताप्ती (पीएमटी) क्षेत्र का निजीकरण 1994 में किया गया था। आरआईएल और शेल का सहायक इकाई बीजी एक्सप्लोरेशन ऐंड प्रोडक्शन इंडिया (बीजीईपीआईएल) के माध्यम से पीएमटी संयुक्त उद्यम में प्रत्येक की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सरकार की ओर से नामित कंपनी के रूप में शेष 40 प्रतिशत हिस्सा ओएनजीसी के पास है। 
 
निजी फर्मों द्वारा उत्पादन बंद कर दिए जाने के बाद ताप्ती प्रॉसेस प्लेटफॉर्म सुविधाएं 2016 में ओएनजीसी को सौंप दी गई थीं। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने पुष्टि करते हुए कहा, 'ओएनजीसी ने फ्लेटफॉर्मों को अपने हाथ में ले लिया है और वह सी-सीरीज क्लस्टर और दमन परियोजना के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। जहां तक ताप्ती में उत्पादन करने की योजना का सवाल है, कंपनी इस राह पर है।'  संयुक्त परिचालन मॉडल के तहत भारत में पहली बार पीएमटी क्षेत्र का परिचालन किया गया था। 
 
शेल और आरआईएल ने दिसंबर 2019 में एक बयान में कहा था कि 5 मानव रहित प्लेटफॉर्मों और इन फील्ड पाइपलाइनों सहित ताप्ती की सुविधाओं के  कम करने के स्थलीय बहाली और उसे वापस लेने का काम इस समय पीएमजी संयुक्त उद्यम द्वारा भारत के पहले अपतटीय वापसी व साइट बहाली परियोजना के तहत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'ओएनजीसी अगर ताप्ती प्लेटफॉर्म को जारी रखना चाहती है तो वह इसके लिए अन्वेषण लाइसेंस लेगी।'  ओएनजीसी ने पहले ही पेट्रोलियम मंत्रालय से संपर्क किया है और हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय अन्वेषण के लिए लाइसेंस की मांग कर रहा है। मंत्रालय इस पर अंतिम फैसला करेगा। 
 
सरकार ने पिछले साल दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरआईएल के पेट्रोलियम कारोबार में उसकी हिस्सेदारी सऊदी अरामको को बेचने की कंपनी की योजना यह कहते हुए रोक लगाने की मांग की थी कि कंपनी ने पीएमटी फील्ड के 4.5 अरब डॉलर बकाये का भुगतान नहीं किया है। कंपनियों की राय है कि जब तक मध्यस्थता पंचाट मात्रा तय नहीं कर देता है, इस चरण में भुगतान की जाने वाली किसी राशि का दावा नहीं किया जा सकता है। सूचना के मुताबिक इंग्लिश हाई कोर्ट ने 12 फरवरी को एक फैसला किया है, जिसमें भारत सरकार की 2018 के मध्यस्थता फैसले को लेकर की गई 5 चुनौतियों को खारिज कर दिया है। 
 
दिसंबर में पीएमटी क्षेत्रों को निजी कंपनियों ने इन क्षेत्रों के लिए हुए उत्पादन साझा करने के समझौते की अवधि बीतने के बाद ओएनजीसी को सौंप दिया था।  ओएनजीसी के एक अधिकारी ने कहा, 'इस समय इस क्षेत्र से प्रति दिन 11,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होने के साथ कुछ मात्रा में प्राकृतिक गैस का भी उत्पादन हो रहा है।' दिसंबर 2014 में उत्पादन शुरू होने के बाद से इन क्षेत्रों से 21.1 करोड़ बैरल (एमएमबीबीएल) तेल और 1.24 अरब घन फुट (टीसीएफ) प्राकृतिक गैस का उत्पादन हुआ है। सूत्रों ने कहा कि अगर ओएनजीसी नए सिरे से उत्पादन शुरू करती है तो इसके पीछे यह विचार होगा कि ताप्ती प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अन्य क्षेत्रों के लिए भी संयुक्त रूप से किया जाए। 
Keyword: ONGC, oil gas, RIL,,
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